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Swami Atmanand School: बच्चों से झाड़ू लगवाने के मामले में भड़के कलेक्टर, जांच कमेटी गठित

Swami Atmanand School Chhattisgarh: स्वामी आत्मानंद पं. राम दुलारे दुबे स्कूल में बच्चों द्वारा झाड़ू-पोंछा लगाने के मामले में पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद टीएल बैठक में कलेक्टर ने मामले को संज्ञान में लिया है। इसके बाद 2 प्राचार्यों को जांच अधिकारी बनाया गया है।

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Chhattisgarh News: स्वामी आत्मानंद पं. राम दुलारे दुबे स्कूल में बच्चों द्वारा झाड़ू-पोंछा लगाने के मामले में पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद टीएल बैठक में कलेक्टर ने मामले को संज्ञान में लिया है। इसके बाद 2 प्राचार्यों को जांच अधिकारी बनाया गया है। अधिकारी दो दिन के भीतर जांच कर रिपोर्ट सौपेंगे। वहीं दिव्यांग महिला की शिकायत को भी जांच में शामिल किया गया है।

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जो भी दोषी होगा उस पर होगी कार्रवाई

जिले के सभी स्वामी आत्मानंद स्कूलों को पर्याप्त सेटअप से साथ शुरू किया गया था, जिसमें भृत्य से लेकर शिक्षक व प्राचार्य तक की व्यवस्था की गई है। फिर भी स्कूल में बच्चे ही साफ-सफाई करते हुए दिख रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद पत्रिका ने 12 दिसंबर के अंक में ‘स्कूल में पोछा-झाडू लगाने के बाद पढ़ रहे बच्चे, पालक बोले बड़ी उम्मीद से भेज रहे’ हेडिंग से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। मंगलवार को टीएल मीटिंग थी।

मीटिंग में कलेक्टर ने स्कूल के मामले को संज्ञान में लेते हुए डीईओ को फटकार लगाई। वहीं जांच रिपोर्ट भी दो दिनों के भीतर देने की बात कही। इसके अलावा दिव्यांग महिला के मामले को भी जांच में शामिल किया गया है।

गौरतलब है कि स्वामी आत्मानंद स्कूल तात्कालिक कांग्रेस सरकार की महत्वाकांक्षी योजना थी। इस स्कूल को स्वामी आत्मानंद नाम देने का उद्देश्य था कि विद्यार्थियों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिल सके, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही देखने को मिल रहा है। वीडियो में देखा जा रहा है कि कर्मचारी के उपस्थित नहीं होने पर विद्यार्थी अस्त-व्यस्त टेबल-बेंच की खुद ही सफाई कर रहे हैं।

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प्राचार्य ने कहा-बच्चों के आने से पहले करा दी जाती है साफ-सफाई

डीईओ टीआर साहू ने बताया कि स्कूल की प्राचार्य से बात की गई तो उनका कहना था कि शनिवार को प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। वहां कागज के टुकड़े और कुछ पेपर पड़े हुए थे। सुबह आकर बच्चे इसे खुद साफ करने लगे। साथ ही मैडम ने यह भी सफाई दी कि हर रोज बच्चों के आने से पहले साफ-सफाई करा दी जाती है। जबकि बच्चे स्कूल पहुंचे तो साफ-सफाई की पोल खुल गई और वे खुद ही सफाई करने में जुट गए थे।

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