बुलंदशहर हिंसा: एक वर्ष बाद भी इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या में इस्तेमाल हथियार को पुलिस नहीं कर सकी बरामद

  • एक साल पहले कथित गोवंश का अंग मिलने से भड़की थी हिंसा (Bulandshahar Violence)
  • हिंसा में एक युवक और इंस्पेक्टर सुबोध कुमार (Inspector Suboth kumar) की हुई थी हत्या

By: Iftekhar

Published: 03 Dec 2019, 02:36 PM IST

 

बुलंदशहर. 3 दिसंबर यानी आज स्याना हिंसा के एक साल पूरे गए, लेकिन घटना के एक साल बीच जाने के बाद भी पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार बरामद नहीं कर सकी है। वहीं, इस मामले के मास्टरमाइंट माने जा रहे बजरंग दल का नेता योगेश समेत सभी 44 आरोपी जमानत पर कोर्ट से रिहा हो चुके हैं। वहीं, इस घटना में पुलिस की गोली से मारे गए एक उपद्रवी सुमित को गांव के लोग शहीद का दर्जा देने की मांग करने के साथ ही गांव में उसकी प्रतिमा भी लगा चुके हैं। गौरतलब है कि जिस वक्त सुमित की मौत हुई थी, तब उसे परिजनों ने निर्दोष बताया था। इसके बाद सरकार की ओर से मुआवजे का ऐलान भी कर दिया गया था, लेकिन, जब उसकी पत्थर लिए हुए फोटो वायरल हुई तो उसके परिजनों की मदद रोक दी गई थी।

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गौरतलब है कि पिछले वर्ष 3 दिसंबर को जब बुलंदशहर के अकबरपुर में मुसलमानों के तब्लीगी जमात का आलिमी इज्तेमा चल रहा था। उसी वक्त बुलंदशहर की स्याना इलाके के चिंगरावटी गांव में कथित रूप से गोकशी और गोवंश के अंग मिलने पर हिंसा भड़क उठी। जहां गोवंश कटे हुए मिलने की बात कही गई थी। उस गांव का नाम महाव है। महाव के लोग गोवंश मिलने के बाद इतना उत्तेजित हो गए कि गांव से 4 किलोमीटर दूर चिंगरावटी चौकी पर वह गोवंश ट्रैक्टर में भरकर लाकर रख दिए गए। गोवंश रखने के बाद देखते ही देखते दोनों तरफ का रोड जाम हो गया। यह सब उस वक्त हो रहा था, जब मुसलमानों के तब्लीगी जमात का वैश्विक इज्तेमा समाप्ति की ओर था और बड़े स्तर पर लोग बाहर निकल रहे थे।

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इस दौरान चिंगरावटी चौकी पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कुछ लोग उस भीड़ में खड़े हुए दिखाइ दिए। इसके बाद देखते ही देखते पुलिस और भीड़ के बीच नोकझोंक शुरू हो गई थी। घंटों के जाम से निजात पाने के लिए इलाके के इंस्पेक्टर सुबोध कुमार लोगों से अनुरोध कर रहे थे। हालांकि, विश्व हिंदू परिषद और बजरंगदल के नेताओं ने अपनी सफाई में कहा था कि वे उस वक्त स्याना कोतवाली में FIR लिखवाने के लिए गए थे। उसी बीच चिंगरावटी चौकी और पुलिस प्रशासन पर पथराव शुरू कर दिया गया था। पथराव कर रहे भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस पार्टी को फायरिंग करनी पड़ी, जिससे चिंगरावटी गांव के नवयुवक सुमित कुमार
की मौत हो गई। इसी बीच तत्कालीन स्याना इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को घेरकर उनको गोली मार कर हत्या कर दी गई।

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यह खबर मीडिया में सुर्खिया बनीं तो आनन-फानन में 27 लोगों को हिंसा के मामले में नामजद किया गया। वहीं, 50 से 60 लोगों अज्ञातों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। इसके साथ ही पुलिस ने अपना बचाव करते हुए गोवंश की हत्या के आरोप में 7 लोगों को नामजद कर दिया। मगर पुलिस की तरफ से गोवंश की हत्या के मामले में नामजद किए गए लोगों के बारे में तीसरे दिन ही साफ हो गया कि पहले दिन गोहत्या में गिरफ्तार किए गए चार लोग गलत तरीके से शामिल किए गए थे। बाद में उनको जेल से रिहा कर दिया गया और घटनाक्रम के 10 से 12 दिन बाद गोवंश की हत्या में और दूसरे नाम शामिल किए गए।

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इसके बाद हिंसा में शामिल लोगों की धड़पकड़ तेज की गई । हिंसा का वीडियो आने के बाद पुलिस ने लोगों की पहचानकर कर उनकी गिरफ्तारियां की। इस दौरान इंस्पेक्टर की हत्या में शामिल होने के आरोप में अलग-अलग कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, इस बीच बुलंदशहर पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या में मुख्य आरोपी को लेकर पलटती रही। सबसे पहले इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या का मुख्य आरोपी बजरंग दल के नेता योगेश राज को बताया गया। इसके बाद जीतू फौजी को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद बुलंदशहर पुलिस गिरफ्तारी और अपने इकबालिया बयान से पलट गई और बताया गया कि कलुआ ने सुबोध कुमार की हत्या की है और हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी भी बरामद कर ली गई। इस मामले में 44 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से 40 लोग जमानत पर हैं। जमानत पर आए ज्यादातर लोगों में वीएचपी और हिंदूवादी संगठनों से जुड़े हुए नवयुवक हैं। जीतू फौजी के वकील बताते हैं कि पूरे प्रकरण में न्यायिक जांच होनी चाहिए थी। उनकी बातों से लगता है कि वह पुलिसिया जांच से संतुष्ट नहीं है। दूसरी ओर इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या के बाद उनका परिवार कई बार मीडिया के सामने आया और उन्होंने जांच और आरोपियों की रिहाई पर भी सवाल उठाए। हालांकि जब आरोपियों की रिहाई हुई तो पहली बार जय श्रीराम के नारे भी लगे। इनमें वो लोग शामिल थे, जो हिंदूवादी संगठनों से जुड़े हुए हैं।

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पूरे घटनाक्रम में एक सवाल खड़ा होता है कि स्याना हिंसा को पूरा एक साल होने को आया और अभी तक भी बुलंदशहर पुलिस और मामले की जांच में लगी एसआईटी इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की पिस्टल बरामद नहीं कर पाई है। इसके अलावा ऐसी ही कई और गुत्थियों का पर्दाफाश होना भी बाकी है। आखिर हिंसा में चिंगरावटी इलाके के रहने वाले छात्र सुमित कुमार की मौत कैसे हुई। इसको लेकर गांव के लोगों का कहना है कि पूरे मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए, क्योंकि उनके गांव में कभी ऐसी हिंसा नहीं हुई। उनका गांव बेहद ही शांतिपूर्ण रहा है। हालांकि, सुमित के पिता ने भी गृह मंत्री को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने अपनी आपबीती बताई है। अब देखना है कि पूरे मामले में राज्य सरकार का रुख क्या होगा । इस मामल के एक साल बीतने के बाद एसआईटी और बुलंदशहर पुलिस की चार्ज सीट में आरोपियों पर लगाए गए आरोप साबित नहीं कर पाए हैं, जिस की एक वजह है कि आरोपियों को आसानी से जमानत मिल गई। योगेश के वकील ब्रज भूषण दूबे ने बताया कि योगेश राज की जमानत हो गई है और एक्टर सुमित कुमार की पत्नी ने हाईकोर्ट के बाद अब योगेश राज की जमानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

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