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नगर निगम का सप्लाई लाइन से ज्यादा पैक्ड वॉटर पर कर रहे लोग भरोसा, 200 रुपए शुल्क की जगह महीने का 600 रुपए चुकाने तैयार

बिलासपुर. नगर निगम की ओर से शहर में सप्लाई किए जाने वाले जल का उपयोग करने के बजाए अब लोग पैक्ड पानी पीने पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। हाल ही में शहर के चांटीडीह क्षेत्र में दूषित पेयजल सप्लाई के कारण डायरिया फैला था। डायरिया पीड़ित 3 महिलाओं की मौत होने के साथ ढाई सौ से अधिक लोग बीमार हो गए थे। इस घटना के बाद से बारिश के मौसम में नगर निगम से सप्लाई होने वाले पानी पर लोग कम भरोसा कर रहे हैं।

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नगर निगम का सप्लाई लाइन से ज्यादा पैक्ड वॉटर पर कर रहे लोग भरोसा, 200 रुपए शुल्क की जगह महीने का 600 रुपए चुकाने तैयार

नगर निगम का सप्लाई लाइन से ज्यादा पैक्ड वॉटर पर कर रहे लोग भरोसा, 200 रुपए शुल्क की जगह महीने का 600 रुपए चुकाने तैयार

यही कारण है कि शहर के बीच रहने वाले 10 हजार से अधिक लोग नगर निगम को महीने का 200 रुपए का पानी बिल देने की बजाए स्वस्थ रहने के लिए 600 रुपए हर महीने पैक्ड पानी पीने पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं।


पहले भी आ चुकी है गंदा पानी सप्लाई होने की शिकायतें

शहर में नगर निगम की ओर से पिछले 10 वर्षों में एक भी नई पाइप लाइन नहीं बिछाई गई है। सारी पाइप लाइनें पुरानी हैं। इनमें से कई क्षेत्रों में पाइप लाइन में लीकेज आने पर नगर निगम ने रबर का पैबंद लगाया है। पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें अब आम हो गई हैं।

55 हजार से अधिक उबालकर पी रहे पानी
नगर निगम के पुराने क्षेत्रों में रहने वाले 55 हजार से अधिक लोगों को आज भी नगर निगम द्वारा सप्लाई किए जाने वाले पानी पर भरोसा नहीं है। खरीदकर पानी नहीं पीने वाले नलों से आने वाले पानी को उबालकर पी रहे हैं। सरकंडा निवासी रविन्द्र परिहार ने बताया कि बारिश और गर्मियों के मौसम में दूषित जल की सप्लाई के कारण वे गर्मियों से बारिश के मौसम यानि 7 महीनों तक पानी को उबालकर पीते हैं।


एच-2 एस किट से जांच का दावा

नगर निगम अधिकारी पानी की जांच के लिए उनके पास उपलब्ध एच-2 एस किट से पानी की जांच करने का दावा करते है। अधिकारी यह भी कहते नहीं थकते कि उनके द्वारा सप्लाई किया जा रहा पानी स्वच्छ है।

पहले भी जांच में हो चुका है खुलासा
नवंबर 2022 में शहर के तालापारा और टिकरापारा में डायरिया फैलने से 2 लोगों की मौत होने के साथ सौकड़ों लोग बीमार हुए थे। उस समय निगम अधिकारियों ने सप्लाई होने वाले पानी की जांच सिम्स के लैब से कराई थी, जिसमें सप्लाई होने वाला पानी दूषित होने की पुष्टि हुई थी।


शहर के 18 हजार से अधिक ने नहीं पटाया 7-8 करोड़ का बिल

नगर निगम से पानी लेने वाले शहर के 18 हजार से अधिक ऐसे उपभोक्ता है जिन्होंने नल कनेक्शन लिया है और पानी ले भी रहे हैं। इनमें से अधिकांश उपभोक्ता पानी पीने के बजाए दूसरे उपयोग के लिए ज्यादा करते हैं। इन उपभोक्तओं ने करीब 7-8 करोड़ रुपए के पानी बिल का भुगतान किया ही नहीं है।

निगम सीमा क्षेत्र में रहने वाले 18 हजार से अधिक उपभोक्ताओं ने 7-8 करोड़ रुपए जलकर का भुगतान नहीं किया है। सभी को नोटिस जारी किया जा चुका है।
राजेन्द्र पात्रे

उपायुक्त नगर निगम

सप्लाई होने वाले पेयजल की जांच शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से एच-2 एस किट के माध्यम से नियमित होती है। इसके अलावा कैल्शियम व अन्य जांच भी निगम की ओर से लगातार कराई जाती है। नगर निगम के पानी के बजाए पैक्ड वॉटर पीने वालों की संख्या बढ़ने की जानकारी नहीं है। मेरे साथ-साथ मेरी कॉलोनी में रहने वाले सप्लाई होने वाला पानी ही पीते हैं। डायरिया जहां फैला था वहां सारी व्यवस्थाएं दुरूस्त की जा चुकी हैं।
अजय श्रीवासन

प्रभारी जल विभाग नगर निगम

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