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अरबों की लागत से बनाया इनडोर-आउडोर स्टेडियम, खेल सुविधा तो दूर,सांपों के डेरों के बीच नौनिहाल

कमलेश रजक बिलासपुर. बहतराई राज्य खेल प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण 14 साल पहलेे शुरू हुआ था। केंद्र को इनडोर और आउटडोर खेलों के लिए तैयार किया गया जाना था, जिसमें केवल हॉकी स्टेडियम ही तैयार हो पाया है। 60 करोड़ की लागत से शुरू हुआ निर्माण कार्य सौ करोड़ के ऊपर चला गया है. इंडोर स्टेडिम मे लगी हाई मास्क लाइट के केबल को चोर पार कर दिए हैं। साथ ही एस्ट्रोटर्फ मैदान बन तो गया, लेकिन यहां खिलाड़ियोें और दर्शकों के बैठने की जगह नहीं है। खिलाड़ियों को अब भी स्टेडियम के पूरा होने का इंतजार है।

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bahtarai stadium

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बहतराई राज्य खेल प्रशिक्षण केंद्र बदहाल बहतराई में राज्य खेल प्रशिक्षण केंद्र का काम अधूरा है। खिलाड़ियों को नेशनल और इंटरनेशनल खेल सुविधा देने के लिए साल 2006 में 68 करोड़ रुपए की लागत से बहतराई ग्राम में सर्व सुविधा युक्त राज्य खेल प्रशिक्षण केंद्र बनाने की मंजूरी मिली थी. साल 2008 में प्रोजेक्ट पर काम शुरू भी हुआ, लेकिन उसके बाद प्रोजेक्ट धीरे -धीरे प्रशासनिक उदासीनता और राजनीति की भेंट चढ़ता गया। आज प्रोजेक्ट को शुरू हुए 14 साल बीत चुके हैं. लागत 68 करोड़ से सवा सौ करोड़ पहुंच गई है, लेकिन अब तक इसका निर्माण अधूरा है, कई काम ऐसे हैं जो पूरे नहीं हुए हैं। मैदान के एक कोने में हॉकी स्टेडिम बनाया गया है। एस्ट्रो टर्फ मैदान में खेलने की सुविधा है , लेकिन यहां खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए बैठने की जगह नहीं है। इसके साथ ही आउटडोर स्टेडियम में लगाई गई थी, इसके केबल भी चोर ले गए हैं। ऐसे में यहां आने वालेे समय में राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं के आयोेजन को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

झाड़ियाें की सफाई तक नहीं

स्टेडियम परिसर के चारों ओर झाड़ियां इतनी हैं कि 10 कदम की दूरी पर खड़े व्यक्ति का दिख पाना मुश्किल है। यहां मुख्य रूप से अफ्रिकन बबूल के पेड़ अधिक हैं। स्टेड़ियम में जहां-जहां निर्माण हुए हैं और जहां तक सीसी रोड बनाई गई है वही स्थान बचे हैं, इसके अलवा पूरे परिसर में अफ्रिकन बबूल के पेड़ों और झाड़ियों का भंडार है।

पेयजल की व्यवस्था नहीं, टायलेट भी टूटे-फूटे

स्टेडियम में पेयजल की व्यवस्था नहीं है। डेढ़ महीने पहले स्टेडियम में आयोजित हुई राष्ट्रीय कराते स्पर्धा में बाहर से आए बच्चों को पेयजल के लिए नगर निगम के पानी के टैंकरों से सप्लाई करनी पड़ी थी। इसके साथ ही इनडोर स्टेडियम और हाॅस्टलों में भी टाइलेट टूटे-फूटे हैं, जिन्हें अब तक नहीं सुधारा गया है।

सांपों के बीच नवनिहाल

स्टेट ट्रेनिंग सेंटर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी संचालित है। यहां प्रदेश के सैकड़ों बच्चों को खेल के प्रशिक्षण के साथ-साथ हास्टल की सुविधा दी गई है। यह हॉस्टल भी परिसर के एक कोने में हैं, नवनिहालों को हॉस्टल तक पैदल आना जाना पड़ता है। यहां बच्चे सांपों के बीच जीवन को खतरे में डालकर रह रहे हैं।

स्टेडियम में रखरखाव और निर्माण की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग की है। यहां की अव्यवस्थाओं को दूर करने प्रस्ताव मुख्यालय और लोक निर्माण विभाग को भेजा जा चुका है। व्यवस्थाएं जल्द ही दुरूस्त करा ली जाएंगी।

सुधा कुमार

संभागीय सहायक संचालक

खेल एवं युवा कल्याण विभाग