
Govt set to become largest shareholder in Vodafone Idea
Vodafone-Idea: टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया की वित्तीय स्थिति काफी खराब है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उसे सरकार को 16,133 करोड़ रुपए का पेमेंट करना है, लेकिन वह अभी पेमेंट नहीं कर पा रही है। इसी को देखते हुए सरकार वोडाफोन-आइडिया को राहत दे सकती है। भारत सरकार इन पैसों के बदले वोडाफोन-आइडिया में 33% की हिस्सेदारी ले सकती है। हालांकि सरकार को यह हिस्सेदारी लेने के लिए सेबी से मंजूरी लेनी होगी। सेबी के अप्रूवल के बाद ही सरकार वोडाफोन-आइडिया के शेयर हासिल कर पाएगी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 62 (4) का यूज करते हुए कंपनी में अपनी हिस्सेदारी ले सकती है। वहीं सरकार के बाद सबसे बड़ी हिस्सेदारी आने के बाद भी वह प्रमोटर के कैटिगरी में नहीं रहेगी। इसके साथ ही कंपनी के बोर्ड ऑफ डॉयरेक्टर की टीम में भी सरकार का कोई भी प्रतिनिधि शामिल नहीं होगा।
1,97,878.2 करोड़ रुपए का है कर्ज
इससे पहले वोडाफोन-आइडिया ने कल अपने प्रमोटर समूह के साथ एक आम बैठक में 436 करोड़ रुपए जुटाने के लिए शेयर होल्डर्स से अनुमति मांगी है। अभी vodafone idea (VIL) के प्रमोटर, जिसमें वोडाफोन ग्रुप और आइडिया ग्रुप शामिल हैं उनके पास कंपनी में 74.99% की हिस्सेदारी है। वहीं 31 मार्च 2022 के आकड़ो के अनुसार कंपनी के ऊपर सभी ब्याज को मिलाकर 1,97,878.2 करोड़ रुपए का कर्ज है।
कम हो जाएगा कंपनी का कर्ज
अगर सरकार वोडाफोन-आइडिया में अपनी हिस्सेदारी लेती है तो कंपनी के ऊपर से कर्ज कम हो जाएगा। हालांकि प्रमोटरों की हिस्सेदारी की कम हो जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार सरकार के द्वारा हिस्सेदारी लेने के बाद वोडाफोन ग्रुप के पास से लगभग 28.5% और आदित्य बिड़ला के पास से 17.8% हिस्सेदारी कम हो जाएगी।
Updated on:
24 Jun 2022 03:15 pm
Published on:
24 Jun 2022 03:14 pm
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