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आपके कार का हो जाए एक्सीडेंट तो क्लेम लें या नहीं, इंश्योरेंस क्लेम से जुड़े सभी सवालों के जवाब एक्सपर्ट से जानिए

कार इंश्योरेंस का क्लेम हर छोटे या बड़े एक्सीडेंट में लेना चाहिए या नहीं? इस सवाल का जवाब हरेक कार मालिक को जानना चाहिए। पत्रिका टीम ने आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जीआईसी के अंडरराइटिंग चीफ गौरव अरोड़ा का इंटरव्यू किया ताकि इस विषय से जुड़े आपके हर सवाल का जवाब आपको मिल सके।

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कार इंश्योरेंस होने का फायदा उस समय मिलता है जब कार के साथ कोई दुर्घटना हो जाती है। कार के किसी हिस्से के डैमेज होने पर आप उसकी मरम्मत के लिए क्लेम कर सकते हैं। क्लेम के बाद इंश्योरेंस कंपनी मरम्म्त पर खर्च होने वाली राशि का भुगतान करती है। वहीं अगर कार ऑनर एक-दो साल तक क्लेम न लें तो इसका फायदा आगे मिलता है। लेकिन अगर आप छोटे मोटे अमाउंट के लिए बार-बार क्लेम लेते हैं तो फिर आगे चलकर यह परेशानी खड़ी कर सकता है।

सवाल- क्या छोटे मोटे नुकसान के लिए क्लेम दायर करना चाहिए?

गौरव- बीमाधारकों को मोटर इंश्योरेंस में 3 महत्वपूर्ण शर्तों के बारे में पता होना चाहिए। जैसे प्वाइंट ऑफ क्लेम्स पर अतिरिक्त कटौती, नो क्लेम बोनस (एनसीबी) का बेनेफिट और पॉलिसी अवधि के दौरान आपके दायर की गई क्लेम की संख्या। बीमा कंपनी की ओर से भुगतान किए गए हर क्लेम के एवज में एक अनिवार्य कटौती होती है जिसे ग्राहकों को वहन करना होता है। यह कटौती राशि अलग-अलग वाहनों के लिए अलग-अलग हो सकती है। प्राइवेट कार के लिए यह 1000 रुपए से 2000 रुपए तक हो सकती है। इसके अलावा अगर आप पॉलिसी अवधि के दौरान कोई क्लेम लेते हैं तो नो क्लेम बोनस जीरो हो जाता है और आने वाले वर्षोंं में बीमा रिन्यूअल के समय आप प्रीमियम में मिलने वाली छूट का लाभ खो देंगे। पॉलिसी के रिन्यूअल के दौरान बीमा कंपनी पिछले इंश्योरेंस में लिए गए क्लेम की संख्या की भी जांच करती है। ऐसे में रिन्यूअल प्रीमियम ज्यादा हो सकता है। इसलिए रिपेयर में खर्च होने वाली छोटी राशि के क्लेम से बचना चाहिए।

सवाल- क्या क्लेम की अधिकतम संख्या तय है?

गौरव
- नहीं, आप साल में जितनी बार चाहें क्लेम कर सकते हैं। भारत में सभी इंश्योरेंस कंपनियों के लिए मोटर इंश्योरेंस में एक साल के अंदर अधिकतम क्लेम दायर करने की कोई सीमा नहीं है।

सवाल- क्या ऐड-ऑन सुविधाओं के तहत क्लेम की संख्या को बेस प्लान क्लेम से अलग काउंट किया जाता है?

गौरव
- बेस पॉलिसी के तहत किए जाने वाले क्लेम की संख्या की लिमिट नहीं है, लेकिन जीरो डेप्रिसिएशन का लाभ पाने के लिए क्लेम की संख्या अलग-अलग इंश्योरेंस कंपनियों के लिए अलग-अलग हो सकती है। बेस प्लान और ऐड-ऑन के तहत क्लेम एक ही क्लेम माना जाता है।

सवाल- अगर क्लेम दायर नहीं करते हैं तो क्लेम बोनस कितना मिलेगा?

गौरव
- अगर आप पहले साल में क्लेम नहीं करते हैं तो नो क्लेम बोनस 20% होगा। दूसरे साल में यह बढक़र 25%, तीसरे साल में 35%, चौथे साल में 45% और पांचवें साल में 50% हो जाता है। पॉलिसीधारक लगातार 5 साल तक क्लेम फ्री होने पर अधिकतम 50% नो क्लेम बोनस हासिल कर सकते हैं। पिछले वर्षों की क्लेम की स्थिति के आधार पर इंश्योरेंस लेने वाले को ऑटोमैटिक रूप से नो क्लेम बोनस प्रदान किया जाता है।

सवाल- क्या पुरानी कार के लिए क्लेम दायर करने में अधिक सावधान रहना चाहिए?

गौरव- वाहन नया हो या पुराना, बीमा कंपनी व्यक्तिगत स्तर पर जोखिम का मूल्यांकन कर सकती है और क्लेम के अनुभव और पिछली बीमा कंपनी से लिए गए क्लेम की संख्या के अनुसार प्रीमियम वसूल सकती है। वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने या चोरी की स्थिति में क्लेम के निपटान के लिए आइडीवी (इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू) का भुगतान किया जाता है। आइडीवी अधितकम सम इंश्योर्ड राशि है जिसका भुगतान बीमा कंपनी क्लेम के एवज में करती है।

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