6 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

दस साल बाद SGB पर टैक्स! Gold Investers बता रहे धोखा, Expert की राय- चिल्लर के फेर में सरकार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने एक फरवरी, 2026 को जो घोषित बजट किया, उसके एक प्रावधान पर अभी तक बहस चल रही है। यह ऐलान है सोवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond या SGB) से कमाई पर कैपिटल गेन टैक्स वसूलने का। सोशल मीडिया पर जहां सीए, निवेशक आदि इसे सरकार की बेशर्मी और फरेब […]

3 min read
Google source verification
What is SGB, Capital Gain Tax on SGB

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि गोल्ड बॉन्ड पर वसूला जाएगा कैपिटल गेन टैक्स। अब तक था 'टैक्स-फ्री', 2024 से बंद किया जा चुका है एसजीबी। (फोटो डिजाइन: पत्रिका)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने एक फरवरी, 2026 को जो घोषित बजट किया, उसके एक प्रावधान पर अभी तक बहस चल रही है। यह ऐलान है सोवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond या SGB) से कमाई पर कैपिटल गेन टैक्स वसूलने का। सोशल मीडिया पर जहां सीए, निवेशक आदि इसे सरकार की बेशर्मी और फरेब बताते हुए ईपीएफ जैसे निवेश पर भी टैक्स लगाने का डर जता रहे हैं, वहीं अर्थशास्त्री भी इस निवेशकों से धोखा करार दे रहे हैं। उनकी राय में सरकार के इस कदम से जितना उसे टैक्स नहीं मिलेगा, उससे कहीं ज्यादा नुकसान होगा।

SGB पर कैपिटल गेन टैक्स: सरकार का धोखा क्यों

SGB पर टैक्स को मुख्य रूप से दो कारणों से सरकार का धोखा कहा जा रहा है। एक तो यह कि 'रेट्रोस्पेक्टिव' टैक्स लगाया गया है। मतलब, बजट के प्रावधान लागू होने के बाद निवेश करने वालों से नहीं, बल्कि उसके पहले जिन्होंने निवेश किया है, उन्हें भी टैक्स देना होगा। वित्त मंत्री की इस घोषणा के बाद सरकार के चाल-चरित्र पर बहस शुरू हो गई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि जब मोदी सरकार ने 2015 में SGB लॉंच किया था तब यही कहा था कि इस पर हुआ फायदा या नुकसान पूरी तरह आपका होगा। फायदा होने पर भी सरकार इसमें से कुछ नहीं लेगी। अब टैक्स वसूलने के कदम को विशेषज्ञ भी बुद्धिमानी वाला फैसला नहीं बता रहे हैं।

SGB पर टैक्स से छूट किसे?

जिन लोगों ने सीधे सरकार या प्राइमरी मार्केट से SGB खरीदा है, उन्हें टैक्स से छूट दी गई है। लेकिन उनके लिए भी शर्त है। शर्त यह है कि वह समय से पहले बॉन्ड नहीं भुनाएंगे।

सेकंडरी मार्केट से बॉन्ड खरीदने वाले किसी भी निवेशक को मुनाफे पर 12.5 फीसदी का मोटा कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। अगर वे मैच्योरिटी के बाद बॉन्ड भुनाते हैं, तब भी उन्हें टैक्स से छूट नहीं होगी। पहले केवल उन्हीं से टैक्स लिया जाता था जो बॉन्ड समय पूरा होने से पहले भुनाते थे।

SGB क्या है?

SGB पहली बार 2015 में जारी किया गया था। इसके जरिए सोने में निवेश करने वाले लोगों को राहत यह थी कि सोना खरीद कर संभालने के झंझट से मुक्ति मिल जाती थी। पैसे देकर कागज (बॉन्ड) के रूप में सोना खरीदिए और बॉन्ड मैच्योर हो जाए तो उस समय के सोने के भाव के हिसाब से सरकार से पैसा ले लीजिए। साथ में ढाई फीसदी सालाना के दर से ब्याज भी मिलता था। इस ब्याज की रकम को टैक्स योग्य आय में जोड़ा जाता है और स्लैब के हिसाब से इस पर टैक्स बनता है।

