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Coffee Talk with Patrika : सरकार की इच्छा है कि छत्तीसगढ़ी भाषा प्रशासनिक भाषा बनें : डॉ. विनय पाठक

कॉफी टॉक विद पत्रिका

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बिलासपुर छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में लाने के लिए हम प्रयासरत हैं। छतीसगढ़ी भाषा को समृद्ध बनाने के लिए सरकार भी इसे प्रशासनिक भाषा में प्रयोग करने का प्रयास कर रही है। ये बातें छत्तीसगढ़ राज भाषा आयोग के अध्यक्ष डॉ. विनय पाठक ने रविवार को ‘कॉफी टॉक विद पत्रिका’ में चर्चा करते हुए कही।

पीएससी में 50 अंक छत्तीसगढ़ी के
उन्होंने बताया कि सिविल सेवा परीक्षा में अब छत्तीसगढ़ी भाषा से संबंधित प्रश्न पूछे जा रहे हैं, जिसके लिए 50 अंक निर्धारित किए गए हंै। इस परीक्षा में स्थानीय लोगों को काफी फायदा मिल रहा है। एक हिसाब से कहा जाए तो छत्तीसगढ़ी भाषा से लोगों को रोजगार भी मिल सकता है। छत्तीसगढ़ी भाषा को समृद्ध बनाने की मंशा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा, अगर शासन इससे संबंधित पुस्तकें सभी कार्यालय में वितरित करे, तो छत्तीसगढ़ी बोलने व समझने वालों की संख्या और बढ़ेगी।

छत्तीसगढ़ी से हिंदी को कोई नुकसान नहीं
प्रशासनिक शब्दावली, भाषा व्याकरण आदि का किताबी सपोर्ट तैयार है। छत्तीसगढ़ी भाषा समृद्ध है। हिंदी को इससे कोई नुकसान नहीं। बोलियों से हमेशा राष्ट्रभाषा और मजबूत होती है।

वीरांगना के नाम पर बना बिलासपुर
बिलासपुर के लिए लोगों ने अपना-अपना मत रखा है। कोई इसे विलास का पुर तो किसी ने इसे पलाश पुर के नाम से पुकारा। लेकिन इसका नामकरण बिलासा नाम की एक केंवट महिला के नाम पर रखा गया। जो एक वीरांगना थी, जो युद्ध लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हुई।

8वीं अनुसूची में आने कोई समस्या नहीं
छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में लाने के काफी दिनों से प्रयासरत हैं। छत्तीसगढ़ एक अलग राज्य है। यहां की जनता चाहती है कि भाषा और समृद्ध हो। इसका प्रचार दूर-दूर तक हो। अगर अनुसूची में इस भाषा को स्थान मिल जाए तो इसे और भी समृद्ध किया जा सकता है।

सरकार की इच्छा है कि छत्तीसगढ़ी भाषा प्रशासनिक भाषा बनें : डॉ. विनय पाठक

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