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पति की लंबी आयु के लिए महिलाएं रखेंगी व्रत, शृंगार कर शिव-पार्वती की करेंगी पूजा

करवा चौथ की तैयारी के लिए महिलाएं पहुंची। हेयर कटिंग, फेशियल, मेहंदी लगवाने के लिए पहुंचती रही।
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बिलासपुर

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Anil Kumar Srivas

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Updated: 8 Oct 2017, 12:43 PM IST

Karwa chouth

बिलासपुर. करवा चौथ का व्रत रविवार को बड़े श्रद्धाभाव से सुहागिन महिलाएं अपने पति के लंबी आयु के लिए करेंगी। पूरे दिन भूखे-प्यासे रहकर शिव-पार्वती व गणपति का स्मरण करते हुए अपने पति के लिए प्रार्थना करेंगी। शाम होते ही सोलह शृंगार कर सुहाग की चुनरी ओढ़कर कथा श्रवण करते हुए पूजा करेंगी। शनिवार की शाम बाजार में करवा व पूजन सामग्री खरीदारी करते लोग रात तक नजर आए। महिलाएं सुहाग की सामग्री के साथ नए कपड़े भी खरीदने पहुंची। करवा चौथ का व्रत हर सुहागिन महिला के लिए खास होता है। रविवार को करवा चौथ का व्रत करते हुए महिलाएं सुबह से शाम तक भक्ति में लीन होंगी। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद डॉ.उद्धव श्याम केसरी ने बताया कि करवा चौथ का व्रत अखंड सौभाग्य का व्रत माना गया है। इसलिए इस व्रत को करने की परंपरा चली आ रही है। शनिवार को पूरे दिन बाजार में रौनक रही। महिलाएं व्रत के लिए करवा, शृंगार की सामग्री व साड़ी की खरीदारी करते रही। साथ ही सरगी के लिए सूखे मेवे की खरीदारी भी खूब की गई। श्रीराम क्लाथ मार्केट, सदर बाजार, गोलबाजार, कंवरराम बाजार, बुधवारी बाजार सहित प्रमुख बाजारों में रौनक रही। वहीं ब्यूटी पार्लरों में भी करवा चौथ की तैयारी के लिए महिलाएं पहुंची। हेयर कटिंग, फेशियल, मेहंदी लगवाने के लिए पहुंचती रही।

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महाभारत मे कथा का वर्णन, द्रौपदी ने भी रखा करवा चौथ का व्रत : इस व्रत का महत्व महाभारत की कथा में चर्चित है। नीलगिरि पर्वत पर अर्जुन के तपस्या के लिए चले जाने पर द्रौपदी ने श्रीकृष्ण का स्मरण कर हर प्रकार के अरिष्ट निवारण का उपाय पूछा। श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कहा एक बार पार्वती ने एेसे प्रश्न शिवजी से पूछा तब भगवान शंकर ने पार्वती के प्रश्नों का निवारण करते हुए कहा कार्तिक कृष्ण करवा चतुर्थी का व्रत गृहस्थ में आने वाले सभी विघ्नों का निवारण करता है। इस व्रत में इंद्रप्रस्थ नगरी के वेद शर्मा नामक ब्राह्मण की कथा चर्चित है। वेद शर्मा के साथ पुत्र व एक पुत्री थी। सातों भाई अपनी बहन वीरावती से स्नहे रखते थे। वीरावती का विवाह सुदर्शन नाम के ब्राह्मण से हुआ। कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी को अपने भाभियों के साथ करवा चतुर्थी का व्रत किया। लेकिन सारे दिन निर्जला रहकर वह भूख से व्यथित हो गई। बहन के दुख से दुखित भाई चंद्रोदय के पूर्व ही घर से दूर आग जलाकर कपड़े से चंद्रमा की आकृति बनाकर चंद्रोदय होने की बात कही। भाइयों के विश्वास में आकर वीरावती चंद्रोदय का पूजन कर भोजन कर लेती है। वीरावती का व्रत खंडित हो गया। जिससे उनके पति बीमार हो गएा। तब पति के स्वास्थ्य की कामना से पृथ्वी पर आयी इंद्राणी से आदेश से विधिपूर्वक करवा चौथ का व्रत किया। जिससे उनके पति स्वस्थ्य हो गएा। द्रौपदी ने भी यह कथा सुनकर करवा चौथ का व्रत किया।

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खाएंगी सरगी : करवा चौथ के पर्व में सभी की अलग-अलग परंपरा होती है। पंजाबी समाज की महिलाएं इस व्रत को सरगी खाकर करती है। पंजाबी समाज की नमिता ऋषि ने बताया कि करवा चौथ का व्रत सासू मां द्वारा दी गई सरगी ग्रहण कर की जाती है। नई-नवेली दुल्हनों के लिए यह व्रत सबसे महत्वपूर्ण होता है। साथ ही सुहागिन महिलाएं इस व्रत को बड़े श्रद्धाभाव से करती है।
8.52 बजे चंद्रोदय : संत जलाराम मंदिर के पुजारी पंडित ब्रह्मदत्त मिश्रा ने बताया कि रविवार की रात्रि में रात 8 बजकर 52 बजे चंद्रोदय होगा। चंद्र दर्शन के बाद महिलाएं अघ्र्य देंगी चंद्रमा को इसके बाद अपने पति को छलनी से देखकर उनकी आरती करेंगी। इसके बाद व्रत पूर्ण होगा व व्रत का पारण करेंगी।
सुहाग की सामग्री की हुई खरीदारी : करवा चौथ का व्रत सुहाग की कामना का व्रत होता है। जिसके चलते शनिवार को सुहाग की सामग्री की खरीदारी के लिए लोग पहुंचे। व्यापार ज्ञान आडवानी ने बताया कि १६ शृंगार की सामग्री में काजल, बिंदी, मेहंदी, माहोर, नेल पेंट, कुमकुम, मंगलसूत्र सहित सभी शृंगार सामग्री खरीदी गई। इसके साथ ही शृंगार के लिए चूड़ी, बिंदी व अन्य सामग्री की खरीदारी महिलाओं ने की।
करवा की रही अधिक डिमांड : करवा चौथ व्रत में पूजन के लिए खास तौर पर करवा महत्वपूर्ण होता है। इसलिए शनिचरी, कंपनी गार्डन, सरकण्डा, नेहरू नगर सहित अलग-अलग क्षेत्रों में करवा की दुकाने सजी रही। जहां लोगों ने अपने पसंद के मुताबिक खरीदारी की। महिलाओं की पसंद डिजाइनर व रंग-बिरंग के करवे रहे।

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