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राष्ट्रीय पक्षी पर संकट टालने आई मोर चालीसा

मोर चालीसा 32 पेजों की बनाई जा रही है, इसमें 16 पेजों पर दोहे लिखकर मोर का महत्व बताया गया है

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Shakti Singh

Mar 09, 2015

बूंदी।
राष्ट्रीय पक्षी को बचाने के लिए अब मोर चालीसा तैयार हो रही है। मोर के शिकार की
बढ़ती वारदातों को रोकने और जनजागृति के लिए बूंदी के वन विभाग ने यह प्रयास किया
है। चालीसा में मोर के महत्व को बताया जाएगा, जिससे लोग इसे बचाने में आगे आएं।
इसके मुद्रण का काम जयपुर में हो रहा है।

इसकी रचना भी जयपुर के नवल डागा
ने की है। डागा लम्बे समय से पर्यावरण, जल व वन्यजीवों को बचाने की दिशा में कर रहे
हैं। वे जल व पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी चालीसा बना चुके हैं। स्थानीय वन्यजीव
प्रेमियों के सहयोग से वन विभाग ने मोरों को बचाने के लिए अभियान छेड़ रखा है। इसके
तहत वन्यजीव प्रेमी जाति विशेष की बस्तियों में जाकर मोरों को नहीं मारने और मारने
वालों को रोकने के लिए जागरूक कर रहे हैं।

विभाग ने इसी मुहिम के दौरान मोर
चालीसा बनवाने का निर्णय किया। वन्यजीव प्रेमी पृथ्वीसिंह राजावत ने बताया कि मोर
चालीसा की स्वीकृति मिलने के बाद इसे छपवाकर वितरित करवाया जाएगा। गौरतलब है कि
बूंदी जिले में मोर के अत्यधिक शिकार की घटनाएं सामने आई हैं। इनमें भी बूंदी जिले
के नैनवां उपखण्ड में मोरों के शिकार को लेकर स्थिति चिंताजनक है।

चालीसा
में 32 पेज,16 दोहे

कोटा स्थित मुख्य वन संरक्षक अनिल कपूर का कहना है कि मोर
चालीसा 32 पेजों की बनाई जा रही है। इसमें 16 पेजों पर दोहे लिखकर मोर का महत्व
बताया गया है। शेष 16 पेजों पर मोर के विभिन्न चित्र हैं। जयपुर से मोर चालीसा की
एक प्रति बूंदी भेजी गई है। यह मोरों को बचाने का प्रयास है।



अभिषेक ओझा

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