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सस्ते दर पर इलाज मुहैया करा गनियारी का स्वास्थ्य केंद्र बना गरीबों के लिए वरदान

एम्स के नौ डॉक्टरों की पहल: चैरिटेबल ट्रस्ट की सहायता से हो रहा संचालित स्वास्थ्य केंद्र

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सस्ते दर पर इलाज मुहैया करा गनियारी का स्वास्थ्य केंद्र बना गरीबों के लिए वरदान

सस्ते दर पर इलाज मुहैया करा गनियारी का स्वास्थ्य केंद्र बना गरीबों के लिए वरदान

सकरी. यदि इच्छा शक्ति और जज्बा हो तो कोई कार्य असंभव नही होता है। इसी को चरितार्थ करता है गनियारी स्थित जन स्वास्थ्य सहयोग केन्द्र। यहां एम्स दिल्ली में कार्यरत नौ डॉक्टर गरीब मरीजों को बहुत ही कम खर्च में इलाज उपल्बध कराते हैं। यहां छत्तीसगढ़ ही नहीं दूसरे प्रदेशों से भी इलाज के लिए आते हैं।
बिलासपुर जिले के गनियारी स्थित जन स्वास्थ्य सहयोग केंन्द्र का 1999 में दिल्ली एम्स हास्पिटल में कार्यरत नौ डाक्टर रमन कटारिया उनकी पत्नी डॉ. अंजू कटारिया, डॉ. योगेश जैन, डॉ.रचना जैन, डॉ. अनुराग भार्गव, डॉ. माधवी भार्गव, डॉ. विश्वरूप चर्टजी, डॉ. माधुरी चर्टजी एवं डॉ. सत्या ने प्रोफेशनल लाइफ छोड़कर समाज सेवा एवं गरीबों को न्यूनतम खर्च में सटीक इलाज उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया। तात्कालिन मध्यप्रदेश राज्य के बिलासपुर जिले में स्थित गनियारी गॉव का चयन किया। अरपा-भैसाझार बैराज परियोजना में कार्यरत कर्मचारियों के लिए बने आवास एवं कार्यालय के जर्जर भवन सहित दस एकड़ जमीन शासन से लीज पर लिया था। टाटा ट्रस्ट, आक्सफेम इण्डिया, एआईडी जैसे चैरेटेबल संस्थाओ के सहयोग से अस्पताल की शुरुआत की गई। प्रारंभ में पुरुष मरीजों से 10 रुपए एवं महिला-बच्चों से 5 रुपए का शु:ल्क लेकर इलाज शुरू किया गया। वर्तमान में साल में चवालिस हजार मरीजों का यहां इलाज किया जाता है। संस्थापक सदस्यों में से चार डॉक्टर सेंवाएॅ शुरू से दे रहे हैं, वर्तमान में यहॉ 18 डॉक्टर उपलब्ध हैं। सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार को ओपीडी चलता है। भीड़ इतनी होती है कि ओपीडी पंजीयन के लिए एक दिन पहले कतार लगानी पड़ती है। जन स्वास्थ्य सहयोग केंन्द्र गनियारी में कुल 240 स्टाफ पदस्थ हैं। चिकित्सा के व्यवसायीकरण की दौर में नाम मात्र के खर्च में इलाज उपलब्ध कराता यह केंद्र एक मिशाल है।


एसटी-एससी महिलाओं के लिए नर्सिग स्कूल
जन स्वास्थ्य सहयोग केंन्द्र गनियारी में छत्तीसगढ़ आदिम जाति विभाग के संयुक्त प्रयास से एसटी-एससी छात्राओं को जीएनएम (जर्नल नर्सिंग मिड लाईफ ) की ट्रेनिंग दी जाती है। यहॉ इसके लिए पच्चीस सीटें निर्धारित की गई है, जिसमें उम्मीदवारों का चयन संचालक चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा किया जाता है। ताकि इस वर्ग की महिलाएं सबल बन सकें।
कुपोषण से लडऩे चला रहे फुलवारी मुहिम
जन स्वास्थ्य सहयोग केन्द्र द्वारा बच्चों में कुपोषण से लडऩे के लिए फुलवारी नामक योजना चलाई जा रही ह,ै जिसके तहत चिन्हांकित गांव में छह माह से तीन साल उम्र के बच्चों को दाई के माध्यम से रखकर उन्हें निर्धारित समय पर डाईट चार्ट अनुसार चावल, दुध, अण्डा सहित अन्य पौष्टिक आहार नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है। ताकि कुपोषण को शुरुवाती दौर में ही रोका जा सके। वर्तमान में एक हजार बच्चें इस योजना से लाभान्वित है। प्रत्येक दस बच्चों के लिए संस्थान द्वारा एक दाई की नियुक्ति की है, जो डाईट चार्ट फॉलो कराती है।
सत्तर गांव में पहुंचा रहे जैविक बीज
जन स्वास्थ्य सहयोग केन्द्र द्वारा गनियारी स्थित तीन एकड़ जमीन पर धान की जैविक कृषि की जा रही है। इससे पैदा होने वाले फसल को बीज के रूप में उगाने के लिए श्रीपारा, सेमरिया, झींगटपुर, बम्हनी, शिवतराई सहित कुल सत्तर गांव के किसानों को दिया जाता है। ताकि जैविक कृषि को बढ़ावा मिले और रसायनिक खाद्व से उत्पन्न होने वाली बीमारियों से लोगों को निजात मिल सकें।

