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क्रेडिट कार्ड से करते हैं ‘रेंट पेमेंट’! HRA क्लेम हो सकता है रिजेक्ट

Credit Card Misuse: कई लोग क्रेडिट कार्ड के जरिए 'रेंट' चुकाते हैं, लेकिन वो ऐसा क्या गलत कर रहे हैं, जिनकी वजह उनको नोटिस आ रहे हैं, समझिए।

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क्रेडिट कार्ड का गलत इस्तेमाल पड़ेगा भारी (PC: Canva)

क्रेडिट कार्ड से आपको कई फायदे हैं, बशर्ते आप इसका सही तरीके से इस्तेमाल करें। क्रेडिट कार्ड का गलत इस्तेमाल, आपको इनकम टैक्स नोटिस थमा सकता है। कुछ ऐसे ही 'अति समझदार' लोगों को इनकम टैक्स नोटिस थमा भी चुका है। अगर आप, सैलरीड क्लास हैं, तो आपको HRA क्लेम से भी हाथ धोना पड़ सकता है। इसलिए जो गलतियां इन्होंने की, आप वो न करें। क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करें, लेकिन किसी लालच या गलत नीयत से नहीं। चलिए अब समझते हैं वो गलतियां, जो इन अति समझदार लोगों ने की, जो आपको कतई नहीं करनी है।

क्रेडि कार्ड से रेंट पेमेंट के नाम पर खेल

कई लोगों ने क्रेडिट कार्ड के जरिए 'रेंट' चुकाया, आपको लगेगा कि इसमें कुछ गलत नहीं है, बहुत से लोग करते हैं, इसमें नोटिस मिलने जैसी कोई बात नहीं है और न तो इसमें कुछ गैर-कानूनी दांव-पेच शामिल है। लेकिन, इनकम टैक्स विभाग जब मामले की गहराई में गया तो उसने पाया कि दरअसल, ये रेंट चुकाने के नाम पर पैसों को सिर्फ घुमा रहे थे। उन्होंने रेंट के नाम पर अपने दोस्तों और परिवार के लोगों को पैसे ट्रांसफर किए, बाद में इन दोस्तों और परिवार के लोगों ने उसी पैसे को घुमाकर वापस क्रेडिट कार्ड होल्डर के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया। जबकि ये मकान मालिक होते भी नहीं हैं। इसे 'बनावटी खर्च-Manufactured Spending' कहा जाता है।

मतलब ये कि क्रेडिट कार्ड से पैसे तो खर्च हो रहे थे, लेकिन न तो कुछ खरीदा जा रहा था और न ही कहीं खपत हो रही थी। तो फिर ऐसा किया क्यों जा रहा था। इसका जवाब है, रिवॉर्ड्स प्वाइंट्स और कैशबैक के लालच में। दरअसल, सारे बैंक्स और फिनटेक कंपनियां क्रेडिट कार्ड से खर्च करने पर कार्डहोल्डर्स को कई तरह के रिवॉर्ड्स देती हैं। 'रेंट पेमेंट ऐप्स' का इस्तेमाल करने पर भी हाई-रिवॉर्ड्स मिलते हैं। इन रेंट पेमेंट ऐप्स में ज्यादातर रेंट एग्रीमेंट्स भी नहीं मांगते। इसलिए पैसों को घुमाना आसान हो जाता है।

1.12 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस

पिछले साल एक मामला आया था। चेन्नई के एक व्यक्ति को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने सेक्शन 156 के तहत करीब 1.12 करोड़ का डिमांड नोटिस जारी किया था। उसके क्रेडिट कार्ड (HDFC बैंक और SBI) से करीब 68.97 लाख खर्च हुए थे, जो मुख्य रूप से क्रेडिट कार्ड रोटेशन पर खर्च करने से हुए थे। इसका मकसद ज्यादातर रिवॉर्ड पॉइंट्स कमाना था। इस व्यक्ति ने कोई इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं किया था, इसलिए डिपार्टमेंट ने पूरे खर्च को सेक्शन 69C के तहत अनएक्सप्लेन्ड एक्सपेंडिचर (unexplained expenditure) मानकर इसे आय में जोड़ दिया। इस पर 60% टैक्स + सरचार्ज + सेस + पेनल्टी लगाकर कुल डिमांड 1.12 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

इनकम टैक्स विभाग की रहती है नजर

क्रेडिट कार्ड का ऐसा गलत इस्तेमाल करने वाले लोगों पर इनकम टैक्स विभाग की कड़ी नजर रहती है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने डेटा एनालिटिक्स को काफी मजबूत कर दिया है। AIS/SFT बेस्ड प्रोफाइलिंग को बढ़ा दिया है, ताकि रिपोर्टेड इनकम के साथ मिसमैच हाई-वैल्यू क्रेडिट कार्ड खर्च को पकड़ा जा सके। अब यह एक सामान्य नियम है कि बैंक और कार्ड जारी करने वाले संस्थान हाई-वैल्यू कार्ड पेमेंट्स को SFT (Specified Financial Transactions) के रूप में रिपोर्ट करना अनिवार्य है। अगर एक साल में क्रेडिट कार्ड से 10 लाख रुपये से ज्यादा खर्च होता है तो ये डेटा सीधे Annual Information Statement (AIS) में जाता है और e-Campaign/Compliance Portal में फीड होता है। अगर डेटा कमाई से मिसमैच होता है तो टैक्सपेयर्स से इन लेन-देन की डिटेल्स के लिए ऑनलाइन नोटिस जारी किए जाते हैं।

HRA क्लेम अस्वीकार हो सकता है!

सैलरीड क्लास, जो क्रेडिट कार्ड से रेंट पेमेंट ऐप्स के जरिए पेमेंट करते हैं या यूं कहें कि रिवॉर्ड के चक्कर में पैसों को घुमाते हैं, तो उनको HRA मिलने में दिक्कत हो सकती है। डिपार्टमेंट AIS और SFT डेटा से मिसमैच पकड़ता है, जैसे टेनेंट HRA क्लेम करता है, लेकिन लैंडलॉर्ड रेंट इनकम नहीं दिखाता, तो HRA क्लेम अस्वीकार हो सकता है, और खर्च को सेक्शन 69C के तहत अनएक्सप्लेन्ड मानकर टैक्स और पेनल्टी लग सकती है।

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