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पत्नी दूसरे पुरुष को करती थी न्यूड VIDEO कॉल, पति ने बेडरूम में लगाए CCTV कैमरे, HC में किया पेश, फैमिली कोर्ट को सुनवाई के आदेश

Bilaspur High court: पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों में बिलासपुर हाईकोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कहा कि फैमिली कोर्ट में सीसीटीवी फुटेज भी साक्ष्य है..
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बिलासपुर

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Chandu Nirmalkar

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Updated: 28 Jan 2026, 2:46 PM IST

Bilaspur high court, nude video call

प्रतीकात्मक फोटो

Bilaspur High court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फैमिली कोर्ट में सीसीटीवी फुटेज, सीडी या अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि उनके साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी का प्रमाणपत्र संलग्न नहीं है।

Bilaspur High court: वैवाहिक विवाद से जुड़ा मामला

जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने महासमुंद फैमिली कोर्ट के दो आदेशों को निरस्त करते हुए मामले को दोबारा सुनवाई के लिए वापस भेज दिया है। यह आदेश पति द्वारा दायर अपील पर पारित किया गया। मामला रायगढ़ निवासी दंपती के वैवाहिक विवाद से जुड़ा है। पति ने पत्नी पर क्रूरता और अनैतिक आचरण का आरोप लगाते हुए तलाक की याचिका दायर की थी, वहीं पत्नी ने दांपत्य अधिकारों की बहाली की मांग की थी।

पति ने लगवाए थे बेडरूम में सीसीटीवी कैमरे

पति का आरोप था कि उसकी पत्नी अन्य पुरुषों के साथ अश्लील चैटिंग और न्यूड वीडियो कॉल करती है। इन आरोपों के समर्थन में पति ने बेडरूम में चुपचाप सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे और उनकी रिकॉर्डिंग को कॉम्पैक्ट डिस्क (सीडी) के रूप में फैमिली कोर्ट में पेश किया था। हालांकि, महासमुंद फैमिली कोर्ट ने धारा 65-बी का प्रमाणपत्र न होने का हवाला देते हुए उस सीडी को साक्ष्य मानने से इंकार कर दिया था। साथ ही पति की तलाक याचिका खारिज करते हुए पत्नी की दांपत्य अधिकार बहाली की अर्जी स्वीकार कर ली थी।

पति ने की हाईकोर्ट में अपील

फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए पति हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट अधिनियम, 1984 की धारा 14 और 20 फैमिली कोर्ट को यह अधिकार देती है कि वह विवाद के प्रभावी और न्यायसंगत निपटारे के लिए किसी भी दस्तावेज या साक्ष्य को स्वीकार कर सकती है, भले ही वह साक्ष्य अधिनियम की तकनीकी शर्तों पर पूरी तरह खरा न उतरता हो।

सीसीटीवी फुटेज के रेकॉर्ड पर बहस की अनुमति

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के दोनों आदेशों को रद्द करते हुए निर्देश दिए हैं कि सीसीटीवी फुटेज वाली सीडी को रिकॉर्ड पर लिया जाए और उस पर जिरह की अनुमति दी जाए। साथ ही तलाक और दांपत्य अधिकार बहाली, दोनों मामलों की नए सिरे से सुनवाई कर शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि मामला चार वर्षों से अधिक समय से लंबित है, इसलिए फैमिली कोर्ट इसे प्राथमिकता के आधार पर निपटाए।