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Republic Day 2023: जब छत्तीसगढ़ आए महात्मा गांधी, इस मिट्टी के चबूतरे पर खड़े होकर लोगों को किया था सम्बोधित

Republic Day 2023: महात्मा गाँधी ने जिस चबूतरे पर खड़े होकर ग्रामीणों को संबोधित किया था, वहां की मिट्टी को लोगों ने श्रद्धापूर्वक अपने माथे पर लगाई। यहाँ तक कि अधिकांश लोग पोटली में मिट्टी भरकर ले गए। कुंजबिहारी अग्निहोत्री ने बापू के जाने के बाद उनकी स्मृति में पीपल के पौधे लगाए।

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Republic Day 2023

जयस्तंभ

Republic Day 2023: आज 26 जनवरी को पूरा भारत देश 74वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। 26 जनवरी 1950 को देश का संविधान लागू हुआ था, इस वजह से हर साल इस दिन को गणतंत्र दिवस(Republic Day ) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को पूरे भारत में राष्ट्रीय पर्व के तौर पर मनाया जाता है।

संविधान सभा(constituent Assembly) की पहली बैठक सोमवार 9 दिसंबर 1946 को सुबह 11 बजे शुरू हुई थी। इसमें 210 सदस्य उपस्थित थे। 11 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की बैठक में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष चुना गया। जो अंत तक इस पद पर बने रहे थे। 13 दिसंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू(Pandit jawaharlal nehru) ने भारतीय संविधान का उद्देश्य प्रस्ताव सभा में पेश किया था। जो 22 जनवरी 1947 को पारित किया गया था। क्या आप जानते हैं कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Father of the Nation Mahatma Gandhi) छत्तीसगढ़ आए थे?

1933 में आए थे महात्मा गांधी
सन 1933 में 23 जून को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) अविभाजित मध्य प्रदेश के एक महत्वपूर्ण हिस्सा यानी छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए थे। इस दौरान रायपुर में उनका कार्यक्रम था। कुंजबिहारी अग्निहोत्री समेत उस जमाने के वरिष्ठ नेताओं ने बापू से बिलासपुर आने की विनती की। ऐसे में महात्मा गाँधी उनके इस आग्रह को टाल नहीं पाए। 23 जून को बापू सड़क मार्ग से छत्तीसगढ़ के बिलासपुर पहुंचे। रात्रि विश्राम के बाद शनिचरी पड़ाव के विशाल मैदान में उनकी सभा हुई।


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मिट्टी के चबूतरे पर लोगों को किया सम्बोधित
उस दौरान महात्मा गाँधी(Mahatma Gandhi) के कई दीवाने थे। बिलासपुर में उनके सभा की खबर लगी तो आसपास के इलाकों में रहने वाले ग्रामीण रात में ही आ गए थे। ये ग्रामीण बैलगाड़ी व साइकिल, जिसे जो साधन मिला उसी में पहुंच गए थे। ग्रामीणों ने अरपा नदी के किनारे कैंप कर दिया था। फिर दैनिक क्रिया से निवृत्त होकर ये ग्रामीण सुबह तैयार हो गए थे। शनिचरी पड़ाव के विशाल मैदान में ग्रामीण अनुशासनबद्ध तरीके से बैठकर बापू के आने का बहुत बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। तय समय पर बापू(Mahatma Gandhi) सभास्थल पर पहुंचे। महात्मा गाँधी(Mahatma Gandhi) ने उस दौरान मिट्टी के बने चबूतरे पर खड़े होकर लोगों को संबोधित किया। उन लोगों से मुलाकात की और आगे के पड़ाव के लिए निकल गए।

जय स्तंभ का निर्माण
बताया जाता है कि महात्मा गाँधी(Mahatma Gandhi) ने जिस चबूतरे पर खड़े होकर ग्रामीणों को संबोधित किया था, वहां की मिट्टी को लोगों ने श्रद्धापूर्वक अपने माथे पर लगाई। यहाँ तक कि अधिकांश लोग पोटली में मिट्टी भरकर ले गए। कुंजबिहारी अग्निहोत्री ने बापू के जाने के बाद उनकी स्मृति में पीपल के पौधे लगाए। गांधीवादी नेताओं ने बापू की याद को बरकरार रखने और आजादी की लड़ाई को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से जय स्तंभ( Jaystambh) का निर्माण कराया।

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