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पापा इस दर्द के साथ न मैं पढ़ाई कर पा रहा हूं, न नौकरी कर पाऊंगा और न ही शादीशुदा जिंदगी जी पाऊंगा इसलिए जा रहा हूं

7वीं कक्षा से पीछा नहीं छोड़ रहा था सिरदर्द, 12वीं का रिजल्ट देखने के बाद सुसाइड नोट छोड़कर छात्र हुआ गायब

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Student disappeared after seeing results of board

पापा इस दर्द के साथ न मैं पढ़ाई कर पा रहा हूं, न नौकरी कर पाऊंगा और न ही शादीशुदा जिंदगी जी पाऊंगा इसलिए जा रहा हूं

बिलासपुर. सीबीएसई 12 के रिजल्ट में 65 फीसदी अंकों से उत्तीर्ण होने वाला छात्र गुरुवार को सिरदर्द की बीमारी से परेशान होकर लापता हो गया। गायब होने से पहले उसने परिजनों को वाट्सएप पर दो पन्नों का सुसाइड नोट भेजा है। छात्र की अंतिम लोकेशन रायपुर में मिली है। परिजन परेशान हैं। जांजगीर-चांपा जिले के जैजैपुर में रहने वाला छात्र डोल कुमार चन्द्रा शहर के दयालबंद में प्रवेश परीक्षा के लिए कोचिंग कर रहा था। जांजगीर-चांपा के जैजैपुर अंतर्गत ग्राम चोरभट्टी में रहने वाला डोल कुमार चन्द्रा पिता विश्वेश्वर (18) ग्राम चिस्दा स्थित नवोदय विद्यालय में 12 वीं कक्षा का छात्र था। पिछले 1 महीने से वह दयालबंद में मुन्ना गोयल के घर में साथी मनीष सिदार व लव कर्ष के साथ किराये पर रहकर गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी में प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था।
क्या हुआ
-गुरुवार को दोपहर 2 बजे डोल कुमार अपने साथी मनीष व लव को 65 फीसदी से उत्तीर्ण होने और गृहग्राम जाने की जानकारी देकर निकला था।
-शाम 6 बजकर 2 मिनट पर डोल कुमार ने अपने ममेरे भाई राजकुमार चन्द्रा पिता सूरज मल को वाट्सएप पर दो पन्नों का एक सुसाइड नोट भेजा।
-राजकुमार ने सुसाइड नोट भेजने की जानकारी डोल कुमार के पिता और अन्य परिजनों को दी
परिजनों ने क्या किया
-राजकुमार ने डोल कुमार के मोबाइल पर संपर्क किया, लेकिन मोबाइल फोन बंद था। राज कुमार ने रायपुर पुलिस से संपर्क कर डोल का नंबर ट्रेस किया, जिसमें अंतिम लोकेशन रायपुर गुढिय़ारी स्थित राम नगर में मिली।
-रात करीब 10 बजे परिजनों ने बिलासपुर स्थित कोतवाली थाना पहुंच कर गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई।
पुलिस ने क्या किया
-छात्र के पिता विश्वेश्वर की सूचना पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की। पुलिस कंट्रोल रूम को घटना से अवगत कराया।
-परिजन देर रात छात्र की तलाश करने रायपुर रावाना हुए
-चिंतित परिजन व दोस्त तलाश में देर रात तक भटकते रहे, नहीं चला पता

छात्र द्वारा लिखा गया सुसाइड नोट शब्दश:
मुझे माफ कीजिएगा पापा, भैया मम्मी, बुआ, भाभी सब...
शायद आप इसे बहाना समझें परंतु यह सच है। मेरा सर दर्द आज तक नहीं छोड़ा है और यह तब से (कक्षा 7वीं) से प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। पता नहीं ऐसा क्या है। आपने अपनी तरफ से इलाज कराने की भरपूर कोशिश की है। इसमें कोई दो मत नहीं है। मैं भी थक गया कि आखिर कोई डॉक्टर मेरी इस बीमारी को सही क्यों नहीं पहचान पा रहे हैं, और इलाज क्यों नहीं कर रहे हैं सही। तब से ( कक्षा 7वीं से) दिन रात यही सोचते रहता हूं कि आखिर मेरा सिरदर्द इतना दर्द क्यों करता है। आखिर मेरे बीमारी को डॉक्टर पहचान क्यों नहीं पा रहे हैं। क्या मैं इनकी वजह से एक दिन अचानक से मर जाउंगा। यही सब दिमाग में चलता रहता है। नहीं चाहने पर भी यह सोच दिमाग में आता ही है। रोज अपने इस सिर दर्द को मैं झेलता हंू आज तक। ऐसा लगता है कि मेरे सिर पर आग, कील, और बहुत सारा वजन ऊपर नीचे हो रहा है। साथ ही साथ मेरे साथ इसकी वजह से बड़ा हादसा होने का डर सताता है। इस कारण न मैं ठीक से पढ़ पाता था ना किसी क्लास में ध्यान लगा पाता था। क्योंकि जब भी ध्यान लगाने की कोशिश करता था तब यह सब टेंशन दिमाग में आ जाता था और यह भयानक दर्द सताता था। शायद यह दर्द मुझ़े जीने नहीं देगा। मैंने बहुत सोचा इससे पता लगाया कि मैं इस दर्द के साथ पढ़ाई नहीं कर सकता, न ही कोई नौकरी कर सकता और न ही कमा सकता हूं। शादी शुदा जिंदगी भी नहीं जी सकता। मतलब केवल एक रोगी की तरह रह सकता हूं।
ऐसे जीने का क्या मतलब भैया..... मैं नहीं जीना चाहता ऐसी जिंदगी। मैं मरना चाहता हूं।
सोचा था बड़ा होकर अच्छा इंजीनियर बनूंगा, अच्छा कमाउंगा, आप लोग मुझे अच्छे से पाले, उसका अच्छा काम कर कर्ज चुकाउंगा। पापा-मम्मी मुझे माफ कीजिएगा। तोष भैया के जाने के बाद मैं ही आप लोग का आखिरी उम्मीद था, लेकिन मेरी किस्मत में कुछ नहीं है। मुझ़े माफ कीजिएगा।
राहुल, चेतना, गौरी, प्राची, बाबू, यशी मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। सॉरी यारा
प्लीज मुझ़े भुला दो, अपनी अपनी नयीं जिंदगी शुरू करो आप लोग सब। अगर आपको मेरी लाश मिल गया तो चाहता हूं कि कुटराबोड़ में दफनाना।
(जैसा सुसाइड नोट में लिखा)