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KGMU डॉक्टर रमीज के लैपटॉप से आपत्तिजनक सामग्री बरामद, ब्लैकमेलिंग और आईटी एक्ट की धाराएं बढ़ेंगी

KGMU से जुड़े डॉक्टर रमीज के खिलाफ चल रही जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। फोरेंसिक जांच में उसके लैपटॉप से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बरामद किए गए हैं। धर्मांतरण और यौन शोषण के आरोपों में जेल में बंद आरोपी पर अब आईटी एक्ट और ब्लैकमेलिंग की धाराएं बढ़ने की संभावना है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jan 22, 2026

धर्मांतरण और यौन शोषण के आरोपों में जेल में बंद आरोपी पर शिकंजा और कसा, आईटी एक्ट व ब्लैकमेलिंग की धाराएं बढ़ने के संकेत (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

धर्मांतरण और यौन शोषण के आरोपों में जेल में बंद आरोपी पर शिकंजा और कसा, आईटी एक्ट व ब्लैकमेलिंग की धाराएं बढ़ने के संकेत (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

KGMU News,: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े डॉक्टर रमीज के खिलाफ चल रही जांच में एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। धर्मांतरण और यौन शोषण के गंभीर आरोपों में पहले से जेल में बंद आरोपी रमीज के लैपटॉप की फोरेंसिक जांच के दौरान बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बरामद किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, यह डाटा कई युवतियों से जुड़ा बताया जा रहा है, जिनमें अधिकांश आगरा की रहने वाली हैं।

फोरेंसिक जांच में अहम सुराग

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जब्त किए गए लैपटॉप और मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया था। जांच में डिलीट किए गए डाटा को भी रिकवर किया गया है। फोरेंसिक टीम को लैपटॉप से बड़ी संख्या में आपत्तिजनक फोटो और वीडियो फाइलें मिली हैं, जिन्हें तकनीकी रूप से पुनः प्राप्त किया गया। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से युवतियों से संपर्क करता था और दोस्ती के बाद उन्हें झांसे में लेकर निजी वीडियो और तस्वीरें रिकॉर्ड करता था।

आगरा की युवतियों से जुड़ा बताया जा रहा मामला

सूत्रों का कहना है कि बरामद डाटा में शामिल अधिकांश सामग्री आगरा की युवतियों से संबंधित बताई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन युवतियों से संपर्क किस माध्यम से हुआ और क्या सभी पीड़िताएं एक ही पैटर्न के तहत फंसाई गईं। जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि क्या इन मामलों में किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका रही है।

सोशल मीडिया अकाउंट भी जांच के घेरे में

पुलिस और फोरेंसिक टीम आरोपी रमीज के सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी गहन जांच कर रही है। यह देखा जा रहा है कि क्या इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल युवतियों को फंसाने, संपर्क बनाए रखने या दबाव बनाने के लिए किया गया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या आपत्तिजनक सामग्री को किसी के साथ साझा किया गया या वायरल किया गया।

ब्लैकमेलिंग और आईटी एक्ट की धाराएं बढ़ने की संभावना

जांच अधिकारियों के अनुसार, यदि यह साबित होता है कि आरोपी ने इन वीडियो या तस्वीरों का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया या इन्हें किसी अन्य व्यक्ति को भेजा, तो उसके खिलाफ आईटी एक्ट, ब्लैकमेलिंग, और डिजिटल अपराध से जुड़ी धाराएं और सख्त की जाएंगी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस सामग्री के जरिए पीड़िताओं पर किसी प्रकार का मानसिक या सामाजिक दबाव डाला गया।

48 घंटे की रिमांड के बाद दोबारा जेल

पुलिस ने फोरेंसिक जांच और पूछताछ के लिए आरोपी रमीज को 48 घंटे की रिमांड पर लिया था। इस दौरान उससे लैपटॉप, मोबाइल फोन और डिजिटल गतिविधियों को लेकर पूछताछ की गई। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उसे फिर से जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं, जिनकी सत्यता की पुष्टि की जा रही है।

चार मोबाइल फोन बरामद

जांच के दौरान पुलिस को आरोपी रमीज और उसके माता-पिता के पास से कुल चार मोबाइल फोन मिले हैं। इन सभी फोन को भी जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन फोन का इस्तेमाल भी कथित अपराध में किया गया और क्या इनमें किसी अन्य व्यक्ति से बातचीत या लेन-देन के सबूत मौजूद हैं।

मददगारों और पैसों के लेन-देन की जांच

इस पूरे मामले में पुलिस की जांच अब केवल आरोपी तक सीमित नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि रमीज की मदद करने वाले लोगों, संभावित सहयोगियों और पैसों के लेन-देन की भी जांच की जा रही है। यह देखा जा रहा है कि क्या किसी ने जानबूझकर या अनजाने में आरोपी की गतिविधियों में सहयोग किया।

धर्मांतरण के आरोप पहले से जांच में

गौरतलब है कि रमीज पर इससे पहले भी धर्मांतरण से जुड़े गंभीर आरोप लगे थे, जिनकी जांच अलग स्तर पर चल रही है। पुलिस यह भी पड़ताल कर रही है कि क्या धर्मांतरण और यौन शोषण के मामलों के बीच कोई संबंध है या ये अलग-अलग आपराधिक गतिविधियां हैं।

पीड़िताओं की पहचान गोपनीय

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान पीड़िताओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जा रही है। किसी भी स्तर पर पीड़ितों की निजता से समझौता नहीं किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर पीड़िताओं के बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराए जाएंगे और उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

KGMU प्रशासन भी सतर्क

मामले की गंभीरता को देखते हुए KGMU प्रशासन भी सतर्क हो गया है। हालांकि यह मामला व्यक्तिगत आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा बताया जा रहा है, फिर भी संस्थान की छवि और आंतरिक प्रक्रियाओं को लेकर समीक्षा की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि कानून के तहत जो भी कार्रवाई आवश्यक होगी, उसमें पूरा सहयोग किया जाएगा।

कानून के तहत सख्त कार्रवाई का संकेत

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे आरोपों की संख्या और गंभीरता बढ़ सकती है। डिजिटल सबूतों के आधार पर चार्जशीट को और मजबूत किया जाएगा। यदि सभी आरोप साबित होते हैं, तो आरोपी को कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है।