
Celebrate Hindu New Year
नवसंवत्सर के आगमन पर मंगलवार को शहरवासियों ने पलक पावड़े बिछा दिए। शहरभर में नूतन वर्ष के पहले दिन खुशियां बिखर गईं। कहीं मंगल आरती हुईं तो कहीं शोभायात्राएं निकाली गई। शोभायात्राओं का जगह-जगह फूलों से भव्य स्वागत किया गया। लोगों ने एक-दूसरे को भारतीय नूतन वर्ष की शुभकामनाएं दी। इस मौके पर भारत की सभ्यता और संस्कृति साकार हो उठी। लोगों ने एक-दूसरे को टीका लगाकर शुभकामनाएं दी।
नववर्ष उत्सव आयोजन समिति स्टेशन क्षेत्र की ओर से विवेकानंद पार्क, हाट रोड, बालाजी मंदिर से शोभायात्रा निकाली गई। इसमें सबसे आगे घोड़े पर राणा प्रताप व शिवाजी का रूप धर व्यक्ति सवार थे। पीछे एनसीसी बैंड, भारत माता, अयोध्या के राममंदिर की झांकी थी। शोभायात्रा में संत सनातन पुरी व हेमा सरस्वती भी थीं। इनके पीछे भगवा रैली में काफी संख्या में महिला व पुरुष चल रहे थे। सरंक्षक लव शर्मा ने बताया कि शोभायात्रा रंगपुर पुलिया से होते हुए वापस पार्क पहुंची। शोभायात्रा का कई जगह फूलों से स्वागत किया।
उधर, बजरंगदल व विहिप की ओर से दीनदयाल उपाध्याय नगर से रैली निकाली। इसमें 11 घोड़ी, बैंड, भारत माता की झांकी साथ थी। महिलाएं कलश लिए चल रही थीं। रैली अनंतपुरा स्थित हनुमान मंदिर पर सम्पन्न हुई। यहां शिव का जलाभिषेक किया गया। रात को भगवती जागरण हुआ।
दिखाए हैरतअंगेज करतब
नव वर्ष उत्सव आयोजन समिति पटरी पार के तत्वावधान में रैली निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। बारह अखाडों के अखाड़ेबाजों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए। रैली को पुरोहित नगर से भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेशमंत्री मुकुट नागर ने पूजा-अर्चना कर रवाना किया। रैली शिवाजी कॉलोनी होती हुआ लक्ष्मी विहार, रामदास नगर, कालातालाब, रंगतालाब, श्रीराम नगर, चंद्रसेल रोड होती हुई गांधी कॉलोनी लोको राम मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई।
आरएसएस ने दिखाई शक्ति
दण्ड द्वारा आरएसएस के स्वयंसेवकों ने वीरता और साहस का परिचय दिया। कार्यकर्ताओं ने सबसे पहले भगवा ध्वज को प्रणाम किया। इसके बाद दण्ड से सिर पर प्रहार व एक से अधिक शत्रु होने पर चारों दिशाओं में ध्यान रखते हुए साहस का प्रदर्शन किया। वहीं योगासन व सूर्य नमस्कार भी किया गया।
लघु उद्योग भारती ने मनाया नव वर्ष
लघु उद्योग भारती कोटा ने नववर्ष की पूर्व संध्या पर उत्सव मनाया। इसमें मुख्य वक्ता राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रश गुप्ता ने कहा कि सारी परिस्थितियां विपरीत होते हुए भी न भारत का ज्ञान लुप्त हो सका और न कौशल मिट सका। अब भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है।

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