
जरा याद करो कुर्बानी: हांथों की मेंहदी भी नहीं छूटी थी की शादी के 10 दिन बाद पति ने देश के लिए जान कुर्बान कर दी थी
बिलासपुर. देश की सेवा में अपनी जान गंवाने वाले सैनिक की अंतिम इच्छा थी कि उसके परिवार से कोई डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करने आगे आए। पति के सपने को उनकी अंतिम इच्छा मानकर पत्नी ने कड़ी मेहनत की और एक सफल डॉक्टर बनकर लोगों के सामने आई है। सरकारी हास्पिटल में मरीजों की मदद कर अपने पति के सपने को पूरा करने में जुटी हुई हैं।
हम बात कर रहे हैं बिलासपुर जिले के सीपत स्थित ग्राम नरगोड़ा के शहीद विरेन्द्र कैवत्र्य की पत्नि डॉ. ज्योति कैवत्र्य की। उन्होंने चर्चा के दौरान बताया कि उनकी शादी 18 जून सन् 2006 में विरेन्द्र कैवत्र्य के साथ हुई। शादी के दस दिन बाद सेना से उनका बुलावा आ गया। जल्द वापस आने का वादा कर भारत मां की सेवा करने कारगिल चले गए। कभी-कभी फोन से बात हुआ करती थी।
बातों ही बातों में उन्होंने बताया कि हमारे घर में सभी पढ़े-लिखे हैं और सभी जॉब कर रहे हंै, लेकिन कोई भी डॉक्टर नहीं है। मेरे पति ने कहा था कि मेरी बड़ी इच्छा है कि तुम डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करो। उस समय मैं बीएससी प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही थी। 15 सितंबर 2006 को उनके शहीद होने की खबर मिली। यह मेरे लिए बड़ा कठिन समय था, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी और उनके अंतिम इच्छा को पूरा करने जुट गई।
पेट्रोलिंग की दौरान हुई थी मौत
शहीद विरेन्द्र कैवत्र्य आपरेशन रक्षक टीम में शामिल थे। जो 62 आरआर डोंगरा बटालियन के अंतर्गत कारगिल में पेट्रोलिंग करते थे। 15 सिंतबर को अपने टीम के साथ पेट्रोलिंग में निकले थे। पेट्रोलिंग गाड़ी जमीन में बिछ़े हुए माइंस की चपेट में आने के कारण ब्लास्ट हो गई। जिसमें विरेन्द्र सहित अन्य सैनिक शमिल थे। ब्लास्ट में सभी सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए।
स्मारक बनाने का है सपना
डॉ. ज्योति कैवत्र्य ने बताया कि पति के शहीद होने के बाद उनकी याद को चिरस्थायी बनाने के लिए ग्राम नरगोड़ा में उनका स्मारक बनवाना चाहती। ताकि आने वाली पीढ़ी उनकी शहादत को याद कर देश सेवा के लिए तत्पर रहे। इसके लिए सारी औपचारिकता पूरी कर ली गई हैं। जल्द ही स्मारक बनकर तैयारी हो जाएगी।
Published on:
10 Aug 2019 01:05 pm
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