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यूपी से बंधक मजदूर छूटकर लौटे शहर 17 लाख रुपए में बेच आया था सरदार

प्रशासन से मदद नहीं मिलने पर सभी नाराज...

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बिलासपुर . उत्तरप्रदेश के बस्ती जिले में ईंट भट्टा में बंधक बनकर 3 माह तक काम करने के बाद जब मजदूरी छोडऩे का आश्वासन दिया तब जाकर मजदूर और उनके घर की महिलाओ और बच्चों को ठेकेदार ने रिहा किया। रेलवे स्टेशन पहुंचे मजदूरों ने बताया कि बिलासपुर श्रम विभाग और जांजगीर थाने में इसकी शिकायत की, पर अधिकारी मदद के लिए आगे नहीं आए। अपने प्रयास से उनके चंगुल से छुटकर आएं हैं।
जांजगीर चांपा जिले के 3 गांवो से 40 मजदूरों को ठेकेदार मनोज साहू और उसके ब्रोकर जयनंद खरे ने झांसा दिया के अगर वह इलाहाबाद के ईंट भट्टा में काम करेंगे तो हरएक व्यक्ति एक दिन की मजदूरी साढ़े पांच सौ रुपए मिलेगी। ज्यादा रकम कमाने के लालच में मजदूर अपने पूरे परिवार (महिलाएं और बच्चों) के साथ तीन माह पूर्व उत्तर प्रदेश बस्ती जिले के नवागांन स्थित ईंट भट्टा पर पहुंचे और काम करने लगे। बच्चों की तबीयत खराब हुई तो उपचार के लिए रुपए भी नहीं देने पर मजदूरों ने वापस जाने की धमकी दी तो पता चला ठेकेदार ने ईंट भट्टा संचालक से मजदूरों के बदले 17 लाख रुपए लिए हैं। संचालक ने कहा जब तक उसकी रकम वसूल नहीं हो जाती, तब तक वह उनसे काम कराता रहेगा। ईंट भट्टा से 20 दिन पहले मौका पाकर भागे कुछ मजदूरों ने बिलासपुर पहुंचकर श्रम विभाग और जांजगीर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उसके बाद भी प्रशासन और शासन स्तर पर कोई उनकी मदद के लिए कोई आगे नही आया। इसके बाद महिलाओं और बच्चों को लेने दोबारा ईंट भट्टा पर पहुंचे। लगातार काम कर पैसे का हिसाब किताब कर वापस नवतनवा एक्सप्रेस से लौट आए। ठेकेदार मनोज साहू और जयनाथ खरे का पता नहीं चल पाया है।

श्रम विभाग से लगाई कार्रवाई की गुहार - रोशन लाल सोनवानी ने बताया की मारपीट और गाली गलौच से परेशान हो कर वह ईंट भट्टा से भाग निकला था अन्य को बचाने वह बिलासपुर कलेक्टोरेट स्थित श्रम विभाग और जांजगीर में बंधक बनाए जाने की शिकायत दर्ज कराई थी इसके बाद भी शासन और प्रशासनिक स्तर पर कोई सहायता नही मिली। बीमार बच्चों और महिलाओं को लेने दोबारा ईंट भट्टा नवागांव पहुंचे और ईंटा भट्टा संचालक के हाथ पैर जोड़ मजदूरी न लेने की बात कही, तब जाकर सभी 40 लोगों को उन्होंने मुक्त किया। है। रोशनलाल ने बताया कि सरकार रोजगार योजना तो चलाती है, लेकिन रुपए न तो समय पर मिलते हंै और न ही पूरे। इनको उसको खिलाने के चलते आधे से भी कम मजदूरी हाथ आती थी।

महिलाओं से दुव्र्यवहार - बंधक बन कर रही रंजीता बंजारे, रेवती सोनवानी, ईश्वरी चेलकर ने बताया कि साढे तीन माह बंधक बनाकर काम कराया गया। ठेकेदार और उसके पंडे मारपीट करते थे। रुपयो के बदले गाली और और बच्चों की दवा के लिए हाथ फैलाने पर मारपीट की जाती थी। पेट भरने के लिए हजार, 12 सौ रुपये मिलते थे, जिसमें गुजर बसर करना मुश्किल हो रहा था।

बंधकों में 14 वर्षीय दिव्यांग भी - बंधक बनाएं गए 40 मजदूरों में एक 14 वर्षीय मानसिक रूप से दिव्याग किशोरी भी थी, जिसे ठेकेदार के पंडे जबरिया काम कराते थे। काम न करने पर मारपीट भी किया करते थे। नवानांव में ठेकेदार मनोज साहू और जय नाथ ? खरे ने जोरेला से 16 मजदूर, सरखोड़ बलौदा से 20 और पामगढ़ हिर्री से 4 मजदूर गए को लेकर गए थे, जिन्हे बंधक बनाकर कर रखा गया था।

40 हजार एडवांस देकर ले गए थे साथ - मजदूरों का कहना है की उन्हें ठेकेदार (सरदार) मनोज साहू और जयनाथ खरे ने झांसा दिया के उन्हें 1 हजार ईंटे बनाने के बदले 5 सौ रुपए मिलेंगे, साथ ही 40 हजार रुपए एडवांस के रूप में दिया था। अच्छी खासी रकम देख लालच में आ गये थे सभी लोग।

शिकायत देखने के बाद ही कुछ कह सकूंगी - शिकायत कब और कितने दिन पहले मिली है यह अभी जानकारी नहीं है, शिकायत मिली होगी तो संबंधित जिले के कलेक्टर को पत्राचार कर कार्रवाई करने का निवेदन विभाग करता है। श्रम विभाग सीधे वहां जाकर कार्रवाई तो नहीं कर सकता, जो प्रक्रिया है, उसी के तहत काम किया जाता है। कार्यालय में शिकायत देख कर ही बताया जा सकता है
अनिता गुप्ता, सहायक श्रम आयुक्त

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