बॉन्ड भुनाते वक्त उस समय सोने की कीमत के हिसाब से पैसा दिया जाता है। यह कीमत तय करने के लिए जिस दिन बॉन्ड भुना रहे हैं, उस दिन से पहले के तीन दिन की कीमत (999 शुद्धता वाला) का औसत निकाला जाता है। औसत उस कीमत का जिस पर सोना बीते तीन दिनों में बंद हुआ हो।

फायदा या नुकसान जो भी हो, वह पूरी तरह आपका। फायदा हुआ तो उस रकम पर टैक्स भी नहीं देना था। निजी तौर पर एक व्यक्ति इस बॉन्ड के जरिए एक ग्राम से 4 किलो तक सोना खरीद सकता था।

कैसे बढ़ता गया सोने का भाव

वर्षसोने की कीमत (24K प्रति 10 ग्राम)
2026 (जनवरी)₹ 94,630
2024₹ 64,070
2023₹ 65,330
2022₹ 52,670
2021₹ 48,720
2020₹ 48,651
2015₹ 26,343
2010₹ 18,500
2000₹ 4,400
1990₹ 3,200
1980₹ 1,330
1970₹ 184
1964₹ 63.25

जब SGB लॉंच किया गया था तब सोने का भाव कम था और इसमें आज की तरह उतार-चढ़ाव भी नहीं था। बल्कि, कहा जाए तो 2011-12 के चढ़ाव के बाद उतार पर था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब सोना का भाव ज्यादा चढ़ने लगा उस दौर में सरकार ने एसजीबी जारी करना बंद कर दिया। 2024 से SGB जारी नहीं हुआ है।

सालसोने पर रिटर्न
2015-6.64%
201610.08%
20175.67%
20188.25%
201924.90%
202027.91%
2021-4.09%
202214.38%
202314.88%
202421.43%
2025 (जून तक)26.88%

अर्थशास्त्री का गणित

अर्थशास्त्री सुरजीत एस भल्ला ने इंडियन एक्सप्रेस में एक लेख में वित्त मंत्री के इस फैसले को नागरिकों और मतदाताओं से एक तरह की वादाखिलाफी बताया है। उन्होंने यहां तक तंज कस दिया है- सरकार का रवैया ऐसा है कि मेरा जो है वह तो मेरा है ही, तेरा जो है वह भी मेरा है। उन्होंने 'रेटोरोस्पेक्टिव टैक्स' को लालच और नाजायज बताते हुए गैरकानूनी ठहराने की भी वकालत की है।

भल्ला ने SGB पर टैक्स वसूलने के आर्थिक पहलू पर भी बात की है। उनके मुताबिक इससे सरकार जितना कमाएगी, नहीं उससे ज्यादा गंवाएगी। सरकार को इस टैक्स से 200 करोड़ रुपये मिलेंगे। यह 2025-26 में मिले कुल टैक्स का करीब 0.005 प्रतिशत होगा। जबकि, मेरा अनुमान है कि सरकार ने बाजार से 7 फीसदी के बजाय निवेशकों से 2.5 फीसदी सालाना पर पैसे लेकर करीब 50000 करोड़ रुपये बनाए हैं। इसके अलावा सोने के आयात में कमी और चालू खाते में बैलेंस में बढ़ोतरी के रूप में अलग से फायदा उठाया। और अब वह 200 करोड़ रुपये के लिए इन निवेशकों का भरोसा ही तोड़ने जा रही है।

वित्त मंत्री का तर्क और लोगों की राय

वित्त मंत्री ने अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि अगर आप सेकंडरी मार्केट से SGB खरीद कर मुनाफा बना रहे हैं तो इसमें सरकार को भी अपना हिस्सा चाहिए।

उनकी इस दलील पर सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग राय रख रहे हैं। इनमें सीए, ट्रेड एक्सपर्ट और आम निवेशक सभी हैं।

कोई इसे सरकार की बेशर्मी बता रहा है, कोई कह रहा है इस फैसले को चुनौती देनी चाहिए, नहीं तो सरकार EPF जैसे फंड में निवेश पर भी टैक्स लगा सकती है।