
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Photo Credit - Chhattisgarh High Court)
Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत स्कूलों के लिए नियम व दिशा-निर्देश (गाइडलाइन) अब तक तैयार नहीं किए जाने पर कड़ी टिप्पणी की है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि बच्चों के हितों से जुड़े इस गंभीर विषय में सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने होंगे। कोर्ट ने जनहित याचिका व कई याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव द्वारा दायर व्यक्तिगत शपथपत्र पर विचार किया।
शपथपत्र में बताया गया कि आरटीई अधिनियम की धारा 35(2) के तहत विस्तृत गाइडलाइन बनाने की प्रक्रिया चल रही है और इसके लिए विभागीय स्तर पर समिति गठित कर 5 जनवरी 2026 को बैठक भी की गई है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल प्रक्रिया का हवाला देकर देरी को उचित नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि यह मामला सीधे बच्चों के मौलिक अधिकार से जुड़ा है।
मामले में हस्तक्षेप याचिका दायर कर यह भी बताया गया कि कई स्कूलों में छात्रों के मिड-टर्म एडमिशन बिना प्रमाणपत्रों की जांच किए रद्द कर दिए गए, जो अत्यंत गंभीर मामला है। कोर्ट ने इसे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला बताया। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी हस्तक्षेपकर्ता 10 दिनों के भीतर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव के समक्ष उपस्थित होकर अपनी शिकायतें रखें। सचिव को इन मामलों की स्वयं जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई करने को कहा गया है। इसके अलावा, एक अन्य हस्तक्षेपकर्ता ने एंट्री स्कूलों में बच्चों के शोषण का मुद्दा उठाया, जिस पर कोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की।
हाईकोर्ट ने उम्मीद जताई कि स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव स्वयं सभी जिला शिक्षा अधिकारियों की कार्यप्रणाली की निगरानी करेंगे और आरटीई के तहत प्रस्तावित गाइडलाइन को लेकर अगली सुनवाई में नई स्थिति रिपोर्ट (ताजा शपथपत्र) पेश करेंगे। मामले की 11 मार्च को फिर सुनवाई होगी। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च 2026 को तय की गई है।
शिक्षा विभाग की ओर से कोर्ट को बताया गया कि आरटीई पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निराकरण में अधिकांश जिलों में प्रगति हुई है। दुर्ग जिले में 183 शिकायतें, रायपुर जिले में 157 शिकायतें, बिलासपुर जिले में 100 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इनमें से बिलासपुर की 99 शिकायतें निपटा दी गई हैं, जबकि एक शिकायत आरटीई सर्वर में तकनीकी समस्या के कारण लंबित है। हालांकि, याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से यह आपत्ति उठाई गई कि केवल पोर्टल पर आई शिकायतों का निराकरण हुआ है, जबकि व्यक्तिगत रूप से अधिकारियों को दी गई कई शिकायतें अब भी लंबित हैं।
Published on:
24 Jan 2026 01:04 pm
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