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2 सूत्रीय मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की अनिश्चित कालीन हड़ताल के पहले दिन सैकड़ों कर्मचारी नेहरू चौक स्थित धरना स्थल पहुंचे। फेडरेशन के संयोजक डॉ बीपी सोनी महासचिव जीआर चन्द्रा और प्रवक्ता किशोर शर्मा ने बताया कि केन्द्रीय कर्मचारियों की तहर जनवरी और जुलाई महीने में महंगाई भत्ता न देकर अनियमित रूप से बिना एरिसर्य के भत्ता दिए जाने के कारण अधिकारी और कर्मचरी आंदोलन कर रहे हैं। शासन उन लोगों से लगातार संवाद कर रहा है जिनका इस आंदोलन से कोई लेना देना नहीं है। संभाग प्रभारी पीआर यादव ने कि राज्य शासन द्वारा कर्मचारियों और अधिकारियों की मांगों को अनसूना किए जाने के कारण आंदोलन करने पर सभी अधिकारी कर्मचारी मजबूर हैं। शासन को लोकतांत्रिक तरीका अपनाते हुए अधिकारी- कर्मचारियों से संवाद कर समस्या का समाधान और मांगों को तत्काल पूरा करना चाहिए। महंगाई भत्ता कर्मचारियों का मौलिक अधिकार है। इसी प्रकार कर्मचारियों को सातवां वेतनमान मिलने के बाद भी छठवें वेतनमान के अनुसार गृह भाड़ा भत्ता दिए जाने के कारण कर्मचारियों को आर्थिक क्षति हो रही है। धरना प्रदर्शन को डॉ बीपी सोनी, जीआर चन्द्रा, विश्राम निर्मलकर, बिंद्रा प्रसाद, डीपी पांडेय, जितेन्द्र नामपलिका, धीरज पलेरिया, कन्हैया रजक,आलोक, विनोद, आरपी शर्मा जेपी शुक्ला, श्रवण कश्यप, धीरेन्द्र यादव समेत अन्य पदाधिकारी और कर्मचारियों ने संबोधित किया।
हड़ताल को नकारा, लेकिन 6 फीसदी एलबी शिक्षक ही शामिल हुए
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा, शालेय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे, नवीन शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास राजपूत ने कहा 22 अगस्त के अनिश्चितकालीन आंदोलन में अधिसंख्य शिक्षक संवर्ग ने नकार दिया है, प्रदेश के बलरामपुर, कबीरधाम, मुंगेली, दंतेवाड़ा जैसे जिले में मात्र 6 फीसदी शिक्षक संवर्ग ही हड़ताल पर गए हैं। हड़ताल में शामिल शिक्षको का भी हौसला टूट रहा है, परेशान होकर कुछ लोग स्कूल पहुंचकर बिलासपुर कन्या सरकंडा व अन्य स्कूल में डयूटी कर रहे शिक्षको पर छुट्टी लेकर घर मे बैठने का दबाव बना रहे है, ये मनमानी व जबरदस्ती के खिलाफ आगे विरोध कर शिकायत पुलिस में दी जाएगी। हड़ताल का हम भी नैतिक समर्थन करते है, लेकिन 6 फीसदी की घोषणा के पहले 25 जुलाई से ही हड़ताल करना था या 6 फीसदी की अभी घोषणा के बाद आगे समय देकर समयांतर में हड़ताल करना उचित था, यह तो जिद की हड़ताल है, जिसके कारण ही तीनो शिक्षक संघ शामिल नही है।
लिपिक वर्गीय संघ शामिल नहीं, लेकिन लिपिकों ने भी उठाया फायदा
छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ ने पहले ही हड़ताल को नकार दिया था। सोमवार को दफ्तर खुले , लेकिन यहां हड़ाल पर जाने वाले अधिकारी और कर्मचारी अनुपस्थित थे। कार्यालयों में लिपिकों के अलावा कोई नहीं था, लिहाजा लिपिकों ने भी हड़ताल का फायदा उठाया और कार्यालय खुलने के कुछ देर के बाद ही अधिकांश दफ्तरों के लिपिक भी गायब हो गए।
कई दफ्तरों में लटके रहे ताले
हड़ताल के कारण शहर के कई दफ्तरों में ताले लटके रहे, जिसमें सहायक आयुक्त आदिवासी विकास,मत्यपालन विभाग, आबकारी विभाग , पंजीयक कार्यालय, साक्षर भारत अभियान कार्यालय समेत कई कार्यालयों में ताले लगे रहे।
दफ्तरों में सन्नाटा पसरा
हड़ताल के कारण पुराना कंपोजिट बिल्डिंग, नया कंपोजिट बिल्डिंग,कलेक्टोरेट,संभागायुक्त कार्यालय, शिक्षा विभाग कार्यालय,अंत्यावसायी निगम कार्यालय,तहसील कार्यालय, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, विघुत विभाग समत कई कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा।
1 साल से भटक रहा 70 वर्षीय वृद्ध
तहसील कार्यालय में अपनी पूर्वजों की जमीन के हड़प लिए जाने की शिकायत लेकर पथरिया अंतर्गत ग्राम ढोढमा निवासी सिद्धनाथ कुर्रे पिछले 1 सालसे बिलासपुर व पथरिया तहसील के चक्कर लगा रहा है। गांव में उसके पूर्वजों के नाम दर्ज जमीन पर गांव के लोगों द्वारा बलात कब्जा कर लिए जाने की शिकायत उसने पहले पथरिया तहसील में की थी, वहां से उसे कर्मचारियों ने बिलासपुर तहसील में रिकार्ड होने का हवाला देकर भेज भेज दिया गया। बिलासपुर तहसील कार्यालय के कर्मचारी उसे पथरिया तहसील जाने की बात कहकर चलता हर दिया। वह पिछले 1 साल से दोनों तहसीलों के चक्कर लगा रहा है।
4 महीने से नामांतरण के लिए भट रही वृद्ध
बिलासपुर तहसील कार्यालय में 60 वर्षीय वृद्ध नामांतरण के लिए भटक रही है। मूलत: पेण्ड्रा में रहने वाली वृद्ध महिला के नाम पर बिलासपुर तहसील क्षेत्र में कुछ डिसमिल जमीन है। पति की मौत के बाद वह लगातार तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रही है। सोमवार तहसीलदारों के हड़ताल पर रहने के कारण वह एसडीम तुलाराम भारद्धाज के पास गई, जहां उसे मामला नायब तहसीलदार के कार्यालय का होने की जानकरी देकर भेज दिया गया।
अवैध कॉलोनाइजर के खिलाफ कार्रवाई नहीं, भटक रही युवती
शहर में रहने वाली एक युवती पिछले 4 महीनों से तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रही है।युवती के माता-पिता नहीं हैं। छोटी बहन और वह प्राइवेट काम कर जीवन गुजर बसर कर रहे हैं। खुद का मकान बनवाने के लिए उन्होंने एक कॉलोनाइजर को पैसे दिए थे। कॉलोनी के अवैध प्लाटिंग किए जाने के मामले में विभाग ने रजिस्ट्री पर पाबंदी लगा दी थी। पैसे देने और रजिस्ट्री कराने के बाद भी युवती के नामांतरण के लिए लगातार चक्कर लगा रही है।
Published on:
22 Aug 2022 09:34 pm
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