
हाईकोर्ट (photo-patrika)
CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को निरस्त करते हुए आरोपी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल संदेह, कमजोर लास्ट सीन थ्योरी और अपूर्ण परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर किसी को आजीवन कारावास नहीं दिया जा सकता। यह फैसला क्रिमिनल अपील में न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने सुनाया है।
27-28 जुलाई 2016 की दरम्यानी रात आरोपी टीकाराम निषाद उर्फ टिकम ने ट्रक (क्रमांक सीजी 13 एलए 4893) में सो रहे चालक संतोष निषाद की जैकरॉड से हत्या कर दी थी। इस मामले में 5वें अपर सत्र न्यायाधीश, रायगढ़ ने 27 फरवरी 2017 को आरोपी को धारा 302 भादंवि के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 2000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
संतोष निषाद की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यह मामला हत्या (हॉमिसाइडल डेथ) का है, लेकिन अभियोजन यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि हत्या आरोपी ने ही की। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है और पूरा प्रकरण केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। अभियोजन सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित पंचशील सिद्धांतों को पूरा नहीं कर सका।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा स्वीकार की गई लास्ट सीन टुगेदर की थ्योरी को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी गवाह ने यह स्पष्ट नहीं किया कि घटना के समय आरोपी मृतक के साथ मौजूद था। गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास पाए गए और कई गवाहों ने प्रारंभिक बयान में आरोपी का नाम तक नहीं लिया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जब्ती से संबंधित एफएसएल रिपोर्ट रिकॉर्ड पर पेश नहीं की गई, जिससे अभियोजन का मामला कमजोर हो गया। घटना के बाद आरोपी का फरार होना या कथित झूठा अलिबाई भी दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है। परिस्थितियों की श्रृंखला अधूरी होने के कारण हाईकोर्ट ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी करना उचित माना।
Updated on:
24 Jan 2026 01:54 pm
Published on:
24 Jan 2026 01:54 pm
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