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Cyber Crime : अब रहिए बेहद सतर्क, साइबर ठगों ने निकाली ऐसी टेक्नोलॉजी, जानकर चकरा जाएगा सिर

Cyber Crime Cases : साइबर ठग के साथ ही आम लोग भी प्रॉक्सी आईपी का इस्तेमाल कर कई तरह के कारनामों को अंजाम दे रहे हैं।

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Cyber Crime  : अब रहिए बेहद सतर्क, साइबर ठगों ने निकाली ऐसी टेक्नोलॉजी, जानकर चकरा जाएगा सिर

Cyber Crime : अब रहिए बेहद सतर्क, साइबर ठगों ने निकाली ऐसी टेक्नोलॉजी, जानकर चकरा जाएगा सिर

बिलासपुर. साइबर ठग के साथ ही आम लोग भी प्रॉक्सी आईपी का इस्तेमाल कर कई तरह के कारनामों को अंजाम दे रहे हैं। तेजी से बढ़ते प्रॉक्सी आईपी के चलन पुलिस को भी उलझा दिया है। प्रॉक्सी (फर्जी) आईपी का इस्तेमाल कर शातिर अपना लोकेशन बदल कर विदेशों में अपनी मौजूदगी का अहसास दिला बड़ी आसानी से बचने की कोशिश करते हैं। अक्सर मामलों में शातिर ठग कामयाब भी हो रहे हैं।

प्रदेश में भी ठग कर रहे प्रॉक्सी का इस्तेमाल

साइबर ठगी के कुछ मामले प्रदेश में हुए हैं। बिलासपुर व रायपुर पुलिस जांच में पाया कि वारदात को अंजाम देने के लिए प्रॅाक्सी आपी (फेक यूजर लिंक) का इस्तेमाल किया गया है। आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस कुछ हद तक तो कामयाब होती है लेकिन अधिकांश मामलों में प्राक्सी आईपी का इस्तेमाल करने वालों तक पुलिस नहीं पहुंच पा रही है।

प्रॉक्सी आईपी से हत्यारे का पता लगाई थी पुलिस

31 जनवरी 2022 को चकरभाठा के परसदा गांव में किराना व्यापारी भगतराम कौशिक (55) की लाश उसके दुकान में मिली थी। पुलिस को लगा कुछ दिनों पूर्व छूटे आदतन बदमाश ने हत्या की होगी। आदतन बदमाश से कुछ सुराग न मिलने पुलिस ने नए सिरे से जांच करते हुए साइबर तकनीक से आगे बढ़ी तो वाट्सएप काल का लिंक मिला। मोबाइल नम्बर व आईपी मैच नहीं हो रहे थे, लगभग 130 फाइलों में लाखों नम्बर की आईपी चेक करने के बाद पुलिस ने खुलासा किया था कि भगतराम कौशिक के बड़े बेटे व मृतक के छोटे भाई ने एक आदतन बदमाश के साथ मिलकर हत्या की थी।

80 कंपनियां जो प्रॉक्सी का करती हैं संचालन


मोबाइल या इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले शातिर अपनी वीपीएन बदलने के लिए प्राक्सी (फर्जी) आईपी का इस्तेमाल करते हैं। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि भारत व अन्य देश में 80 ऐसी कम्पनी संचालित हैं जो लोगों को अच्छी खासी रकम लेकर यह सुविधा उपलब्ध करती है। भारत में भी ऐसी कम्पनियां टेलीकॉम कम्पनी के समन्वय से काम कर रही हैं।