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बैंक लॉकर में पूरी तरह सुरक्षित नहीं है आपका सोना! अपनाएं ये तरीका

गोल्ड ओवरड्राफ्ट एक वित्तीय सुविधा है जिसमें आप अपना सोने की ज्वेलरी को बैंक या किसी वित्तीय संस्थान में गिरवी रखते हैं और बदले में सोने की वैल्युएशन के आधार पर एक फ्लेक्सिबल क्रेडिट लिमिट मिलती है।

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बैंक लॉकर आपके गोल्ड की पूरी जिम्मेदारी नहीं उठाता (PC: Canva)

गोल्ड ज्वेलरी को अगर आप घर पर रखते हैं तो उसके चोरी होने का खतरा होता है, इसलिए हम में से ज्यादातर लोग अपनी गोल्ड ज्वेलरी को बैंक लॉकर रखकर चैन की नींद सोते हैं, ये सोचकर की उनका गोल्ड बिल्कुल सुरक्षित है, लेकिन ऐसा नहीं है। क्योंकि बैंक भी लॉकर में रखी आपकी गोल्ड ज्वेलरी की पूरी जिम्मेदारी नहीं लेता, आग लग जाए, बाढ़ आ जाए या किसी दूसरी आपदा में बैंक की जिम्मेदारी नहीं बनती है। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि आपका गोल्ड या ज्वेलरी पूरी तरह सुरक्षित रहे तो आपको गोल्ड ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी के बारे में सोचना चाहिए।

गोल्ड ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी क्या होती है?

गोल्ड ओवरड्राफ्ट एक वित्तीय सुविधा है जिसमें आप अपनी सोने की ज्वेलरी को बैंक या किसी वित्तीय संस्थान में गिरवी रखते हैं और बदले में सोने की वैल्युएशन के आधार पर एक फ्लेक्सिबल क्रेडिट लिमिट मिलती है। ये सामान्य गोल्ड लोन से अलग होता है, जहां आपको एकमुश्त पूरी राशि मिलती है, गोल्ड ओवरड्राफ्ट में एक अप्रूव्ड क्रेडिट लिमिट मिलती है, जिससे आप जरूरत के हिसाब से पैसे निकाल सकते हैं। ठीक वैसे ही जैसे ओवरड्राफ्ट या क्रेडिट कार्ड काम करता है।

ये कैसे काम करता है?

आप बैंक के पास अपना गोल्ड या ज्वेलरी लेकर जाते हैं। बैंक गोल्ड की शुद्धता की जांच करता है और उसकी वैल्यू निकालता है। इसी के आधार पर बैंक आपको एक क्रेडिट लिमिट देता है। जो कि आमतौर पर गोल्ड की वैल्यू का 75-90% तक होता है। आप अपनी जरूरत के हिसाब से इस लिमिट के अंदर जब चाहें पैसे निकाल सकते हैं, जैसे किसी इमरजेंसी में, शादी के लिए, पढ़ाई के लिए।

जैसे कि मान लीजिए कि आपने 10 लाख रुपये का सोना गिरवी रखा, आपको 80% की क्रेडिट लिमिट मिली यानी 80 लाख रुपये। आपको 10 लाख रुपये की जरूरत हुई तो आपने इस क्रेडिट लिमिट से 10 लाख रुपये निकाल लिए। बाकी 70 लाख की क्रेडिट लिमिट बीच हुई है।

सबसे अच्छी बात ये है कि आपको पूरी क्रेडिट लिमिट पर इंटरेस्ट नहीं देना होता है, बल्कि जितना पैसा आपने क्रेडिट पर लिया है, सिर्फ उतने पैसे पर ही इंटरेस्ट देना होता है। जबकि दूसरे पारंपरिक लोन में पूरे डिस्बर्स अमाउंट पर इंटरेस्ट देना होता है, ये उससे काफी अलग है। इंटरेस्ट आमतौर पर 9-12% के बीच होता है।

आपने जितना पैसा क्रेडिट लिमिट से निकाला है, उसे आप चाहें तो एक बार में चुका दें, नहीं तो धीरे-धीरे ओवरड्राफ्ट अवधि के अंदर चुकाते रहें। जैसे-जैसे आप रीपेमेंट करते जाते हैं, आपकी उपलब्ध क्रेडिट लिमिट फिर से बहाल हो जाती है। ओवरड्राफ्ट सुविधा आमतौर पर 12 महीने की होती है, जिसे सोने का फिर से वैल्युएशन करके और शर्तें अपडेट करके रीन्यू किया जा सकता है।

गोल्ड ओवरड्राफ्ट में होता है इंश्योरेंस

बैंक के लॉकर में रखने पर भी आपका सोना पूरी तरह से सुरक्षित नहीं होता है, लेकिन गोल्ड ओवरड्राफ्ट में आपका गोल्ड पूरी तरह से सुरक्षित रहता है, क्योंकि ओवरड्राफ्ट अवधि के दौरान इसका 100% इंश्योरेंस किया जाता है। यानी आपको इस बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है कि आपके गोल्ड के साथ कुछ हो गया तो आप उसकी वैल्यू खो देंगे। भारत में कई बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) गोल्ड ओवरड्राफ्ट सुविधा देती हैं। बैंक जैसे HDFC बैंक, ICICI बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, कैनरा बैंक, फेडरल बैंक और अन्य बैंक यह सेवा देते हैं।

क्या चार्ज हैं

गोल्ड ओवरड्राफ्ट में 1-2% प्रोसेसिंग फीस लगती है। 600 रुपये स्टैम्प ड्यूटी और वैल्युएशन चार्जेस के रूप में 500 रुपये के करीब लगते हैं। ये कीमतें ज्यादा या कम भी हो सकती है। जबकि बैंक लॉकर में 2,500-7,000 रुपये सालाना रेंट के तौर पर देना पड़ता है, इस पर 18% जीएसटी देना पड़ता है। साथ ही, 600 रुपये स्टैम्प ड्यूटी भी लगती है।

मगर, एक बात ध्यान रहे कि गोल्ड ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी में जब आप लोन लेते हैं और उसे चुका नहीं पाते तो आप उस गोल्ड को खो सकते हैं, बैंक उस गोल्ड की नीलामी करके पैसे रिकवर कर सकता है, लेकिन बैंक के लॉकर में रखे गोल्ड के साथ बैंक ऐसा कुछ नहीं कर सकता, वो सुरक्षित रहता है। इसलिए जरूरी है कि बैंक लॉकर में रखे गोल्ड और गोल्ड ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी दोनों के अच्छे और बुरे पहलुओं को ध्यान में रखकर ही फैसला लें।