मरीजों को मिलती है हर सुविधा
अस्पताल में चैरिटेबल संस्थाओं के माध्यम से डिजिटल एक्सरे, ईको कार्डियोलाजी सहित स्वयं का लैब एवं पैथोलाजी केंन्द्र उपलब्ध है। यहॉ दूर-दूर से इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों एवं उनके परिजनों के लिए संस्था के द्वारा ही दस रुप में दाल-भात एवं सब्जी उपलब्ध कराया जाता है। उक्त खाना ही स्वास्थ्य सहयोग केंन्द्र के स्टाफ सहित स्वयं डॉक्टर भी खाते हंै। इसी तरह यहां मरीजों एवं उनके परिजनों के रहने एवं खाना बनाने की सुविधा को ध्यान में रखकर संस्थान ने एसीसीएल बाल्को के सहयोग से उनके सीआरसी मद से अस्पताल भवन एवं मरीजों एवं परिजनों के ठहरने के लिए धर्मशाला का भी निर्माण कराया गया है, जहां दूर से आए मरीज एवं परिजन रूक कर इलाज कराते हैं। यहॉ पर 3 एम्बुलेंस भी उपलब्ध है, जिससे एमआरआई, सीटी स्केन जैसे जॉच के लिए मरीजो को अस्पताल का स्टाफ अपने साथ लेकर जाता है और वापस भी इसी वाहन से लेकर आते है।

& पेट में पथरी से परेशान था बार-बार दर्द उठता था। इसके बाद पड़ोस के गांव वाले ने बताया कि गनियारी में एकदम कम खर्च में इलाज होता है, जिसके बाद यहॉ आया। जांच के बाद डॉक्टरों ने आपरेशन किया। अब आराम है।.
छटहिया, मरीज, नवगवा राजेन्द्र ग्राम जिला अनुपपुर मध्यप्रदेश।
& लगातार सिर में दर्द रहता है । इसके इलाज के लिए जयसिंह नगर शहडोल से आए हैं इलाज शुरू हो गया है।.
फुलबाई बासागॉव मध्यप्रदेश।
&छत्तीसगढ़ सहित दूसरे प्रदेशों से भी गरीब मरीज आते हंै, जिन्हें हर संभव इलाज उपलब्ध कराया जाता है। औसत के हिसाब से साल में चवालिस हजार मरीजों का यहॉ इलाज किया जाता है, जिसमें प्रसव, सामान्य सर्दी-खासी, जुकाम, पथरी, कैंसर, ईएनटी सहित सभी रोगों का इलाज एवं आपरेशन किया जाता है। यहॉ सिर्फ हृदय रोग का आपरेशन नहीं होता। इसके लिए हम अपने स्टाफ के साथ संबंधित मरीज को एम्स अस्पताल भेजकर इलाज करवाते हैं।
डॉ. गजानंद चिकित्सक जन स्वास्थ्य सहयोग केंन्द्र गनियारी।
हम गरीब तबके सहित आम लोगो को ईलाज उपलब्ध कराने प्रतिबद्ध है इसके लिए जो भी हो सकता है हम अपनी ओर से करते है परिस्थितियो के आधार पर कई मामलो में नि:शुल्क ईलाज भी मुहैया कराया जाता है यहॉ अपनी सेवाए देने के लिए बाहर से भी स्वस्र्फूत हो कर डाक्टर आते है ।
बी.जी.परमानंद प्रशासनिक अधिकारी जन स्वास्थ्य सहयोग केंन्द्र गनियारी।

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