
arun jaitley
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को आगामी वर्षों में करों में कटौती के संकेत दिए। जेटली ने कहा कि देश को अब निचले दर के कराधान की आवश्यकता है, ताकि वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बना जा सके। जेटली ने कहा कि हमें निचले दर के कराधान की जरूरत है, सेवाओं को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके। प्रतिस्पर्धा घरेलू नहीं, बल्कि वैश्विक है। निचले स्तर के कराधान की और अर्थव्यवस्था का आधार बढ़ाने की जरूरत है।
जेटली ने कहा कि अतीत में कराधान की ऊंची दर के कारण बड़े पैमाने पर कर चोरी के मामले सामने आए। कर कम होने चाहिए और माहौल को कर अनुकूल होना चाहिए। जेटली ने यहां राष्ट्रीय सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क एवं नार्कोटिक्स अकादमी में भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) से संबद्ध सीमा शुल्क एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिकारियों के 68वें बैच के पेशेवर प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही।
जेटली ने आईआरएस अफसरों से कहा कि यह एक ऐसा महत्वपूर्ण बदलाव होगा जिसे आप अपनी नौकरी के दौरान होते देखेंगे। उन्होंने देश में कर अनुकूल माहौल बनाने पर जोर देते हुए कहा कि प्रशासन को कर नियम की व्याख्या करते समय निष्पक्ष रहने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि कर अधिकारियों को उनके लिखे की गुणवत्ता या उनके फैसलों की गुणवत्ता के आधार पर परखा जाता है। कर अधिकारियों द्वारा बनाए गए नियमों की व्याख्या की गुणवत्ता उनके द्वारा बरती जाने वाली निष्पक्षता से परिभाषित होगी। कराधान कानूनों में कहीं भी अस्पष्टता नहीं है। नागरिकों द्वारा करों की खुद आगे बढ़कर की गई अदायगी का जवाब कर अधिकारियों को कर अनुकूल माहौल बनाकर देना चाहिए।
जेटली ने कहा कि अधिकरियों को निष्ठा, ईमानदारी से काम करना चाहिए और नई चीजें सीखने के लिए उत्सुक रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि करों का भुगतान अर्थव्यवस्था के विकास का आधार है। करों का भुगतान विकसित होते समाज में नागरिकों के कर्तव्य का हिस्सा है।
जेटली ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), जिसके अगले वित्त वर्ष से लागू होने की उम्मीद है, का जिक्र करते हुए कहा कि 'टैक्स कंवर्जेन्स' की प्रक्रिया जारी है और इसके लिए केंद्र तथा राज्य सरकारों के अधिकारियों का सहयोग आवश्यक है।
Published on:
27 Dec 2016 08:00 am
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