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वर्ष 2018 में 16 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के निधन पर तत्कालीन राज्यपाल बलरामदास टंडन ने छत्तीसगढ़ में अवकाश घोषित कर दिया था। इसके बाद अगले दिन किसान मजदूर संघ के नेता ललित चन्द्र्नाहू का कोई अदालती काम सिविल कोर्ट में नहीं हो सका। मालूम हुआ कि, किसी अधिवक्ता का निधन हो जाने के कारण सुनवाई नहीं होगी। उन्होंने हाईकोर्ट में लिखित शिकायत की। इसी तरह छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा ने भी एक पत्र याचिका दायर की। इन दोनों पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया। मामले में काफी समय से सुनवाई चल रही थी। गुरुवार को चीफ जस्टिस की डीबी में अंतिम सुनवाई हुई। हाईकोर्ट बार एसोसियेशन के अधिवक्ता सुदीप जौहरी ने अदालत को बताया कि,जब इस तरह की कोई घटना वकीलों या परिजनों के साथ हो जाती है , तो अदालत मामले को आगे बढा देता है। हालांकि तत्काल सुने जाने वाले जरूरी मामलों की सुनवाई बिलकुल प्रभावित नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट के भी इस बारे में पहले से दिशानिर्देश हैं।
सुपरवाइजर की भर्ती के लिए आयुसीमा समाप्त, सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को शामिल करने के निर्देश
0 महिला एवं बाल विकास विभाग में भर्ती पर हाईकोर्ट का आदेश
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने महिला एवं बाल विकास विभाग में जारी सुपरवाइजर के पदों पर भर्ती के लिए हाईकोर्ट ने 45 वर्ष की उम्र सीमा को हटा दिया है। कोर्ट ने प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी कार्यकताओं को उक्त परीक्षा में शामिल होने की अनुमति प्रदान करने और व्यापमं को पोर्टल खोलने का आदेश दिया है।
महिला एवं बाल विकास द्वारा 26 जून 2023 को विज्ञापन जारी कर कुल 448 सुपरवाइजर के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं। इनमें से कुल 220 पदो पर सीधी भर्ती की जानी है। 228 पद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से भरे जाने हैं। जारी विज्ञापन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए आवेदन करने की आयुसीमा 45 वर्ष तय की गई थी। इस कारण 45 वर्ष से अधिक की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उस भर्ती परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रही थी। इसके खिलाफ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी कार्यकताओं को उक्त परीक्षा में शामिल होने की अनुमति प्रदान करने का आदेश दिया है।
अयोध्या नगर में बन रहे सामुदायिक भवन पर रोक
बिलासपुर। वार्ड क्रमांक-19 अयोध्या नगर में विधायक निधि से बन रहे सामुदायिक भवन पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। यह भवन 10 लाख रुपए की लागत से बनाया जा रहा था। इसके खिलाफ हंसराज पेशवानी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि खसरा नंबर 440/1, 440/4 की जिस जमीन पर यह सामूदायिक भवन बनाया जा रहा है वह उनकी निजी भूमि है। निगम ने ना तो सीमांकन कराया और ना ही जमीन का अधिग्रहण ही किया गया। जस्टिस पीपी साहू की कोर्ट ने सुनवाई के बाद इस निर्माण पर रोक लगा दी है।
शिक्षकों की भर्ती के लिए जारी अधिसूचना के खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज
बिलासपुर। स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के लिए जारी अधिसूचना के खिलाफ दायर याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की तरफ से याचिका की मेंटेबिलिटी पर सवाल उठाया गया। हाईकोर्ट ने भी आदेश में कहा है कि याचिका अस्पष्ट और अधूरी है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि यह तय करना जरूरी है कि जनहित याचिका का मुख्य उद्देश्य क्या है। जनहित याचिका सार्वजनिक हित के लिए होनी चाहिए, व्यक्तिगत हित के लिए नहीं। ज्ञात हो कि चकरभाठा बिलासपुर निवासी धनेश पाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी। इसमें स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के लिए 4 मई 2023 को जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई थी। इसमें कहा गया था कि पहले शिक्षकों की नियुक्ति उनके स्नातक विषय के आधार पर होती थी। अब लेकिन राज्य सरकार ने विषय विशेष में स्नातक की आवश्यकता को हटा दिया है। मतलब कि अब कोई भी शिक्षक किसी भी विषय को पढ़ा सकता है। इससे अंत में नुकसान छात्रों का ही होगा। याचिका में कहा गया कि राज्य शासन ने विषयवार पदों की जानकारी नहीं दी है, जो नियमों के विपरीत है। साथ ही अतिथि शिक्षकों को 10 प्रतिशत बोनस अंक देने को भी गलत बताया गया था। शासन की ओर से एडीशनल एडवोकेट जनरल चंद्रेश श्रीवास्तव ने पैरवी करते हुए कहा कि नियमों के अनुसार ही पूरी भर्ती प्रक्रिया हो रही है। ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शिक्षक के टी संवर्ग के चार हजार 659 पद पर एवं ई संवर्ग के एक हजार 113 पदों पर भर्ती प्रक्रिया की जा रही है। ।
