COPD: इस कारण से होती है सीने में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ

COPD: इस कारण से होती है सीने में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ

Vikas Gupta | Updated: 04 Jul 2019, 05:04:12 PM (IST) तन-मन

सीओपीडी (COPD) यानी क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसऑर्डर (Chronic obstructive pulmonary disorder) फेफड़ों में जकड़न की समस्या है।अगर किसी व्यक्ति को कफ या बलगम की पुरानी समस्या है और बलगम लगातार व देर तक बना रहता है तो रोग की आशंका रहती है। इलाज के बावजूद निदान न हो तो डॉक्टर से सलाह लें। जानें इसके बारे में-

सीओपीडी (COPD) यानी क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसऑर्डर (Chronic obstructive pulmonary disorder) फेफड़ों में जकड़न की समस्या है। जानें इसके बारे में-

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सीओपीडी क्या है और किस वजह से होता है ?
सीओपीडी ऐसी अवस्था है, जिसमें मरीज को लगातार लगता है कि वह सांस नहीं ले पा रहा या सांस लेने में दिक्कत हो रही है। आमतौर पर फेफड़ों की बीमारियां जैसे अस्थमा, गंभीर अस्थमा, क्रॉनिक ब्रॉन्काइटिस आदि को इसके जरिए पहचाना जाता है। स्मोकिंग सीओपीडी की सबसे बड़ी वजह है। धुएं में मौजूद रसायनों के असर व वातावरण में फैली धूल से भी यह रोग हो सकता है।

सीओपीडी के रोगी को कैसे पहचानें ?
अगर किसी व्यक्ति को कफ या बलगम की पुरानी समस्या है और बलगम लगातार व देर तक बना रहता है तो रोग की आशंका रहती है। इलाज के बावजूद निदान न हो तो डॉक्टर से सलाह लें। आमतौर पर इस स्थिति में मरीज को गले में लगातार खराश, सांस लेने में दिक्कत और सीने में जकड़न महसूस होती है।अगर किसी व्यक्ति को कफ या बलगम की पुरानी समस्या है और बलगम लगातार व देर तक बना रहता है तो रोग की आशंका रहती है। इलाज के बावजूद निदान न हो तो डॉक्टर से सलाह लें।

इसके रोगी को किन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है?
जिन लोगों के हृदय का आकार जन्मजात ही थोड़ा बड़ा है और जिन्हें हाई ब्लडप्रेशर की समस्या है, उन्हें आसानी से कफ , फ्लू या निमोनिया हो सकता है। इसके चलते फेफड़ों की कार्यक्षमता पर असर पड़ता है व दिनचर्या के कामों में भी दिक्कत आती है।

सीओपीडी का इलाज क्या है व क्या सावधानी बरतें?
कुछ ऐसी दवाएं उपलब्ध हैं, जो फेफड़ों में हवा के आने-जाने के रास्तों को खोलने में मदद करती हैं और इसमें सूजन या जलन को कम करती हैं। सांस न ले पाने की स्थिति में ऑक्सीजन थैरेपी कारगर है। इसके मरीजों को स्मोकिंग से परहेज करना चाहिए। इसके अलावा धूल, धुएं, धुंध से दूर रहने की कोशिश करें। डॉक्टरी सलाह से नियमित दवाएं लें। फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाए रखने के लिए रुटीन में कुछ देर वॉक और सामान्य व हल्की-फुल्के व्यायाम को शामिल करें।

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