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भगवान का शुक्र है कि फ्रैक्चर पर पड़ गई कीमैन की नजर, नहीं तो हो सकता था बहुत बड़ा हादसा

ट्रेन को 30 किलो मीटर प्रतिघंटे की धीमी गति से ट्रेन पर से सुरक्षित निकाला गया।

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भगवान का शुक्र है कि फ्रैक्चर पर पड़ गई कीमैन की नजर, नहीं तो हो सकता था बहुत बड़ा हादसा

बिलासपुर. हरिद्वार से पुरी के लिए आ रही उत्कल एक्सप्रेस (18478) गुरुवार को खोंगसरा के पास दुर्घटना गस्त होते हुए बाल-बाल बच गई। की मैन की सतर्कता से एक बड़ा हादसा टल गया। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे अधिकारियों व गैंगमैनों की टीम ने मरम्मत कर ट्रेन को सकुशल रवाना किया। तो वहीं दो अन्य घटना में यात्री घंटों परेशान हुए। रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार सुबह लगभग 9.30 बजे रेलवे ट्रैक का निरीक्षण कर रहे। की मैन भागवत प्रसाद को खोंगसरा रेलवे स्टेशन से पहले अचानक पटरी में एक फैक्चर दिखाई दिया। तब तक ट्रेन ट्रैक फै क्चर की जगह तक पहुंच चुकी थी। की मैन भागवत प्रसाद ने लाल झंडी दिखा कर ट्रेन को रुकवाया और हजारों यात्रियों की जिंदगी को बचा लिया। ट्रेन रुकने के बाद फिर 9.50 बजे ट्रैक फै क्चर जानकारी अधिकारियों को दी गई। ट्रैक फैक्चर की सूचना लगते ही मौके पर पहुंची टीम ने फैक्टर की मरम्मत कर ट्रेन को 30 किलो मीटर प्रतिघंटे की धीमी गति से ट्रेन पर से सुरक्षित निकाला गया।

मशीनों से होती है निगरानी : हर ट्रेन को ट्रेक पर चलाने से पहले उसकी मशीन से जांच की जाती है। इससे पता चल सके की किस जगह पर ट्रैक फ्रैक्चर होने की संभावना हो सकती है। वही कीमैन भी सतर्क रहते हैं।
मौसम की वजह से होता है ट्रैक फ्रैक्चर : रेलवे ट्रैक में फैक्चर होने की सबसे बड़ी वजह ठंड के मौसम काफी बढ़ जाती है क्योंकि ठंड़ के चलते ट्रैक के लोहे में सिकुड्न होने से दरार आ जाती है।
खंभा नं. 718 की घटना : की मैन भागवत प्रसाद ट्रैक की पेट्रोलिंग करते हुए भंवारटंक की ओर जा रहा था। ट्रेन बिलासपुर की ओर आ रही थी। भागवत प्रसाद की नजर अचानक रेलवे ट्रैक फैक्चर पर पड़़ी और उसने उत्कल एक्सप्रेस आते हुए देखा तो लगभग 150 मीटर की दूरी पर ट्रेन को रुकवाने लाल झंडा लगाया। इसके अलावा स्टेशन मास्टर को भी सूचित किया।

सूचना पर किया गया मरम्मत कार्य : सुबह 9.30 के आस-पास की मैन भागवत प्रसाद ने खोंगसरा के पास ट्रैक फ्रैक्चर देखा और इसकी सूचना अधिकारियों को दी। सूचना के बाद मौके पर ट्रैक का मरम्मत कार्य कर ट्रेन को बिलासपुर के लिए रवाना किया गया। सतत निगरानी होती है। इसी का परिणाम है कि बड़ा हादसा टल गया।
रश्मि गौतम, सीनियर डीसीएम, कॉर्डिनेटर