नियम विरूद्ध हो रहे डीएमएफ के कार्यों पर लगाम कसने जनहित याचिका स्वीकार
0 शासन को नोटिस जारी
बिलासपुर। खनिज न्यास मद (डीएमएफ) की 60 प्रतिशत राशि प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित लोगों पर खर्च की जानी है, पर राशि का उपयोग दीगर कार्यों में किया जा रहा है। अभी तक प्रत्यक्ष प्रभावितों की पहचान भी नहीं हो सकी है। अब तक किए गए खर्च का सोशल आडिट भी नहीं कराया गया है। इस पर कुछ प्रभावितों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई है जो कि स्वीकार कर ली गई है। याचिका के अनुसार प्रदेश में मुख्य खनिजों के उत्खनन से मिलने वाली रायल्टी राशि का एक निश्चित अतिरिक्त हिस्सा खनिज पट्टा धारकों द्वारा जिला खनिज न्यास संस्थानों को दिया जाता है, इस राशि का उपयोग खनन अथवा खनन प्रक्रियाओं से प्रभावित क्षेत्रों के विकास और प्रभावित व्यक्तियों के हित में किया जाना है। यह न्यास एवं गैर लाभ अर्जित करने वाला निकाय है। याचिकाकर्ता बृजेश श्रीवास ने बताया कि डीएमएफ की राशि प्रभावितों पर खर्च नहीं की जा रही है। नियमत: प्रत्यक्ष प्रभावितों की पहले पहचान की जानी है, उसके लिए सर्वे कराया जाना है। अभी तक सर्वे का कार्य ही नहीं हो सका है। याचिका में डीएमएफ के कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण कराना, सीए द्वारा जांच कार्यों के निगरानी के लिए निगरानी समिति का गठन की मांग की गई है।प्रावधानों का नहीं हो रहा पालनयाचिका में कहा गया है कि डीएमएफ के प्रावधानों में कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण करने का भी उल्लंघन किया जा रहा है। उसी प्रकार वार्षिक कार्य योजना बनाना व वित्तीय वर्ष समाप्ति के 90 दिनों के अंदर अंकेक्षण कराने का भी पालन नहीं हो रहा। ज्यादातर फंड मार्च के अंत में व्यय किए जा रहे हैं, जबकि इस फंड को मार्च तक व्यय करने की कोई बाध्यता नही है। इसके साथ ही बिना टेंडर, बिना कोटेशन के कार्य आवंटित किए जा रहें हैं। बिना टीडीएस काटे भुगतान हो रहा। इससे शासन को राजस्व का नुकसान हो रहा है। ज्यादातर जिले डीएमएफ का लेजर बुक कैश बुक संधारित नहीं कर रहे हैं।
चीफ जस्टिस ने किया औचक निरीक्षण, जिला न्यायालय में अव्यवस्था पर जताई नाराजगी
0 सात दिन में व्यवस्था सुधारने के दिए निर्देश
फ़ोटो दादा
बिलासपुर- चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा गुरुवार को हाईकोर्ट के मामलों की सुनवाई पश्चात् औचक निरीक्षण के लिए मुंगेली पहुंचे। उन्होंने जिला न्यायालय एवं परिवार न्यायालय का जायजा लिया। वहां बेतरतीब ढंग से गाड़ियों की पार्किंग, कियोस्क मशीन (जिसमें प्रकरणों की जानकारियाँ प्राप्त होती है) की खराबी, न्यायालय परिसर की अस्वच्छता एवं बिजली के तार व बिजली पैनलबोर्ड अव्यवस्थित ढंग से फैले हुए पाए गए। जिसे देखकर नाराजगी व्यक्त करते हुए एक सप्ताह के भीतर तत्काल व्यवस्था सुधारने हेतु जिला न्यायाधीश एवं चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट तथा प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिये।
औचक निरीक्षण में रजिस्ट्रार जनरल अरविन्द कुमार वर्मा भी शामिल थे। मुख्य न्यायाधिपति ने वहां के अधिकारियों को नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में कोर्ट आने वाले वकीलों तथा पक्षकारों को परेशान न होना पड़े, उनके बैठने एवं अन्य सुविधाओं की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। जिला न्यायालय में उपरोक्त अव्यवस्था को देखकर जिला न्यायाधीश चंद्रकुमार अजगल्ले को सात दिवस के भीतर स्थिति सुधारने तथा भविष्य में औचक निरीक्षण के दौरान ऐसी बदहाल स्थिति निर्मित न हो, इस हेतु आवश्यक निर्देश दिए।
जिला न्यायालयों का लगातार दौरा कर रहे सीजे
चीफ जस्टिस ने कोर्ट कैंपस में अधिवक्ताओं से भी चर्चा की। ज्ञात हो कि सीजे सिन्हा को इस उच्च न्यायालय में आये हुए मात्र 3 माह ही हुए हैं। इस दौरान जिला न्यायालय रायपुर बिलासपुर, कांकेर, जगदलपुर, दंतेवाड़ा, कोरबा, कटघोरा एवं मुंगेली का निरीक्षण कर चुके हैं तथा मूलभूत सभी आवश्यक कार्य को शीघ्रातिशीघ्र दुरूस्त करने का निर्देश दे चुके हैं।
Published on:
27 Jul 2023 10:48 pm

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