
खुद बनी प्रदेश की पहली महिला मैकेनिक, दूसरों को भी दे रही टू-व्हीलर की ट्रेनिंग
काजल किरण कश्यप. बिलासपुर. जब मन में लगन हो तो काम चाहे कितना भी मुश्किल हो, कोई बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। आज महिलाएं एरोप्लेन उड़ा रहीं हैं, अंतरिक्ष तक पहुंच रही हैं, पुलिस व सेना में भी उनकी धमक है। नासा जैसे संस्थान में सेवाएं देकर समाज में मिसाल बन रही हैं। यानी हर वो काम कर रही हैं, जिस पर कभी पुरुष का ही एकाधिकार माना जाता था। ऐसी ही महिलाओं में एक मिसाल है हमारे शहर के मंगला की रहने वाली सतरूपा अनंत। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि वह बाइक व स्कूटी की एक्सपर्ट मैकेनिक है। सिर्फ यही नहीं, बल्कि सतरूपा दूसरी महिलाओं व युवतियों को भी ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रही है। 22 वर्षीय सतरूपा की दो साल पहले ही शादी हुई। पति संजय अनंत प्राइवेट नौकरी में हैं। घर चलाने के लिए सतरूपा पति की मदद करना चाहती थी। 12वीं पास सतरूपा ने अपनी योग्यता के अनुरूप जॉब के लिए कई स्थानों पर ट्राई किया, लेकिन कोई काम नहीं मिला। इसके बाद वह स्वरोजगार की तरफ बढ़ी। इसमें पति ने भी पूरा सहयोग किया और पिता प्रेरणास्रोत बने। गांव में पिता मोटरसाइकिल मैकेनिक हैं। सतरूपा उन्हें गाड़ी बनाते देखा करती थी। सो उसने यही काम करने का निर्णय लिया। पति ने उसे ‘आइलीड’ संस्था के जरिए रोजगारोन्मुखी ट्रेनिंग दिलवाई। 5 माह की ट्रेनिंग के बाद सतरूपा ने अभिषेक विहार मंगला में खुद का गैराज खोल लिया। इस तरह अपनी मेहनत और लगन से सतरूपा प्रदेश की पहली महिला मैकेनिक बन गई।
10 युवाओं को दे रही ट्रेनिंग
खुद की जिंदगी संवारने के लिए तो हर किसी को संघर्ष करना ही पड़ता है, जो कि सतरूपा ने किया। लेकिन खास बात ये रही कि उसने एक ऐसे प्रोफेशन को चुना, जिसमें बिरले ही कोई महिला कदम रख्खती है। इससे भी खास बात ये कि वह अपनी तरह दूसरी महिलाओं, युवतियों व युवाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए मशक्कत कर रही है। वर्तमान में सतरूपा आइलीड संस्था के माध्यम से 10 युवाओं को बाइक व स्कूटी रिपेयरिंग का प्रशिक्षण दे रही हैं। इनमें तीन युवतियां और सात युवक हैं।
Published on:
19 Jul 2018 04:21 pm
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