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बढ़ रहे सर्पदंश के केस, दो माह में पांच की मौत, 90 का हुआ उपचार

बरसात शुरू होते ही सर्पदंश के केस बढ़ जाते हैं। सिम्स अस्पताल में पिछले दो माह में 90 सर्पदंश के केस पहुंचे हैं। जबकि पांच लोगों की समय पर इलाज न मिलने से मौत भी हो चुकी है।

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Ashish Gupta

Aug 15, 2015

killed five in two months

cases of snake bite

बिलासपुर.
बरसात शुरू होते ही विषैले सांप काटने से लोग मौत के मुंह में जा रहे हैं। सिम्स अस्पताल में पिछले दो माह में 90 सर्पदंश के केस पहुंचे हैं। इसके साथ ही पांच लोगों की समय पर इलाज न मिलने से मौत भी हो चुकी है। सिम्स प्रबंधन का दावा है कि बढ़ते केस को देखते हुए उनके यहां पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम दवा उपलब्ध है। डॉक्टरों का कहना है कि सर्पदंश से पीडि़त को तभी बचाया जा सकता है जब उसे समय पर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया जाए।


बिलासपुर जिले में अधिकतर सर्पदंश के पीडि़त ग्रामीण इलाकों से आते हैं। ग्रामीण इलाकों में सर्प अधिक पाए जाते हैं। जबकि शहरी क्षेत्र में इनकी संख्या कम है। जिले में सर्प काटने के 90 प्रतिशत केस इलाज के लिए सिम्स लाए जाते हैं। कुछ कम गंभीर मरीज सीएचसी व जिला अस्पताल पहुंचते हैं। सिम्स चिकित्साधीक्षक डॉ. रमणेश मूर्ति की मानें तो उनके यहां वर्तमान में दो हजार वायल एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है। कम होते ही नए स्टॉक के लिए आर्डर कर दिया जाता है।


एक दिन में दो या तीन मरीज

सिम्स चौकी प्रभारी के अनुसार कई बार स्थिति ये हो जाती है कि एक-एक दिन में दो से तीन सर्पदंश के मरीज आ जाते हैं। सिम्स आने वाले मरीजों में उन्हीं पीडि़तों की जान जाती है, जो या तो बैगा व झाडफ़ूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं या किसी अन्य कारणों से पीडि़त को देरी से अस्पताल पहुंचाते हैं।


झाडफ़ूंक नहीं, कराएं उपचार

सिम्स चिकित्सालय के चिकित्साधीक्षक डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि सांप काटने के बाद पीडि़त को ठीक करने के लिए लोग झाडफ़ूंक का सहारा लेते हैं। इस तरह से पीडि़त को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। जब तक उसे अस्पताल ले जाते हैं और उसका इलाज शुरू होता है, देर हो चुकी होती है। इससे मरीज की मौत हो जाती है। यदि समय पर अस्पताल पहुंचाया जाए तो 99 प्रतिशत मरीजों को बचाया जा सकता है।


सर्प दंश पर क्या करें

- शरीर के उस हिस्से को जहां सर्प ने काटा है तत्काल धो दें।

- ऊपरी हिस्से को किसी रस्सी अथवा कपड़े से अच्छे से बांध दें।

- मरीज के मन को बहला कर रखें ताकि वह घबराए नहीं।

- उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाएं।

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