
भारत यूरोपीय संघ व्यापार समझौता। (फोटो: AI Generated)
Duty Cut: भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश को एक बहुत बड़ा आर्थिक उपहार मिला है। बरसों के इंतज़ार और कई दौर की वार्ताओं के बाद, भारत और यूरोपीय संघ (European Union India Trade Agreement) ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA 2026) को अंतिम रूप दे दिया है। नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में इस सौदे पर मुहर लगी, जो भारत के वैश्विक व्यापारिक कद को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। इस समझौते का सबसे बड़ा और तत्काल असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर दिखने वाला है। डील के तहत, भारत ने यूरोपीय देशों से आयात होने वाली कारों (Cheaper Luxury Cars India) पर लगने वाले भारी-भरकम 'इम्पोर्ट टैरिफ' में बड़ी कटौती करने का फैसला किया है।
मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी और वोक्सवैगन जैसी दिग्गज यूरोपीय कंपनियों की कारें अब भारतीय बाज़ार में काफी कम कीमतों पर उपलब्ध होंगी।
सूत्रों के अनुसार, ऊंचे टैरिफ को चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा, जिससे मध्यम और प्रीमियम सेगमेंट की कारों की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।
यूरोपीय संघ के साथ हुई इस डील का असर आपकी डाइनिंग टेबल पर भी दिखेगा। फ्रांस की वाइन, इटली का चीज़ और बेल्जियम की चॉकलेट पर आयात शुल्क कम होने से इनकी कीमतें गिरेंगी। इसके बदले में, भारत के टेक्सटाइल (कपड़ा), कृषि उत्पाद और फार्मास्युटिकल (दवा) कंपनियों को यूरोपीय बाज़ारों में 'ज़ीरो ड्यूटी' एक्सेस मिलेगा। इसका सीधा मतलब है कि भारतीय सामान अब यूरोप के 27 देशों में ज्यादा प्रतिस्पर्धी और सस्ता होगा, जिससे निर्यात में भारी उछाल आने की उम्मीद है।
इस डील पर विशेषज्ञों और बाज़ार की प्रतिक्रिया बहुत सकारात्मक है:
भारतीय उद्योग (CII & FICCI): व्यापारिक संगठनों ने इसे 'गेम चेंजर' बताया है। उनका मानना है कि इससे भारत में निवेश बढ़ेगा और लाखों नए रोज़गार पैदा होंगे।
यूरोपीय नेतृत्व: उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे भारत-EU संबंधों का नया अध्याय बताया है।
मध्यम वर्ग के लिए यह खबर किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है, क्योंकि अब अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स तक उनकी पहुँच आसान और सस्ती हो जाएगी।
इस समझौते का एक रणनीतिक और साइड एंगल भी है। यूरोप अब अपनी सप्लाई चेन के लिए चीन पर निर्भरता कम करना चाहता है। भारत के साथ यह समझौता चीन के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका है। भारत अब यूरोप के लिए 'सबसे भरोसेमंद' मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरेगा। 'मेक इन इंडिया' को इससे वैश्विक पहचान मिलेगी और यूरोपीय कंपनियां अपनी फैक्ट्रियां चीन से हटाकर भारत ला सकती हैं।
कार्यान्वयन की तारीख: उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद, नए टैरिफ रेट्स वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत से लागू हो सकते हैं।
रोज़गार के अवसर: वाणिज्य मंत्रालय अब इस बात का खाका तैयार करेगा कि किन-किन सेक्टरों में तत्काल भर्ती की ज़रूरत है ताकि निर्यात की मांग को पूरा किया जा सके।
अगली बैठक: मार्च 2026 में ब्रुसेल्स में एक उच्च स्तरीय बैठक होगी, जिसमें सर्विस सेक्टर और डेटा प्रोटेक्शन जैसे बारीकियों पर अंतिम रूप से चर्चा की जाएगी।
बहरहाल, भारत-EU ट्रेड डील केवल व्यापार के बारे में नहीं है, बल्कि यह दो महाशक्तियों के बीच भरोसे का प्रतीक है। जहाँ एक तरफ भारतीयों को सस्ती यूरोपीय तकनीक और लग्जरी सामान मिलेगा, वहीं दूसरी ओर भारतीय छोटे व्यापारियों के लिए यूरोप के दरवाज़े खुल जाएंगे।
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Updated on:
26 Jan 2026 06:36 pm
Published on:
26 Jan 2026 06:30 pm
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