
केंद्र सरकार का भ्रामक विज्ञापनों को लेकर सख्त रुख, जारी की नई गाइडलाइन्स
उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को केंद्र सरकार ने भ्रामक विज्ञापनों के रोकथाम और भ्रामक विज्ञापनों का समर्थन (Prevention of Misleading Advertisements and Endorsements for Misleading Advertisements) 2022 नाम से गाइडलाइन्स जारी किया है जिसका उद्देश्य सरोगेट विज्ञापन को प्रतिबंधित करना है और बच्चों को टारगेट करने वाले विज्ञापनों के लिए शर्ते निर्धारित की गई हैं। सरकार द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देश आज से ही लागू हो गए हैं। दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया कि विज्ञापन जारी करने से पहले उचित सावधानी बरती जानी चाहिए।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा अधिसूचित नए दिशानिर्देश, जिसके तत्काल प्रभाव से लागू होने के बाद कुछ कंपनियों ने अपने विज्ञापनों में जरूरी सुधार कर लिया है। तो वहीं रकार के कड़े तेवर को देखते हुए एक दर्जन से अधिक कंपनियों ने अपने विज्ञापन वापस ले लिए हैं। मंत्रालय के अनुसार ऐसे किसी भी विज्ञापन को मिसलीडिंग, अनफेयर प्रैक्टिस या मिसलीडिंग क्लेम पर करवाई की जा सकती है साथ ही उंस विज्ञापन को बनाने वाली कम्पनी से लेकर उसको इंडोर्समेंट करने वाले सेलिब्रिटी पर करवाई करने का प्रावधान होगा।
मंत्रालय ने कहा, किसी भी उत्पाद या सेवा के बारे में गलत जानकारी देना, या फिर क्लेम करना जो उस उत्पाद से नहीं मिलता, या उत्पाद के बारे में कोई महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना मिसलीडिंग एड की कैटेगरी में आएगा। इसको लेकर कोई भी उपभोक्ता सीधे ग्राहक हेल्प लाइन पर शिकायत कर सकता है। उपभोक्ताओं को ठगने वाले इस तरह की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) का गठन किया है।
नए दिशानिर्देशों के उल्लंघन के खिलाफ केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (CCPA) के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। गाइडलाइन के अनुसार अब निर्माता अपने उत्पाद के बारे में उपभोक्ताओं को सही-सही जानकारी देंगे। अगर गलत दावा किया गया है और यह साबित होता है तो इन सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि विज्ञापन में फ्री बताकर साथ में शर्तें लागू वाली बात भी कही जा रही है तो इसे मिसलीडिंग माना जाएगा।
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तो वहीं नए दिशा निर्देशों के अनुसार, टर्म एंड कंडीशन में अगर किसी चीज को फ्री बताया गया है तो डिस्क्लेमर में भी उसके बारे में फ्री लिखा होना चाहिए। डिस्क्लेमर में उत्पाद और इसके फायदों के बारे में स्पष्ट तौर पर बताना होगा। प्रोडक्ट के बारे में जितने भी दावे किए गए हैं वो भी डिस्क्लेमर में बताना होगा। स्पेशल ऑफर, आधी कीमत में उपलब्ध, मुफ्त ले जाए, सेल जैसे विज्ञापन को लेकर उपभोक्ताओं को साफ बताना होगा कि उनके पास उस उत्पाद के लिए पर्याप्त समान है। साथ ही विज्ञापन में धमकी या जल्दी खरीदने की बात भी नहीं कही जा सकती है।
9 जून को उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने इन दिशानिर्देशों की घोषणा करते हुए कहा, "विज्ञापनों में उपभोक्ता काफी दिलचस्पी लेते हैं। सीसीपीए अधिनियम के तहत, उपभोक्ताओं के अधिकारों को प्रभावित करने वाले भ्रामक विज्ञापनों से निपटने का प्रावधान है।" रोहित कुमार सिंह ने कहा कि नए दिशा-निर्देश न केवल उपभोक्ता के हितों की रक्षा करेंगे, बल्कि उद्योग को विज्ञापनों की वास्तविकता के बारे में भी समझाएंगे। ये दिशानिर्देश प्रिंट, टेलीविजन और ऑनलाइन जैसे सभी मंचों पर प्रकाशित विज्ञापनों पर लागू होंगे।
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Published on:
10 Jun 2022 05:52 pm

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