
बुलंदशहर. देशभर में दशहरा (dussehra 2019) के दिन रावण के पुतले का दहन किया जा चुका है। यूपी के गौतमबुद्ध नगर जनपद का बिसरख गांव में न रामलीला का मंचन होता है और न ही रावण के पुतले का दहन। गौतमबुद्ध नगर से सटे सिकंदराबाद कस्बे में रावण का पुतला चौदस के दिन दहन किया जाता है।
पुराणों के अनुसार, विजयदशवी के दिन राम ने रावण का वध किया था। बताया जाता है कि रावण के मौत के पश्चात पत्नी मंदोदरी उसके शव को लेकर मेरठ जा रही थी। मेरठ में मंदोदरी का मायका था। मंदोदरी के पिता मृत व्यक्ति को जीवत करने की दवा जानते थे। लेकिन मंदोदरी लंका से लौटते वक्त मेरठ का रास्ता भटक गई और सिकंदराबाद के किशन तालाब पहुंच गई। यहां चौदस के दिन रावण के पुतले का दहन किया गया था।
जब उसे पूरी तरह यकीन हो गया था कि रावण का वध हो चुका है। उसके बाद रावण का दहन किया गया। यहां आज भी एक शिवमंदिर है। मंदिर के पुजारी धनश्याम झा ने बताया कि रास्ता भटकने के बाद मंदोदरी यहां पहुंची थी। मंदोदरी ने 4 दिन तक घोर तपस्या की थी। उसके बाद रावण जिंदा नहीं हुआ तो विजयदशवी के चार दिन बाद मंदोदरी नेे रामायण का अंतिम संस्कार कर दिया। तभी से दशहरेे के 4 दिन बाद रावण का दहन होता है।
Updated on:
11 Oct 2019 01:03 pm
Published on:
11 Oct 2019 01:02 pm

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