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वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे: कॅम्प्यूटर, मोबाइल का बढ़ता उपयोग व मानसिक नाव से ग्रस्त हो रहे ब्रेन ट्यूमर के शिकार

- सिम्स, अपोलो समेत शहर के अन्य अस्पतालों में महीने में औसतन 30 नए मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे- पत्रिका ने डे स्पेशन पर चलाया जागरुकता अभियान, लोगों ने मोबाइल का उपायोग कम कर, मेडिटेशन का दिनचर्या में ढालने लिया संकल्प

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World Brain Tumor Day: Increasing use of computer, mobile and victims

वल्र्ड ब्रेन ट्यूमर डे: कॅम्प्यूटर, मोबाइल का बढ़ता उपयोग व मानसिक नाव से ग्रस्त हो रहे ब्रेन ट्यूमर के शिकार

बिलासपुर.भागमभाग भरे इस दौर में मोबाइल के अधिकतम उपयोग व मानसिक तनाव से ग्रस्त लोगों को ब्रेन संबंधी बीमारी का खतरा तेजी बढ़ रहा है। यही वजह है कि सिम्स, अपोलो समेत शहर के अन्य अस्पतालों में हर माह ब्रेन ट्यूमर के 30 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक लोगों में यह बीमारी मुख्य रूप से टीवी, कॅम्प्यूटर व मोबाइल के रेडिएशन से बढ़ रही है। इसके अलावा स्ट्रेस भी एक बड़ा कारण है। लिहाजा रेडिएशन वाले साधनों व टेंसन से दूर रह इस बीमारी से बचा जा सकता है। इसे लेकर पत्रिका टीम ने लोगों को जागरूक करने वल्र्ड ब्रेन ट्यूमर डे पर अभियान चलाया। इससे जुड़ शहरवासियों ने मोबाइल का उपयोग कम कर दिन में कम से कम कुछ पल के लिए ही सही मेडिटेशन करने का संकल्प लिया।
एक दशक पहले तक शहर के अस्पतालों में जहां ब्रेन ट्यूमर के यदा-कदा मरीज ही पहुंचते थे, अब स्थित धीरे-धीरे भयावह होती जा रही है। इसका मुख्य कारण रेडिएशन का कुप्रभाव तो है ही, मानसिक तनाव भी है। जिसके चलते लोग इस घात बीमारी से पीडि़त हो रहे हैं। यही वजह है कि वर्तमान में सिम्स, अपोलो समेत जिले के अन्य निजी अस्पतालों में महीने में औसतन 30 नए मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। बढ़ती बीमारी को देखते हुए पत्रिका ने वल्र्ड ब्रेन ट्यूमर डे पर जागरुकता अभियान चलाया। लोगों को बताया गया कि कॅप्यूटर, मोबाइल का सीमित उपयोग करें, साथ ही स्टे्रस कम करने मेडिटेशन को अपनाएं। इसे लेकर शहरवासियों ने जीवनशैली सुधारने का संकल्प लिया।

Sharad Tripathi IMAGE CREDIT: patrika

0 इस बीमारी के ये हो सकते हैं लक्षण
डॉक्टरों के मुताबिक इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में लगातार सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी होना, आंख की रोशनी कम होना शामिल है। इसे अनदेखी न कर जांच कराने से प्रारंभिक स्टेज में पूरी तरह बीमारी को ठीक किया जा सकता है। डाक्टरों के अनुसार ये ट्यूमर दो प्रकार के होते हैं। पहला बेनाइन ट्यूमर दूसरा कैंसर युक्त ट्यूमर। इसमें बेनाइन ट्यूमर का पूरी तरह इलाज संभव है। जबकि कैंसर वाले ट्यूमर को भी प्रारंभिक स्तर पर पूरी तरह इलाज किया जा सकता है।

0 तनाव भी एक बड़ा कारण
डॉक्टरों के अनुसार ब्रेन ट्यूमर होने की वजहों में जेनेटिक कारण के साथ ही तनाव भी एक बड़ा कारण है। जेनेटिक को रोक पाना मुश्किल है, लेकिन तनाव को मेडिटेशन के माध्यम से रोका जा सकता है।

Sharad Tripathi IMAGE CREDIT: patrika

सीधी बात...
डॉ.राजकुमार, न्यूरो सर्जन, अपोलो हॉस्पिटल
सवाल- ब्रेन ट्यूमर का मुख्य कारण क्या है?
जवाब- इसके कई कारण हो सहते हैं। इसमें जेनेटिक के साथ ही रेडिएशन व स्टे्रस का मस्तिस्क पर प्रभाव मुख्य है।
सवाल- किस प्रकार का रेडिएशन सबसे ज्यादा मस्तिस्क को प्रभावित करता है?
जवाब- वर्तमान में सबसे ज्यादा रेडिएशन मोबाइल का लोगों के मस्तिस्क पर कुप्रभाव डाल रहा है। अभी के हालात में मोबाइल से तो दूर नहीं रहा जा सकता, पर कोशिश करना चाहिए कि इसका कम ये कम इस्तेमाल हो।
सवाल- इस बीमारी से बचने मेडिटेशन कितना कारगर है?
जवाब- स्टे्रस कम करने मेडिटेशन बेहतरीन उपाय है। इसे निसमित रूप से अपना कर भी काफी हद तक इस बीमारी से बचा जा सकता है।
सवाल- यह लाइलाज है या इसका इलाज संभव है?
जवाब- ट्यूमर मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं, इसमें बेनाइन च कैंसर ट्यूमर शामिल हैं। बेनाइन ट्यूमर का पूरी तरह सफलतम इलाज है। कैंसर ट्यूमर का भी इलाज है, पर इसके लिए अर्ली डायग्रोसिस जरूरी है।

0 योग के माध्यम से ब्रेन संबंधी बीमारी से बचने किया अभ्यास
वल्र्ड ब्रेन ट्यूमर डे पर पत्रिका द्वारा आयोजित अवेयरनेस कार्यक्रम से पूज्य सिंधी पंचायत और निशुल्क योग केंद्र भी जुड़े। देवरीखुर्द सामुदायिक भवन में ब्रेन ट्यूमर की बीमारी से बचने के लिए योग अभ्यास कराया गया। इस दौरान योगाचार्य विवेक ने बताया कि हम अपने लिए सही खाने, समय पर नींद और स्ट्रेस मैनेजमेंट का रास्ता बनाएं तो आजीवन किसी भी तरह की समस्या से दूर रह सकते हैं। इस अवसर पर लोगों ने ब्रेन ट्यूमर या अन्य किसी भी प्रकार के ट्यूमर न हों इसके लिए इंटीग्रेटेड योग का अभ्यास किया। शहरवासियों ने पत्रिका के इस इस पहल की जमकर सराहना की।
0 बड़ी संख्या में जुड़े शहरवासी
बिलासपुर पत्रिका द्वारा आयोजित जागरुकता कार्यक्रम में बलवान सिंह, जयंतीलाल,विलास उपासनी ,डॉ.आरके बनर्जी, यशवंत सिंह राजपूत, वासुदेव लिव कांटे, जाली दत्ता ,अंकुर दत्ता, अनीता देवानी, सुनीता भगवानी, पायल चंदानी ,काजल भागवाणी, इंद्रजीत सिंह सोहेल, लक्ष्मी नारायण साहू ,विजय शंकर सिंह प्रबल राय, मोहित लाल बुनकर ,रमेश मेघानी, भागवत गोस्वामी ,आनंद देसर राकेश वर्मा सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल थे।