
दिल्ली की सबसे उम्रदराज तस्कर 'चाची' गिरफ्तार (Photo: X)
न ज्यादा सामान, न कोई जल्दबाजी, सिर्फ चार पराठे और एक बोतल पानी। उत्तर प्रदेश के मेरठ से मध्य प्रदेश के इंदौर तक बार-बार ट्रेन से सफर करने वाली 67 वर्षीय रामबीरी उर्फ ‘चाची’ इसी सादगी की आड़ में सालों तक कानून की नजरों से बचती रहीं। दिल्ली पुलिस ने रामबीरी को गंभीर संगठित अपराध में शामिल अब तक की सबसे उम्रदराज महिला आरोपियों में से एक बताया है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, मेरठ की रहने वाली रामबीरी को 9 जनवरी को शकूर बस्ती रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया गया। उस समय वह खरगोन से हथियारों की खेप लेकर दिल्ली लौट रही थीं। तलाशी में उनके सामान से चार आधुनिक पिस्तौल और तीन मैगजीन बरामद की गईं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इससे पहले भी दिल्ली-NCR में महिला हथियार तस्करों की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन 67 साल की उम्र का यह मामला बेहद असामान्य है।
बेहद शातिर थी रामबीरी ‘चाची’
9 जनवरी को शकूर बस्ती रेलवे स्टेशन के पास से पकड़ी गई रामबीरी के पास से 4 अत्याधुनिक हथियार और 3 मैगजीन बरामद की गई हैं। लेकिन उसकी गिरफ्तारी से ज्यादा हैरान करने वाला उसका तस्करी का तरीका और उसके अपराधी बनने का सफर है।
रामबीरी के पकड़े न जाने का सबसे बड़ा राज उसका सादा रहन-सहन था। वह उत्तर प्रदेश के मेरठ से मध्य प्रदेश के इंदौर तक का लंबा सफर तय करती थी, लेकिन कभी भारी सामान साथ नहीं रखती थी। पुलिस के मुताबिक, वह अपने साथ सिर्फ खाने के लिए चार पराठे और एक पानी की बोतल रखती थी ताकि उसे स्टेशन पर उतरना न पड़े और वह CCTV कैमरों की नजर से बची रहे। वह कभी रिजर्वेशन नहीं कराती थी और भीड़भाड़ वाले जनरल कोच में सफर करती थी ताकि उस पर किसी को शक न हो। बुजुर्ग महिला होने के नाते पुलिसकर्मी भी सख्ती से चेकिंग नहीं करते थे।
पति की मौत के बाद जुर्म की दुनिया में रखा कदम
रामबीरी का जीवन कभी अपराध से जुड़ा नहीं था। वह हस्तिनापुर के एक छोटे से कस्बे में पली-बढ़ीं और पांचवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। 2003 में पति की अचानक दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई, जिसके बाद वह तीन बच्चों के साथ मायके लौट आईं। यहीं उनके जीवन ने बड़ा मोड़ लिया।
रामबीरी के संपर्क में 12 साल छोटा बलजिंदर आया, जो रामबीरी के माता-पिता के यहां किराएदार था। परिवार को पता नहीं था कि वह एक वांछित लुटेरा है। 2005 में राजस्थान पुलिस ने उसे उसी घर से गिरफ्तार किया। बाद में वह जेल से फरार हुआ और दोबारा रामबीरी के संपर्क में आया। धीरे-धीरे दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गया। और रामबीरी ने बलजिंदर के साथ अपराध की दुनिया में कदम रख दिया।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 2008 में गुरुग्राम और हरिद्वार में हुई बैंक डकैती में रामबीरी भी शामिल थीं। हरिद्वार में बैंक डकैती के दौरान रामबीरी कार में बाहर बैठकर बलजिंदर और उसकी गैंग का इंतजार कर रही थी। हालांकि 2009 में दिल्ली के कमला मार्केट इलाके में एक और बैंक लूट की कोशिश में रामबीरी का नाम सामने आया और उसी साल उसे मकोका के तहत गिरफ्तार किया गया। बलजिंदर को भी तभी दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। रामबीरी 2017 तक तिहाड़ जेल में बंद थी।
ऐसे मिला 'चाची' नाम
जेल में रहने के दौरान रामबीरी के तीनों बच्चे दो बेटियां और एक बेटा शादी कर अलग हो गए। तिहाड़ जेल में बलजिंदर को सब 'चाचा' कहते थे, इसलिए रामबीरी का नाम 'चाची' पड़ गया। जो आगे चलकर रामबीरी की पहचान बन गई। पुलिस का मानना है कि जेल में ही उनकी मुलाकात सोनू नाम के एक हथियार सप्लायर से हुई, जिसने उन्हें हथियार तस्करी के काम में शामिल किया।
हैरानी की बात यह है कि हथियारों की तस्करी करने वाली रामबीरी बेहद धार्मिक थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रामबीरी भगवान हनुमान और बालाजी की बड़ी भक्त थी और जेल में भी वह रोजाना कम से कम एक घंटा पूजा-पाठ में बिताती थी।
कैसे 'चाची' तक पहुंची पुलिस?
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को पिछले साल अवैध हथियार सप्लायरों की जांच के दौरान पहली बार रामबीरी का नाम सामने आया। मध्य प्रदेश से पकड़े गए एक तस्कर ने अपने नेटवर्क में शामिल लोगों के नाम बताए, जिनमें मेरठ की एक महिला ‘चाची’ भी शामिल थी। इसके बाद नॉर्दर्न रेंज की स्पेशल सेल ने करीब छह महीने तक रामबीरी की गतिविधियों पर नजर रखी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस बिना पुख्ता सबूत के रामबीरी के खिलाफ कार्रवाई नहीं करना चाहती थी, इसलिए सही मौके का इंतजार किया गया।
इंदौर से दिल्ली, 10 हजार में गन की डिलीवरी...
जेल से छूटने के बाद भी रामबीरी बलजिंदर और सोनू के संपर्क में थी। 2023 की शुरुआत से रामबीरी मध्य प्रदेश के खरगोन से अवैध हथियारों की सप्लाई करने लगीं। वह मेरठ से बस से दिल्ली आतीं और फिर जनरल कोच में ट्रेन पकड़कर इंदौर जातीं। न रिजर्व टिकट, न ज्यादा सामान। उम्र का फायदा यह हुआ कि भीड़ में वह आसानी से गायब हो जातीं और किसी को शक नहीं होता।
इंदौर पहुंचते ही एक कोड वर्ड के जरिए रामबीरी को हथियारों की खेप सौंपी जाती थी। इंदौर रेलवे स्टेशन पर लगेज चेकिंग की व्यवस्था न होने से वह बिना किसी रोकटोक के लौट आती थीं। दिल्ली पहुंचकर रामबीरी को निर्देश मिलते थे कि हथियार कहां पहुंचाने हैं। हर खेप के बदले उसे 10 हजार रुपये मिलते थे।
पुलिस के मुताबिक, रामबीरी ने स्वीकार किया है कि पिछले डेढ़ साल में उसने कम से कम चार बार इंदौर की यात्रा की और 25 से 30 हाई-टेक पिस्तौल सप्लाई की। हालांकि पुलिस को शक है कि यह संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकता है। फिलहाल दिल्ली पुलिस अन्य राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है।
Updated on:
22 Jan 2026 01:38 pm
Published on:
22 Jan 2026 01:35 pm
बड़ी खबरें
View Allनई दिल्ली
दिल्ली न्यूज़
ट्रेंडिंग
