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रेल अधिकारियों को 500 रुपए में अनलिमिटेड बिजली, देखें वीडियो

इनके बंगलों में 2 से लेकर 7 तक एसी व गीजर जैसे अत्याधिक विद्युत खपत वाले उपकरणों का उपयोग किया जाता है।

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Bilaspur railway

बिलासपुर . दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के जनरल मैनेजर से लेकर रेलवे के सभी अधिकारी महज 5 सौ रुपए देकर हजारों रुपए की बिजली का का उपयोग हर महीने कर रहे हैं। इससे अकेले बिलासपुर मंडल को ही बिजली के बिल के नाम पर हर महीने लाखों रुपए की चपत लग रही है। अधिकारियों के बंगलों में सीधे स्ट्रील लाइट के खंभों से कनेक्शन दिया गया है। इतना ही नहीं कई अधिकारी तो ऐसे हैं, जिन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद भी अपना हजारों रुपए का बकाया बिल नहीं चुकाया और अपना पीएफ वगैरह लेकर आराम का जीवन जी रहे हैं। रेलवे के सेवानिवृत्त लोको पायलट एके सिंह ने गुरुवार को मीडिया से चर्चा करते हुए पूरे दस्तावेजों के साथ इसका खुलासा किया। उन्होंने अधिकारियों के बंगलों में जलने वाली बिजली का खंभे से लिए गए बगैर मीटर के सीधे कनेक्शन का वीडिया और फोटो भी पत्रकारों को दिखाए। उन्होंने इसकी शिकायत सीबीआई से भी की, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई। स्थानीय कॉफी हाउस में उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि रेलवे द्वारा चार बिजली कंपनियों से अलग दर पर एक मुश्त बिजली खरीदी जाती है, जिसका उपयोग व गाड़ी परिचालन, कार्यालय, स्टेशन, आवास आदि में करता है। अधिकारियों के निवास में दिए गए बिजली कनेक्शन और हर महीने होने वाली खपत के एवज में 5 सौ रुपए महीना लिया जाता है, जबकि इनके बंगलों में 2 से लेकर 7 तक एसी व गीजर जैसे अत्याधिक विद्युत खपत वाले उपकरणों का उपयोग किया जाता है।

इनके आवासों पर लगे बिजली कनेक्शन के मीटरों की रीडिंग भी हर महीने नहीं ली जाती, जबकि कर्मचारियों के आवासों में होने वाली बिजली खपत को वहां लगे मीटरों से यूनिट के हिसाब से हर माह बिजली बिल लिया जाता है।
5 सौ रुपए में तीन हजार की बिजली : एके सिंह ने बताया कि जोन में ऐसे सवा पांच सौ अधिकारी हैं, उनमें से यदि साढ़े चार सौ से लेकर पौने पांच सौ अधिकारियों का ही हिसाब लगाया जाए तो हर महीने अगर इनकी बिजली खपत को देखकर 3000 रुपए के हिसाब से भी जोड़ा जाए तो रेलवे को हर महीने इनके द्वारा दिए जाने वाले 500 रुपए को काट कर करीब 12 लाख रुपए का नुकसान होता है। उन्होंने कहा सीपीआरओ डॉ. प्रकाश चंद त्रिपाठी के सरकार आवास के बाहर बगैर मीटर के सीधे खंभे से लिए गए बगैर मीटर के कनेक्शन को भी वीडिया के माध्यम से दिखाया। एके सिंह ने कहा कि अधिकारियों द्वारा रेलवे सम्पत्ति की मुफ्त खोरी अंग्रेजों के समय से आज भी चली आ रही है, यह हाल पूरे देशभर के रेलवे का है।

फर्जी आंकड़े दिखाकर धोखा : एके सिंह ने बताया कि बिलासपुर मण्डल स्थित सरकारी आवासों में 3 मार्च 2014 से 11 जुलाई 2016 तक का नान ट्रैक्शन खपत 32 लाख59 हजार 642 यूनिट रहा, जिसमें 28 लाख 91 हजार 925 रुपए की बकाया राशि को जानबूझ कर फर्जी आंकड़े बनाकर सिस्टम में दर्शाया गया है। जबकि दूसरी तरफ यही आंकड़ा साढ़े छह करोड़ रुपए का है और इन दोनों से हकीकत काफी अलग है। इसके लिए रेलवे ने कुछ कर्मचारियों के नाम पर फर्जी एडवांस जमा भी दिखा दिया। इनका उद्देश्य यह है कि फर्जी जमा दिखा देने से कम्प्यूटर द्वारा बकाया राशि 28 लाख 91 हजार 925 रुपए दिखाने से इस ओर किसी का ध्यान नहीं जाएगा और यह बिजली चोरी कायह खेल बदस्तूर जारी रहेगा।
रकम अधिकारियों के वेतन से काटा जाता है : रेलवे में कार्यरत सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के बंगले में मीटर लगे हैं। सभी के बंगलों की मीटर रीडिंग ली जाती है। अधिकारियों से हर महीने एक मुश्त रकम उनके वेतन से काट कर तीन महीने में उनके द्वारा की गई खपत का एवरेज बिल निकालकर उनसे बिल वसूला जाता है।
संतोष कुमार, पीआरओ दपूमरे बिलासपुर