
Oraganic Farming :तेजी से लोकप्रिय हो रही आर्गेनिक फार्मिंग, छोटे शहरों में भी बढ़ी डिमांड, जानें कई फायदे
बिलासपुर. राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु वर्ष 2014 से राज्य पोषित जैविक खेती मिशन एवं वर्ष 2016 से केन्द्र प्रवर्तित परंपरागत कृषि विकास योजना का संचालन शुरू किया गया था। इसके बाद से ही छत्तीसगढ़ में लगातार जैविक खेती के रगों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
आर्गेनिक तरीके से उगाये जा रहे प्रोडक्ट्स की दुनिया भर में डिमांड है। छोटे शहरों में भी ये अपनी अलग जगह बनाता जा रहा हैं। जिसके लिए नाबार्ड द्वारा किसानो को केमिकल फ्री खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। नाबार्ड ग्रामीण क्षेत्रों के उत्पादकों को प्लेटफार्म दिलाने के लिए कटिबद्ध है। समय समय पर महिला स्व सहायता समूह, ग्राम उद्योग, लघु उद्योग से जुड़े उत्पादकों को ट्रेनिंग भी मुहैया करता है।
फसलों की ऑर्गेनिक उत्पादन पर दिया जा रहा अधिक जोर
राज्य में धान की सुगंधित किस्में बासमती, बादशाहभोग, दुबराज, पुसासुगंध, जंवाफूल, मोतीचुर, जीराफुल, तुलसी-मंजरी, काली कमोद, लोक्टीमांछी. कालीगिलास, तिलकस्तुरी (ग्रीन राइस) इसके अलावा मक्का एवं लघु धान्य फसलें-कोदो-कुटकी, रागी, सांवा, कोसरा आदि फसलें शामिल हैं।
बिलासपुर क्षेत्र के कृषियुग नाम की स्टार्टअप की शुरुवात करने वाले 10 नौजवानों में से डायरेक्टर तरुण साहू बताते है की हम हम सब कृषि परिवार से आते है हम ने खेती किसानी बचपन से देखा है।
आगे जाकर हमने पढाई में हमारा विषय भी कृषि ही थी। हम सभी पार्टनर एक साथ पढ़े बढे हैं। हम में आर्गेनिक फार्मिंग को लेकर चर्चा होती ही रहती थी। और कॉलेज खत्म होते होते हमने इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का निर्णय लिया।
शुरुवाती समय में हमने अपनी खुदकी 60 एकड़ खेतो से इसकी शुरुवात की और यह स्टार्टअप बढ़ते-बढ़ते आज हम तकरीबन 2500 से ज्यादा एकड़ में खेती करते है और इसमें हमारे साथ 500 किसान जुड़े हुए हैं।
जैविक की ओर लौट रहे लोग, बढ़ी डिमांड
राज्य के अलावा राज्य से बाहर भी इन जैविक प्रोडक्ट्स की भारी डिमांड है। आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022-23 में जैविक खेती मिशन के तहत 15 हजार एकड़ फसलों की बुवाई का टारगेट रखा गया है।
Updated on:
28 Aug 2023 01:09 pm
Published on:
28 Aug 2023 01:08 pm
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