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सुहागिन महिलाओं ने रखा वट सावित्री का व्रत, पति के दीर्घायु के लिए की मंगल कामना

ज्येष्ठ मास की अमवास्या तिथि पर शुक्रवार को सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री व्रत रखा तथा पति के दीर्घायु के लिए मंगलकामना की। इस सम्बन्ध में पौराणिक कक्षा के अनुसार अल्पायु सत्यवान के साथ विवाह करते समय ही देवी सावित्री को ज्ञात था कि उनके पति की शीघ्र मृत्यु हो जाएगी, लेकिन उन्हें अपने सतीत्व पर पूरा भरोसा था, इसीलिए जब यमराज उनके पति का प्राण हर कर ले जाने लगे तो अपने सतीत्व के बल पर देवी सावित्री ने पति के प्राण वापस लाए। उसी स्मृति में सुहागिन महिलाओं ने सावित्री का व्रत किया।

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Married women observe Vat Savitri fast, pray for the long life of their husbands

Married women observe Vat Savitri fast, pray for the long life of their husbands


सुहागिन महिलाओं ने रखा वट सावित्री का व्रत, पति के दीर्घायु के लिए की मंगल कामना
बिलासपुर. ज्येष्ठ मास की अमवास्या तिथि पर शुक्रवार को सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री व्रत रखा तथा पति के दीर्घायु के लिए मंगलकामना की। इस सम्बन्ध में पौराणिक कक्षा के अनुसार अल्पायु सत्यवान के साथ विवाह करते समय ही देवी सावित्री को ज्ञात था कि उनके पति की शीघ्र मृत्यु हो जाएगी, लेकिन उन्हें अपने सतीत्व पर पूरा भरोसा था, इसीलिए जब यमराज उनके पति का प्राण हर कर ले जाने लगे तो अपने सतीत्व के बल पर देवी सावित्री ने पति के प्राण वापस लाए। उसी स्मृति में सुहागिन महिलाओं ने सावित्री का व्रत किया।
देवी सावित्री से सुहाग की रक्षा सहित पुत्र रत्न की प्राप्ति की भी की कामना
शहर के सभी मंदिरों के साथ ही चौक-चौराहों पर स्थित बरगद के वृक्ष की पूजा अर्चना श्रद्धालु महिलाओं ने की। महिलाओं ने वट वृक्ष के नीचे सुहाग की सामग्री के साथ ही फल, फूल, मिष्ठान आदि अर्पित करते हुए कथा का श्रवण किया गया। वहीं व्रत धारी महिलाओं ने वट वृक्ष के चारों ओर सूत लपेटकर अखंड सुहाग की कामना की। महिलाओं ने पुत्र की कामना से भी सावित्री व्रत रखा और देवी सावित्री से पुत्ररत्न की भी कामना की।
श्री शनिदेव जयंती भी मनाई गई
सूर्य देव और छाया के पुत्र व न्याय के देवता भगवान श्री शनिदेव जयंती शुक्रवार को शनि मंदिरों में विधि विधान पूर्वक मनाई गई। श्रद्धालुओं ने शनिदेव की पूजा अर्चना के साथ ही शनि के शिलाखंड पर तेल से अभिषेक किया। जेष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर शनिदेव का जन्म हुआ था। मानव कुंडली में भी शनि देव का प्रभाव सर्वाधिक माना जाता है, उनकी कुदृष्टि होने से जातक को गंभीर संकट का सामना करना पड़ता है। प्रत्येक शनिवार के साथ शनि जयंती पर शनिदेव की विधि पूर्वक पूजा अर्चना करने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि की कुदृष्टि से राहत मिलती है, इसीलिए शनि जयंती महत्वपूर्ण पर्व है।
सुबह से ही शनि मंदिरों में लगा रहा तांता
शनि जयंती पर बिलासपुर के लोधीपारा, राजकिशोर नगर सहित सभी शनि मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिर पहुंचे श्रद्धालु शनिदेव का तेलाभिषेक कर रहे हैं, साथ ही उन्हें तिल, उड़द, नीले फूल, काला वस्त्र, लोहा आदि भी अर्पित किया गया। शनि मंत्रों का जाप करते हुए दीपदान किए गए। राजकिशोर नगर स्थित श्री शनि धाम में भी सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा यहां शनि देव की आराधना उपासना की गई। विगत 22 वर्षों से यहां शनिदेव की पूजा अर्चना की जा रही है। मंदिर समिति का दावा है कि यहां जागृत शनिदेव से मांगी गई सकल मनोकामना अवश्य पूरी होती है, इसलिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पूजा अर्चना के लिए पहुंचे। शनि जयंती के अवसर पर मंदिर की आकर्षक सजावट भी की गई। दोपहर को यहां भोग प्रसाद भंडारे का भी आयोजन किया गया।

राजकिशोर नगर में महिलाओं ने की वट सावित्री पूजा
पति की लंबी आयु की कामना को लेकर राजकिशोर नगर में महिलाओं ने घर पर वट सावित्री पूजा की जिसमें हाईकोर्ट महाधिवक्ता कार्यालय पदस्थ करुणा तिवारी,सावित्री शर्मा, गायत्री शर्मा व अन्य उपस्थित रहे।

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