बुरहानपुर. कैशलैस व्यवस्था से किसानों पर गहरा असर पड़ा है। नकदी की चाह में उपज बेचने मंडी में आ रहे किसान खाली हाथ लौट रहे हैं। व्यापारी से नकदी मांगने पर एक प्रतिशत राशि काटने की शर्त रख रहे हैं, नहीं तो चेक मिलने पर चार से पांच दिन क्लियरिंग में बीत रहे हैं।
किसानों का कहना है कि नकदी नहीं दें तो हाथों हाथ रुपए हमारे खाते में ट्रांसफर करने की व्यवस्था होना चाहिए। व्यापारियों ने यह व्यवस्था अब तक शुरू नहीं की है। रेणुका कृषि उपज मंडी में किसान सोयाबीन, तुवर और अन्य उपज बेचने के लिए आ रहे हैं।
यहां अपनी उपज बेचने के बाद व्यापारी से नकदी की मांग करने पर एक प्रतिशत राशि काटने की शर्त रख रहे हैं, नहीं तो चेक से पेमेंट। वह भी दस दिन बाद का। उसी दिन का चेक दे भी रहे हैं, तो इसे क्लियरिंग में चार से पांच दिन लग जाते हैं।
दर्यापुर की यूको बैंक की स्थिति तो यह है कि यहां पंद्रह दिन तक चेक क्लियरिंग नहीं हो पा रहा है। जबकि किसान उम्मीद लेकर आ रहा है कि उपज बेचकर सीधे नकदी हाथ में नहीं तो रुपए खाते में ट्रांसफर हो जाए। कैशलैस की व्यवस्था मंडी में चेक तक सीमित रह गई। यहां न तो स्वैप मशीन है न वॉलेट कार्ड। न ही ऑनलाइन रुपए ट्रांसफर की कोई व्यवस्था। इस तरह की समस्या से मंडी में ज्यादातर किसान परेशान है। कई बार मंडी अफसरों को भी इस संबंध में अवगत कराया गया, लेकिन कोई हल नहीं निकला।
किसानों ने बताई पीड़ा
सोमवार को मंडी में आए किसानों ने अपनी पीड़ा बताई। लिंगा से आए चूड़ामन रामभाऊ, पंडित चौधरी ने कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप काम नहीं हो रहा है। चेक से पेमेंट देते हैं तो यह हाथों हाथ खातों में नहीं डलता।
बेरर चेक देने का नियम नहीं है। नकदी मांगे तो व्यापारी कहते हैं नोटबंदी के बाद रुपए की किल्लत हो गई। एक प्रतिशत राशि काटकर देंगे। नुकसान होने के चलते किसान यह लेने से मना कर देते हैं।
यहां तक कई व्यापारी किसानों को भाव बढऩे का झांसा देकर मौके पर रुपए नहीं देते। व्यापारी कहते हैं कि पंद्रह दिन बाद दाम बढ़ सकते हैं, तब बढ़े हुए दाम के रुपए ले जाना। इनकी बातों में कई किसान आ भी जाते हैं।
पूर्व में हो चुकी है शिकायतें
पूर्व में किसान एक फर्म की लीखित शिकायत कर चुके हैं। जिसे मंडी ने नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा था। इस तरह की कई शिकायतें भी हो चुकी है। इस समस्या के अलावा नीलामी को लेकर भी किसान हताश है। सुबह 9 बजे गांव से अनाज लेकर मंडी में आते हैं और नीलामी 12 बजे शुरू होती है। इसके बाद तुलाई का टेंशन। इस तरह की झंझट समाप्त होना चाहिए। तभी किसानों को अपनी उपज लेकर मंडी में आना उचित रहेगी।
नकद पर मांगते हैं एक प्रतिशत
&सिरपुर से आए गोविंद सिंह जाधव ने कहा कि मंडी में पेमेंट को लेकर बहुत परेशानी है। नकदी पर एक प्रतिशत दो नहीं चेक। एक क्विंटल पर एक किलो अनाज भी बिक्री में घट जाता है। मंडी में बहुत मनमानी चलती है।
हाथों हाथ राशि खाते में डाले
जैनाबाद के किसान मोती मल्ला ने बताया कि मंडी में व्यापारियों को उपज बेचने के बाद रुपए सीधे ऑनलाइन खाते में डालना चाहिए। चेक क्लियरिंग में समय जाता है और बैंक के भी चक्कर लगाना पड़ते हैं। इस व्यवस्था को मंडी में सही किया जाना चाहिए।
मंडी में किसी प्रकार से किसानों को एक प्रतिशत राशि काटकर नहीं दे रहे हैं। ऐसी कोई शिकायत भी हमारे पास नहीं है। किसान शिकायत करें तो हम कार्रवाई करेंगे।
जयरात वानखेड़े, मंडी निरीक्षक