Indian Economy news: बीते वित्त वर्ष में 300 से ज्यादा कंपनियां कर्ज मुक्त हो गई हैं। इन कंपनियों ने अपने नकदी भंडार को भी दोगुना से अधिक कर लिया है। वहीं, ये नए निवेश को लेकर सतर्कता बरत रही हैं।
भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड करीब 3500 कंपनियों में से 300 से अधिक कंपनियां वित्त वर्ष 2024-25 में कर्जमुक्त हो गई हैं। कर्जमुक्त हुई इन 303 कंपनियों ने पिछले एक साल में अपने पास कैश (नकदी भंडार) को भी दोगुना से भी ज्यादा कर लिया है, जो नए निवेशों के प्रति उनके सतर्क रुख को दर्शाता है। कैपिटल लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों ने मिलकर अपनी नकदी को 21,478 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 50,463 करोड़ रुपये कर लिया है। यह दिखाता है कि कंपनियां अब अपने बही-खातों को अधिक चुस्त और ऋण-मुक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। साथ ही वे कर्ज से बचने और नकदी के बफर बनाने पर जोर दे रही हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि प्राइवेट कैपेक्स नहीं बढना देश की आर्थिक सेहत के लिए नुकसानदेह है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह चलन भविष्य में आने वाले झटकों, जैसे कि भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में व्यवधान से निपटने के लिए एक सुरक्षा कवच तैयार करने जैसा है। इसके अलावा, ऋणदाताओं की ओर लगाई जा रही कड़ी शर्तों के कारण भी कंपनियां कर्ज लेने से बच रही हैं। आमतौर पर कंपनियां पूंजीगत खर्च के लिए ऋण लेती हैं, लेकिन अब वे इक्विटी फंडिंग पर जोर दे रही हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ो के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनियों का कर्ज सिर्फ 2.9 फीसदी ही बढ़ा है। यह 5 साल की सबसे धीमी रफ्तार है। वित्त वर्ष 2023-24 में 303 कंपनियों पर 28,007 करोड़ रुपये का कर्ज था। वहीं, कर्जमुक्त कंपनियों की नकदी 135 फीसदी बढ़ गई है। इन 303 कंपनियों के पास 2023-24 में 21,478 करोड़ रुपये का कैश था। यह वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 50,463 करोड़ रुपये हो गया है।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बुधवार को 4,60,39,059.17 करोड़ रुपये हो गया है। बुधवार को भारतीय शेयर बाजार शुरुआती कारोबार में गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा है। बीएसई सेंसेक्स बुधवार सुबह 80 अंक की गिरावट के साथ 82,491 पर ट्रेड करता दिखा।