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उधार की तलवार से हांगकांग में लड़ेगा शहर का लाल

हांगकांग में होने वाली इंटरनेशनल एशियन व्हील चेयर तलवारबाजी प्रतियोगिता में चयनित दिव्यांग खिलाड़ी राजेश को कहीं से आर्थिक मदद नहीं मिल सकी

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Kajal Kiran Kashyap

Mar 30, 2016

Aethlit

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बिलासपुर.
हांगकांग में होने वाली इंटरनेशनल एशियन व्हील चेयर तलवारबाजी प्रतियोगिता में चयनित दिव्यांग खिलाड़ी राजेश को कहीं से आर्थिक मदद नहीं मिल सकी। कलेक्टर ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग से कहा, लेकिन विभाग ने टालमटोल कर दी। उधर सांसद लखनलाल से गुहार लगाई, तो उन्होंने भी अपने हाथ खड़े कर दिए। मजबूरी में राजेश कर्ज लेकर स्पर्धा में भाग लेने हांगकांग जा रहा है। वह 3 अप्रैल को यहां से रवाना होगा।


अंतरराष्ट्रीय एशियन व्हील चेयर तलवारबाजी प्रतियोगिता का आयोजन हांगकांग में 6 से 10 अप्रैल 2016 तक होना है। इस स्पर्धा में छत्तीसगढ़ से एकमात्र खिलाड़ी शहर के चिंगराजपारा निवासी दिव्यांग राजेश कुमार साहू का चयन हुआ है। वैसे तो खेल और युवाओं को प्रोत्साहन देने के लिए कई योजनाएं हैं, लेकिन यह सब केवल खोखली घोषणा ही साबित हुईं। आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ी राजेश को न तो हांगकांग जाने के लिए टिकट के पैसे मिल सके, और न नही खेल किट के लिए कोई सरकारी मदद मिली।

विडंबना है कि उसने कलेक्टर-कमिश्नर से लेकर क्षेत्र के सांसद तक से मदद की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने इस प्रतिभावान खिलाड़ी की मदद नहीं की। कलेक्टर ने मदद करने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग को पत्र जरूर दिया था, लेकिन विभाग ने कलेक्टर के पत्र व आदेश को नहीं माना। राजेश ने खेल भवन रायपुर तक गुहार लगाई, लेकिन प्रदेश से एकमात्र चयनित खिलाड़ी को शासन से भी कोई मदद नहीं मिल सकी।


खिलाड़ी से मिलकर करनी चाहिए थी मदद

छत्तीसगढ़ व्हील चेयर तलवारबाजी संघ के प्रमुख डीआर साहू ने कहा कि एशियन व्हील चेयर तलवारबाजी स्पर्धा में भाग लेने वाले खिलाडि़यों की समाज कल्याण विभाग एवं खेल युवा कल्याण विभाग को मिलकर हर संभव मदद करनी चाहिए। खिलाडि़यों को पासपोर्ट, वीजा, एयरटिकट, इंश्योरेंस, मेडिकल सर्टिफिकेट, कन्सेशन लेटर आदि बनवाने में काफी खर्च आता है।


सिर्फ साथी खिलाडिय़ों ने दिया हौसला

दिव्यांग राजेश को हर तरफ से निराशा हाथ लगी। वह दफ्तरों के चक्कर लगाता रहा, किसी ने कोई पहल नहीं की। हर जगह से उपेक्षित राजेश को उसके साथी खिलाडि़यों ने ही कुछ हौसला दिया। वे आपस में पैसे इक_े करके उसे खेल किट दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।


कलेक्टर का पत्र लेकर भटकता रहा

राजेश ने कलेक्टर से मिलकर मदद की गुहार लगाई थी। कलेक्टर ने तत्काल समाज कल्याण विभाग को निर्देश जारी किया। लेकिन यहां के समाज कल्याण विभाग ने उसे खेल युवा कल्याण के पास भेज दिया। खेल विभाग के अधिकारी ने राजेश को पत्र थमाकर खेल विभाग के मुख्यालय रायपुर भेज दिया। हर जगह से निराशा हाथ लगी।
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