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विदेशी पक्षियों से आबाद हाड़ौती का गोवा

हजारों किलोमीटर का सफर तय करके अपनें घौसलों को छोड़कर विदेशी परिंदें...बूंदी की अलग-अलग झीलों में डेरा जमाए हुए हैं।

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Shailendra Tiwari

Feb 25, 2017

हजारों किलोमीटर का सफर तय करके अपनें घौसलों को छोड़कर विदेशी परिंदें...बूंदी की अलग-अलग झीलों में डेरा जमाए हुए हैं। वे यहां तिनका-तिनका जमा करके नए घौसलों के निर्माण में जुटे हैं।

बूंदी से 24 किलोमीटर दूर हाड़ौती का गोवा के नाम से जाना जाने वाला बरधा डेम इन दिनों प्रवासी पक्षियों से आबाद है। पेलिकन्स व फ्लेमिंगो के अलावा प्रवासी व अप्रवासी पक्षियों को निहारने के लिए भी बड़ी संख्या में यहां लोग नजर आ रहे हैं।

नेचर प्रमोटर हाजी हनीफ जैदी का कहना है कि यहां का पानी किसानों के लिए वरदान है, पानी कम होने के बाद पेटाकाश्त खेती होती है, जो गर्मी तक चलती है। गेहूं के अलावा मवेशियों का चारा, ककड़ी, खरबूजे आदि होते हैं, बरधा बांध का पानी जैसे-जैसे कम होगा, वैसे पक्षियों की संख्या बढ़ती जाएगी।

जलवायु के लिहाज से यह जगह पक्षियों के लिए मुफीद मानी जा रही है। बूंदी में आने वाले विदेशी प्रर्यटकों के लिए यह स्थल इन दिनों आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। पक्षी विशेषज्ञों ने इस स्थान को रामसर साइट में रखा हुआ है। इस समय यहां पेलिकन्स व फ्लेमिंगो -महाराष्ट्र व कच्छ के दलिय क्षेत्रों से आए हुए हैं।

इन पक्षियों से गुलजार झीलें

प्रवासी पक्षियों में पिनटेल, रेड़ी शैलडक, बारहेडेड गूज, गेडवेल, कूट, ब्लेकहेडेड, सीगल, रिवरटर्न, शॉवलर, पोचर्ड, कॉमलपोटर्च, रेडशिंक, लिटिल ग्रीम प्लोवर आदि विदेशी प्रवासी पक्षियों की कलरव सुनाई दे रही है। पानी कम होने के कारण भोजन आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

मछलियों का भोजन

यहां मछलियों का ठेका है, झील में कोमनकार्प, चाइनाकार्प, कतला, स्टाइगर, नरेन आदि मछलियों के बीज डाले जाते है। छह माह बाद 500 से 600 ग्राम के हो जाते हैं, अधिकतर पक्षी मछलियों का भोजन करते है।

पेलिकन एक दिन में आधा किलो से एक किलो तक मछली खा जाते हैं। इस समय पेलिकन्स की संख्या 150 के करीब और इतने ही फ्लेमिगों राजहंस दिखाई दे रहें हैं। नेचर प्रमोटर ए. एच. जैदी के अनुसार हाड़ौती जलक्षेत्र इतने पर्यावरणीय अनुकूल है कि हजारों किलोमीटर से उड़ान भरकर परिंदे छोटीकाशी में डेरा डालते हैं।