
अंतराष्ट्रीय बाल दिवस: बच्चों को साक्षर बनाने से लेकर और प्रतिभाओं को निखारने आगे आई महिलाएं, जानिए उनका ये प्रयास
बिलासपुर। CG News: देशभर में 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है, लेकिन विश्व बाल दिवस 20 नवंबर को मनाया जाता है। दुनिया भर में इस दिन को बच्चों के अधिकार के प्रचार प्रसार को समर्पित किया गया है। जिसमें सबसे प्रमुख जीवन जीने का अधिकार, संरक्षण का अधिकार, सहभागिता का अधिकार और विकास का अधिकार माने गए हैं।
बिलासपुर की महिलाएं बाल अधिकार और बच्चों को शिक्षित बनाने और उनके अधिकार के प्रति जागरूक करने के काम में जुटी हुई हैं। राष्ट्रीय युवा पुरुस्कार से सम्मानित अंकिता पांडेय बच्चों को गुड टच बैड टच के बारे में जागरूक करने का काम कर रही है। इसी तरह बिलासपुर की पलक जायसवाल अपने एनजीओ के माध्यम से बच्चों को कुपोषण दूर करने और खेल कूद के माध्यम से शारीरिक मजबूत बनाने का काम कर रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाल दिवस के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़ स्कूल में बाल अधिकार जागरुकता अभियान चलाया जाएगा, जहां बच्चों को उनके अधिकार के बारे में जानकारी दी जाएगी।
पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को साक्षर बनाने की पहल
बिलासपुर की हनी गुप्ता ने देखा कि स्लम एरिया के बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं, जिसके चलते वे ता उम्र रोजी मजदूरी करने को मजबूर होते हैं। अपने रिसर्च के दौरान उन्होंने पाया कि स्लम क्षेत्र में रहने वाले अधितर बच्चे 5वीं तक ही स्कूल जा पाते हैं जिनकी शिक्षा पर काम करते हुए हनी ने अब तक 2 हजार से अधिक बच्चों को शिक्षित कर चुकी हैं। साथ ही इऩ्हें फ्री कोचिंग की सुविधा भी दे रही हैं ताकि उनका एडमिशन अच्चे स्कूल और कॉलेज में हो सके।
1954 अंतर्राष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस की स्थापना की गयी थी। इस दिवस की परिकल्पना वि. के. कृष्णा मेनन ने दी थी। इसे मनाने का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता, बच्चों के प्रति जागरुकता और बच्चों के कल्याण को बढ़ावा देना है। ऐसे में 20 नवंबर को एक महत्वूपर्ण दिन के तौर पर मनाया जाता है। दरअसल 1959 में 20 नवंबर ही के दिन संयुक्त राष्ट्र की जनरल असंबली ने बाल अधिकारों की घोषणा की थी। वहीं यह दिन और भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि 1989 में इसी दिन संयुक्त राष्ट्र ने बाल अधिकारों पर हुए सम्मेलन के सुझावों को अपना लिया था।
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कौशिकी योजना से जुड़ीं हजारों बालिकाएं
शैक्षणिक जागरुकता के साथ साथ शारीरिक जागरुकता भी बच्चों के लिए एक जरूरी मुद्दा है। पलक अपने एनजीओ के माध्यम से बालिकाओं को सेल्फ डिफेन्स की ट्रेनिंग दे रही हैं। कौशिकी योजना के तहत बालिकाओं को सेल्फ डिफेन्स की ट्रेनिंग देती है। इस मुहीम से अब तक 80 हजार से अधिक बालिकाएं जुड़ कर सेल्फ डिफेन्स की ट्रेनिंग ले चुकी हैं।
Published on:
20 Nov 2023 01:42 pm

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