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हिस्ट्रीशीट के साथ एेसा मजाक, जो पसंद वो बाहर, जो नापसंद वे पुलिस की हिट लिस्ट में

हिस्ट्रीशीट में सहूलियत से नाम, दर्जनभर से अधिक अपराधिक रिकार्ड वालों का माफी सूची तक में नाम नहीं

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Crime

कमलेश रजक. बिलासपुर @ पत्रिका. आदतन अपराधियों का लेखा-जोखा रखने वाली पुलिस हिस्ट्रीशीट से मजाक कर रही है। संगीन मामलों में अपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने वाले हिस्ट्रीशीटरों के नाम हिस्ट्रीशीट से गायब हैं। जो हिस्ट्रीशीटर पुलिस को पसंद हैं, उन्हें हिस्ट्रीशीटरों की सूची से बाहर कर दिया गया है, वहीं जो नापसंद हैं, उन्हें पुलिस हिस्ट्रीशीट की सूची और जिला बदर की सूची में रखा है। माना जा रहा है कि बड़े हिस्ट्रीशीटरों के साथ अच्छे संबंध होने के कारण अधिकारी उनका नाम सूची से बाहर कर चुके हैं।

प्राणनाथ उर्फ संजू त्रिपाठी: सिविल लाइन थानांतर्गत कुदुदण्ड निवासी प्राणनाथ उर्फ संजू त्रिपाठी के खिलाफ सिविल लाइन थाने में २७ अपराध दर्ज हैं। संजू के खिलाफ पहला प्रकरण ३० मार्च १९९२ को दर्ज हुआ हुआ था। उसके खिलाफ मारपीट, घर में घुसकर हमला करने, आम्र्स एक्ट, लूटपाट, हत्या समेत कई प्रकरण दर्ज हैं। अंतिम बार उसके खिलाफ २६ नवंबर २०१० को अपराध दर्ज हुआ था। इंटक का नेता होने के कारण पुलिस ने अब तक संजू की हिस्ट्रीशीट नहीं खोली है। संजू के खिलाफ जिला बदर और रासुका के तहत भी कार्रवाई हो चुकी है।

सुशांत शुक्ला उर्फ गोलू : सरकण्डा शिवघाट निवासी व भाजपा नेता सुशांत शुक्ला उर्फ गोलू के खिलाफ सिविल लाइन थाने में ८, सरकण्डा थाने में १ और कोनी थाने में ८ प्रकरण दर्ज हैं। सन २००२ में उसके खिलाफ मारपीट का पहला एफआईआर सरकण्डा थाने में दर्ज हुआ था। अपराधिक रिकार्ड में सुशांत शुक्ला के खिलाफ महिला आरक्षक से मारपीट और गाली गलौज, कोनी स्थित गुरुघासीदास यूनिवर्सिटी के प्राध्यापक से मारपीट समेत कई मारपीट के मामले दर्ज हैं। वर्ष २००२ से २०११ तक सुशांत ने अपने साथियों के साथ मिलकर कई अपराधों को अंजाम दिया था।

धर्मेन्द्र गेंदले : जरहाभाठा मिनी बस्ती निवासी धर्मेन्द्र गेंदले पिता धनीराम गेंदले के खिलाफ सिविल लाइन थाने में ९ अपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। वर्ष २०१४ में उसके खिलाफ पहला अपराध आबकारी एक्ट के तहत दर्ज हुआ था। इसके बाद से वह नशीली दवाइयों का सौदागर बन गया। उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के आधा दर्जन से अधिक प्रकरण और बलवा व हत्या के प्रयास के दो प्रकरण दर्ज हो चुके हैं। उसके खिलाफ अंतिम बार पुलिस ने १६ मार्च २०१७ को एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया था। धमेन्द्र का नाम न ही हिस्ट्रीशीटर में शामिल है और न ही निगरानी व गुण्डा बदमाश की सूची में।

दिलीप बंजारे : जरहाभाठा में निवासी व गैंग वार स्पेशिलिस्ट नाम से मशहूर दिलीप बंजारे पिता कृष्ण कुमार बंजारे के खिलाफ सिविल लाइन थाने में २० अपराधिक प्रकरण दर्ज है। उसके खिलाफ पहला एफआईआर मार्च २००६ में दर्ज किया गया था। उसके खिलाफ मारपीट, हत्या का प्रयास, आम्र्स एक्ट, चारसौबीसी, दंगा, गैंगवार, समेत कई संगीन मामले दर्ज हैं। पुलिस ने उसके खिलाफ निगरानी खोली थी, लेकिन राजनीतिक दबाव में पुलिस ने उसका नाम हिस्ट्रीशीट से काट दिया था। उसके खिलाफ अंतिम अपराध जुलाई २०१७ में दर्ज हुआ था।

रितेश निखारे उर्फ मैडी : जरहाभाठा निवासी रितेश निखारे उर्फ मैडी पिता रवि निखारे के खिलाफ सिविल लाइन थाने में १६ अपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। उसके खिलाफ पहला अपराध ६ फरवरी २००९ को दर्ज हुआ था। २००९ से २०१६ तक उसके खिलाफ बलवा, हत्या का प्रयास, अपहरण, तोडफ़ोड़, रंगदारी कर वसूली करने और आम्र्स एक्ट के कई प्रकरण दर्ज हैं। उसके खिलाफ उसलापुर स्टेशन में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव के सामने कांग्रेस नेताओं के साथ गैंगवार करने के मामले में अपराध दर्ज हुआ था। कांग्रेस नेताओं के दबाव के कारण पुलिस ने उसके खिलाफ अब तक निगरानी सूची में नहीं है।

