अमरीका की दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प (Microsoft Corp.) के सीईओ सत्या नडेला (Satya Nadella) के बेटे जेन नडेला (Zain Nadella) का निधन हो गया है। जेन ने 26 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। माइक्रोसॉफ्ट ने अपने एक्सीक्यूटिव स्टाफ को एक ईमेल में इसकी जानकारी दी।
माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प (Microsoft Corp.) के सीईओ सत्या नडेला (Satya Nadella) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। उनके बेटे जैन नडेला (Zain Nadella) का निधन हो गया है। जैन नडेला ने 26 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। दरअसल जैन बचपन से ही सेरेब्रल पाल्सी बीमारी से ग्रसित थे। मिली जानकारी के मुताबिक जैन नडेला का इलाज चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल में चल रहा था। जैन की मौत के बाद हॉस्पिटल के सीईओ जेफ स्पेरिंग ने बोर्ड से एक मैसेज साझा किया। इस मैसेज में कहा गया था कि, 'जैन को म्यूजिक की पसंद के लिए याद किया जाएगा।'
अपनी किताब में सत्या बेटे की बीमारी की थी बात
दरअसल माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला की वर्ष 2017 में एक किताब आई थी। इसमें उन्होंने सेरेब्रल पाल्सी से जूझ रहे अपने बेटे से जुड़ी कई बातों का जिक्र भी किया था। उन्होंने बताया था कि, सेरेब्रल पाल्सी एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर होता है जो बच्चों की शारीरिक गति, चलने-फिरने की क्षमता को प्रभावित करता है।
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बेटे को लेकर क्या बोले थे सत्या नडेला
सत्या नडेला कई मौकों पर अपने बेटे जैन के बारे में बात कर चुके। सत्या ने बताया था कि उनके करियर में बेटे जैन का बहुत योगदान रहा है। एक बार उन्होंने कहा था, 'जैन के पैदा होने के बाद मेरे लिए चीजें बदलने लगीं। उसके जन्म ने हर चीज पर असर किया। 'मैं कैसे सोचता हूं, कैसे लीड करता हूं और किस तरह लोगों से जुड़ता हूं...ये सब जैन के आने से बदल गया।'
जैन ने निधन पर कंपनी ने स्टाफ को एक ईमेल भेजा। इसमें कहा कि सभी शोक संतप्त परिजनों के लिए प्रार्थना करें और उन्हें इससे बाहर आने की प्राइवेसी व स्पेस दें।
क्या है सेरेब्रल पाल्सी?
सेरेब्रल पाल्सी बच्चो में उनके मस्तिष्क और मांसपेशियों से जुड़ी समस्या होती है, जो करीब तीन साल से ज्यादा उम्र के 1,000 में से लगभग दो से तीन बच्चों को होती है।
भारत में लगभग 5 लाख बच्चे एवं वयस्क इस बीमारी से जूझ रहे हैं। यह बीमारी मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में चोट लगने के कारण होती है, जो बच्चों में होने वाली मोटर डिजीज में से सबसे आम बीमारी है। यह बीमारी संक्रामक नहीं होती है। हालांकि ये लक्षण सभी बच्चों में अलग-अलग हो सकते हैं।
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