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मस्तूरी विधानसभा : इस बार 5 राजनीतिक पार्टियां मैदान में, बिगाड़ेंगे गणित

अब जनता को प्रत्याशियों के चयन के लिए किसे चुनेगी, यह भी असमंजस की स्थिति बनते जा रही है।

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बिलासपुर. जिले के मस्तूरी विधानसभा में इस बार एक नहीं, दो नहीं यहां 5 राजनीतिक पार्टियां सक्रिय हैं। इस सीट पर भाजपा का लंबे समय से कब्जा रहा है, लेकिन अब 5 पार्टियों के चुनाव लडऩे से सामाजिक लोगों को भी साधने की तैयारी जोरों से चल रही है। अब जनता को प्रत्याशियों के चयन के लिए किसे चुनेगी, यह भी असमंजस की स्थिति बनते जा रही है।

सबको देख, समझ और परख रही जनता
बेलतरा और कोटा विधानसभा सीट के बाद अब मस्तूरी विधानसभा की सीट हॉट से ही हॉट हो चुकी है, क्योंकि यहां 5 पार्टियों के दावेदार अपने ओर से पूरी ताकत झोंकने के लिए तैयार हैं। भाजपा से वर्तनाम विधायक कृष्णमूर्ति बांधी को टिकट दिया गया है। आम आदमी पार्टी से धरमादार भार्गव पर दांव लगाया गया है। इधर बसपा ने भी अपनी पहली सूची जारी की है, जिसमें दाउराम रत्नाकर को मस्तूरी से प्रत्याशी बनाया गया है। वहीं कांग्रेस और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जोगी ने अब तक प्रत्याशियों का ऐलान नहीं किया है, जिसका इंतजार दावेदार कर रहे हैं। वहीं जनता भी फिलहाल भी को देख रही है, समझ रही है परख रही है। वहीं बसपा के प्रत्याशी सामाजिक रूप से लोगों को साधने में लगे हैं, तो आप अपनी फ्री की रेवडिय़ों से लोगों को सुभाने की कोशिश कर रही है। वहीं वर्तमान विधायक बांधी जोरों से तैयारी में जुटे हुए हैं। वो 4 पार्टियों की लड़ाई में फिर से जीतने की रणनीति भी बना रहे हैं। सभी हर तरीके से वोटरों को साधने की कोशिश कर रहे हैं।

जकांछ ने कहा- हमने नहीं की कोई लिस्ट जारी, अभी मंथन चल रहा
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के संयोजक ने बताया कि जो लिस्ट जारी हुई है, वह जनता कांग्रेस, छत्तीसगढ़ की है। जबकि उनकी पार्टी का नाम जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जोगी है। बताया कि अभी पार्टी में मंथन चल रहा है। दो तीन दिन के भीतर पार्टी में पदाधिकारियों की बैठक की जाएगी। इसके बाद ही टिकट जारी किया जाएगा। वहीं यह भी कहा कि कांग्रेस की टिकट जारी होने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।


सामाजिक वोट साधने का प्रयास...
मस्तूरी अनुसूचित जाति की सीट है, जहां सामाजिक वोट साधने के लिए हर पार्टी प्रयास कर रही है। वहीं बीते विधानसभा चुनाव में बसपा और जकांछ ने गठबंधन करके लड़ा था, जिसकी वजह से बसपा को मस्तूरी क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतारा गया था और वह दूसरे नंबर पर रही है। इस वजह से बसपा इस विधानसभा चुनाव में भी सोच रही है कि पिछली बार की तरह वोट मिल सकता है। इसलिए जोरों से प्रत्याशी जनसंपर्क में जुट गए हैं। वहीं आप से भी जिन प्रत्याशी को चुनावी मैदान में उतारा गया है वह भी वर्तमान में जोरों से सामाजिक लोगों को साधते हुए तैयारी में जुटे हुए हैं।

चुनाव प्रचार में भाजपा आगे, कांग्रेस में जिले से एक भी सीट फाइनल नहीं

विधानसभा चुनाव 2023 में प्रत्याशी चयन को एक बार फिर से भाजपा ने कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया है। प्रदेश की 85 सीटों पर भाजपा ने प्रत्याशियों को घोषित कर दिया है। वहीं कांग्रेस में अब 30 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा की गई है। इसमें बिलासपुर संभाग की एक भी सीट पर प्रत्याशी के नाम घोषित नहीं किए गए हैं। टिकट को अटकलों का बाजार ही गर्म रहा है। भाजपा की पहली सूची में घोषित प्रत्याशियों को प्रचार के लिए 90 दिन का समय मिल गया। वहीं दूसरी सूची जारी होने के बाद नेताओं को सवा महीने का समय ही मिला है। सरगुजा और बस्तर संभाग में पहले चरण के मतदान के लिए महज 23 दिनों का समय ही बचा है। 7 नवंबर को पहले चरण का मतदान होगा। वहीं दूसरी ओर दूसरे चरण में शेष छत्तीसगढ़ के संभागों में 17 नवंबर को मतदान होने हैं। दूसरे चरण के लिए सिर्फ 36 दिन ही शेष हैं। इतना ही समय प्रदेश के 90 विधानसभा चुनावों के प्रत्याशियों के पास शेष है। भाजपा ने प्रदेश में 21 प्रत्याशियों की सूची 17 अगस्त को जारी की थी। इन 21 प्रत्याशियों को चुनाव प्रचार के लिए 90 दिनों का समय मिल गया है। प्रदेश में 64 सीटों प्रत्याशियों की घोषण 9 अक्टूबर को जारी हुई। प्रदेश की 5 सीटों पर ही भाजपा के उम्मीदवारों की घोषाणा होनी शेष है।

भाजपा में प्रचार शुरू, कांग्रेस में इंतजार का दौर...
भाजपा में चुनाव प्रचार का दौर शुरू हो गया है। 5 सीटों को छोडकऱ प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्रों में चुनाव प्रचार शुरू कर चुके हैं। एक ओर भाजपा कार्यकर्ता चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस में इंतजार का दौर चल रहा है। कांग्रेस में गुटबाजी का दौर पिछले कई दशकों से चला आ रहा है। अपने-अपने प्रत्याशी को टिकट मिलने का इंतजार खेमे वाले कांग्रेस कार्यकर्ता कर रहे हैं।
देर हुई तो जनसंपर्क भी नहीं कर पाएंगे नेताजी
कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर पिछले कई दशकों से उठापटक का दौर चला आ रहा है। टिकट वितरण को लेकर बड़े नेताओं में खींचतान भी देखी गई है। टिकट वितरण में लेटलतीफी का खामियाजा तय किए जाने वाले प्रत्याशियों पर पडऩे वाला है। जिन्हे चुनाव जीतने की जिम्मेदारी दी जानी है उनके पास विधानसभा क्षेत्र के सभी लोगों से मिलना और जनसंपर्क कर पाना संभव नहीं होगा। इसका खामियाजा नेताजी को चुनाव में भुगतना पड़ता है।