बाबा उर्फ संतोष खटिक : करबला निवासी बाबा उर्फ संतोष पिता बलीराम खटिक के खिलाफ कोतवाली थाने में ३६ अपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। उसके खिलाफ पहली एफआईआर ६ फरवरी २००३ को दर्ज हुई थी। जुआ खिलाने और मारपीट के तीन दर्जन मामलों में उसके खिलाफ पुलिस ने अपराध दर्ज किया था। उसके खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई भी हो चुकी है। अंतिम बार उसके खिलाफ वर्ष २०१६ में आम्र्स व आबकारी एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया था। उसका नाम भी हिस्ट्रीशीटरों की सूची से गायब है।

प्रवीण केसरी : दयालबंद का आदतन अपराधी प्रवीण केसरी के खिलाफ कोतवाली और सरकण्डा थाने में ३० अपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। उसके खिलाफ १७ जुलाई १९९६ को पहला एफआईआर हत्या के प्रयास का दर्ज हुआ था। वर्ष १९९६ से २०१८ तक उसके खिलाफ ३० अपराधिक प्रकरण दर्ज हो चुके हैं, जिसमें हत्या का प्रयास, लूट, आम्र्स एक्ट, तोडफ़ोड़, बलवा, घर घुसकर जानलेवा हमला करने और गुण्डागर्दी कर जमीन कब्जा करने के कई मामले दर्ज हैं। उसका नाम कोतवाली थाने के हिस्ट्रीशीट से राजनीतिक दबाव के कारण गायब कर दिया गया है।

रत्तू उर्फ शैलेन्द्र मिश्रा: जबड़ापारा निवासी व भाजपा नेता रत्तू उर्फ शैलेन्द्र मिश्रा के खिलाफ सरकण्डा व सिविल लाइन थाने में १८ अपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। उसके खिलाफ पहली एफआईआर सन २००२ में दर्ज हुई थी। वर्ष २००२ से वर्ष २०१७ तक उसके खिलाफ कुल १८ अपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, जिनमें मारपीट, शासकीय कार्य में बाधा डालना, छेड़खानी, घर घुसकर मारपीट, थाने में दंगा फसाद करने के मामले दर्ज हैं। उसका नाम हिस्ट्रीशीटरों की सूची में शामिल नहीं है।

निक्कू उर्फ ईशान भण्डारी : दैहानपारा सरकण्डा निवासी निक्कू उर्फ ईशान भण्डारी पिता विजय कृष्ण भण्डारी के खिलाफ सरकण्डा थाने में १० अपराध दर्ज हैं। उसके खिलाफ पहला एफआईआर वर्ष २००५ में दर्ज हुआ था। उसके खिलाफ मारपीट,घर घुसकर तोडफ़ोड़, जानलेवा हमला करने, बलवा के कई मामले दर्ज हैं। उसका नाम भी हिस्ट्रीशीटरों की सूची में शामिल नहीं है।

अकबर खान : सरकण्डा निवासी व कांग्रेस नेता अकबर खान के खिलाफ सरकण्डा, सिविल लाइन और कोटा थाने में एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। वर्ष २००८ में उसके खिलाफ मारपीट और अपहरण का मामला दर्ज हुआ था। उसके खिलाफ हत्या के प्रयास समेत कई संगील मामले दर्ज हैं। सरकण्डा पुलिस उसे अब तक हिस्ट्रीशीटर की सूची में शामिल नहीं किया है।

त्रिलोक श्रीवास : कोनी निवासी व कांग्रेस नेता त्रिलोक श्रीवास के खिलाफ कोनी थाने में १६ प्रकरण दर्ज हैं। उसके खिलाफ थाने में पहली एफआईआर २००६ में दर्ज हुई थी। थाने में उसके खिलाफ अपहरण, मारपीट समेत जानलेवा हमला करने के कई प्रकरण दर्ज हैं। कोनी पुलिस ने अब तक उसकी हिस्ट्रीशीट नहीं खोली है।

एक्सपर्ट व्यू
राजनीतिक दबाव के कारण पुलिस राजनीतिक संरक्षण वाले हिस्ट्रीशीटरों पर कार्रवाई नहीं कर रही है।एेसे हिस्ट्रीशीटरों का थाने में खुलेआम आना जाना और पुलिस कर्मियों केसाथ उठना बैठना होता है, जो पुलिस की सेवा में हमेशा तत्पर रहते हैं। हिस्ट्रीशीटरों पर कार्रवाई के लिए पुलिस टॉस्क फोर्स का गठन करना चाहिए। दूसरे जिलो में जाकर टॉस्क फोर्स को कार्रवाई करनी चाहिए। हिस्ट्रीशीटरों ने कई पुलिस कर्मियों को विदेश की यात्रा कराने का खर्च वहन किया है। थानों में लगे सीसीटीवी कैमरे जीपीएस सिस्टम से कनेक्ट होने चाहिए ताकि आईजी और एसपी अपने कार्यालय में बैठे-बैठे थानों में आने जाने वाले लोगों औश्र पुलिस कर्मियों के साथ घूमने वालों पर नजर रख सकें। सीआर के अनुसार पुलिस कर्मियों को थाने में पदस्थ किया जाना चाहिए। ताकि हिस्ट्रीशीटरों पर लगातार कार्रवाई हो।
- विनय दुबे, अधिवक्ता

आपराधिक रिकार्ड धारियों के रिकार्ड खांगाले जा रहे हैं। जिनकी हिस्ट्रीशीट नहीं खुली है उनकी हिस्ट्रीशीट खोली जाएगी। आदतन अपराधियों के खिलाफ पुलिस रेग्युलेशन के अनुसार कार्रवाई होगी।
- आरिफ एच शेख, एसपी, बिलासपुर