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सुन सकती न बोल पाती और हुनर ऐसा कि लोग दांतों तले उंगलियां दबा लें, स्पिन बॉलिंग में महारथ, बड़े-बड़े खिलाड़ी भी हैरत में

शहर की मूक बाधिर बेटी का क्रिकेट में जुनून, खेल चुकी है बीसीसीआई के कई मैच

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Shradha Vaishnav is the best performing in cricket after being disable

सुन सकती न बोल पाती और हुनर ऐसा कि लोग दांतों तले उंगलियां दबा लें, स्पिन बॉलिंग में महारथ, बड़े-बड़े खिलाड़ी भी हैरत में

बिलासपुर. अगर मुझे मौका मिला होता तो आज मेरा भी नाम लोगों की जुबां पर होता है। अगर मेरी स्थिति ऐसी न होती तो आज मैं भी अपने देश का नाम रोशन कर रहा होता, लेकिन माहौल न मिलने के कारण मैं सफल नहीं हो पाया। ऐसी बातें करते आपने अक्सर लोगों को देखा और सुना होगा। आज हम आपको ऐसे खिलाड़ी के बारे में बताने जा रहे हैं जो बचपन से सुन और बोल नहीं सकती, लेकिन क्रिकेट के प्रति उसका जुनून देखकर लगेगा कि बाकी सब लोग सिर्फ बहानेबाजी करते हैं। श्रद्धा वैष्णव बचपन से मूक बधिर है। छोटे भाई ओम वैष्णव को क्रिकेट खेलता देख उसने अपने पिता रमेश वैष्णव के सामने क्रिकेट खेलने की इच्छा जाहिर की। पहले तो परिवार के सदस्यों ने क्रिकेट खेलने से मना किया, लेकिन श्रद्धा की जिद के आगे सब को झुकना पड़ा। आज श्रद्धा क्रिकेट जगत की एकलौती खिलाड़ी है जो विकलांग होते हुए भी सामान्य बच्चों के साथ खेल रही है और अपने शानदार प्रदर्शन से लोगों को चकित कर रही है।

वुमंस क्रिकेट में कर रही है बेहतरी प्रदर्शन
बीसीसीआई द्वारा सीनियर वुमंस टी-20 लीग क्रिकेट मैच का आयोजन रायपुर के अंतराष्ट्रीय स्टेडियम में किया जा रहा है। जिसमें श्रद्धा अपने स्पिन बॉलिंग से विरोधी टीम के हौसले पस्त कर रही है। जितने भी मैच हुए है उसमें शानदार प्रदर्शन कर अपने राज्य का नाम रोशन कर रही है। इसके खेल को देखकर विरोधी टीम के खिलाड़ी भी इसका हौंसला बढ़ा रहे है। मालूम हो कि श्रद्धा वैष्णव देश की एक ऐसी दिव्यांग क्रिकेट खिलाड़ी है जो सामान्य बच्चों के साथ खेल रही है। 13 साल की उम्र से शुरु हुआ सफर आज 20 वर्ष की उम्र में भी जारी है।


सभी राज्यों में खेल चुकी है क्रिकेट:
श्रद्धा अंडर 19, अंडर 23 सीनियर, सीनियर टी-20 जैसे खेलों में अपना प्रदर्शन कर चुकी है। जिसमें अंडर 23 में10 ओवहर में 2 मेडन, 14 रन और 5 विकेट देकर सबसे अच्छा खेला का प्रदर्शन किया। साथ ही स्कूल की तरफ से खेलते हुए चार बार राष्ट्रीय स्पर्धा खेल चुकी है। जिसमें श्रद्धा ने 3 ओवर में 2 रन देकर पांच विकेट ले चुकी है। इसके अलावा देश के सभी राज्यों में अपने खेल का प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर चुकी है।

श्रद्धा के कोच और क्रिकेटर दिलीप सिंह ने बताया कि उनके खेलने की टेक्निक शानदार है। भारत की एकलौती दिव्यांग महिला खिलाड़ी है जो सामान्य खिलाडिय़ों के साथ खेलती है। प्रशिक्षण के दौरान क्रिकेट की बारीकियों को बड़े ध्यान से सुनती और अमल करती है। कभी-कभी स्थिति ऐसी हो जाती है कि हम उसकी बातों को समझ नहीं पाते, लेकिन हमारी बातों को वह आसानी से समझ लेती है। इसे गॉड गिफटेड समझे या फिर खेल के प्रति उसका जुनून। वुमंस सीनियर में उसके शानदार प्रदर्शन से छत्तीसगढ़ की टीम को बढ़त मिली है।
दिलीप सिंह, क्रिकेट प्रशिक्षक, खेल एवं युवा कल्याण विभाग