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Venezuela Crisis: तेल नहीं, डिफेंस होगी अगले दशक की थीम! भारत ने पहले ही समझ लिया

Venezuela Crisis: वेनेजुएला के इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत और पूरी तरह से शुरू होने में कई साल लग सकते हैं। अभी वेनेजुएला दुनिया के कुल तेल सप्लाई का 1% से भी कम देता है, जबकि उसके पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार हैं।

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भारत ने डिफेंस पर अपना फोकस बढ़ाया है (PC: AI)

जिस देश के पास तेल है, वो ही दुनिया पर राज करेगा, ये बात कुछ हद तक ही ठीक है, अगर वो देश अपने तेल रिजर्व की सुरक्षा नहीं कर सकता तो उसके तेल भंडार उसके नहीं किसी और के होंगे। जैसा कि वेनेजुएला के साथ हुआ। इसलिए अब दुनिया पर वो ही राज करेगा जिसका डिफेंस मजबूत होगा। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल रिजर्व है, मगर सप्लाई के नाम पर ज्यादा खास नहीं। हालांकि वेनेजुएला का संकट सिर्फ सैन्य कमजोरी नहीं, बल्कि आर्थिक कुप्रबंधन और राजनीतिक अस्थिरता का भी नतीजा है। जो ऑयल रिजर्व वेनेजुएला की सबसे बड़ी ताकत बननी चाहिए थे, वो उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गई। क्योंकि सेना के दम पर अमेरिका ने वेनेजुएला की तेल संप्रभुता को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है।

डिफेंस होगी दशक की थीम

शेयर बाजार के कई दिग्गज भी अब ये बात कह रहे हैं कि डिफेंस इस दशक की सबसे बड़ी थीम बनकर उभर रही है। कंप्लीट सर्कल के मैनेजिंग पार्टनर और CEO गुरमीत चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा कि आज किसी देश की असली ताकत तेल, प्राकृतिक संसाधन, एक्सपोर्ट या विदेशी मुद्रा के भंडार में नहीं है। असली ताकत सैन्य शक्ति और मजबूत रक्षा व्यवस्था में है, जो देश की संप्रभुता बचाती है, कारोबार के हितों की रक्षा करती है और राष्ट्र की इज्जत बनाए रखती है। वो लिखते हैं कि डिफेंस इस दशक की सबसे बड़ी थीम है।

गुरमीत चड्ढा लिखते हैं कि आजकल वेनेजुएला का संकट और दुनिया भर में बढ़ता तनाव इसे और साफ दिखा रहा है। वेनेजुएला का उदाहरण फिर से बता रहा है कि बिना मजबूत सेना और रणनीति के आर्थिक ताकत कितनी कमजोर हो सकती है। दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार होने के बावजूद वहां राजनीतिक अस्थिरता, प्रतिबंध, बाहर से दबाव और अंदरूनी अशांति बनी हुई है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक एनालिस्ट्स और ट्रेडर्स का कहना है कि वेनेजुएला की के इंफ्रास्ट्रक्चर की पूरी मरम्मत और पूरी तरह से शुरू होने में कई साल लग सकते हैं। अभी वेनेजुएला दुनिया के कुल तेल सप्लाई का 1% से भी कम देता है, जबकि उसके पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार हैं। वेनेजुएला में जो कुछ भी हो रहा है वो इस बात की ओर इशारा करता है कि किसी देश के पास सबसे ज्यादा प्राकृतिक संसाधन क्यों न हों, उससे स्थिरता, शांति तरक्की नहीं आ सकती।

डिफेंस को मज़बूत करता भारत

इसलिए भारत ने डिफेंस पर बिल्कुल सही वक्त पर ध्यान दिया। पिछले हफ्ते रक्षा मंत्रालय ने सेना की लड़ाई की तैयारियों को मजबूत करने के लिए 4,666 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट साइन किए हैं।
इस डील के तहत 4.25 लाख से ज्यादा क्लोज क्वार्टर बैटल (CQB) कार्बाइन खरीदे जाएंगे। इनके साथ एक्सेसरीज भी आएंगी और कुल कीमत 2,770 करोड़ रुपये है। ये हथियार भारत फोर्ज लिमिटेड और PLR सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड सप्लाई करेंगे। ये दोनों भारतीय सेना और नौसेना में शामिल किए जाएंगे। यह कदम सरकार के उस बड़े प्लान का हिस्सा है जिसमें सैनिकों के हथियारों को आधुनिक बनाया जा रहा है।

सरकार ने करीब 1,896 करोड़ रुपये का एक और कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। इसमें भारतीय नौसेना की कलवरी क्लास पनडुब्बियों के लिए 48 हेवी वेट टॉर्पिडो खरीदे और लगाए जाएंगे। ये टॉर्पिडो इटली की कंपनी WASS सबमरीन सिस्टम्स S.R.L. से आएंगे। इस खरीद से छह कलवरी क्लास पनडुब्बियों की लड़ाई की ताकत काफी बढ़ जाएगी। डिलीवरी अप्रैल 2028 से शुरू होगी और 2030 की शुरुआत तक पूरी हो जाएगी।

वित्त वर्ष 2026 में मंत्रालय ने अभी तक सेना को आधुनिक बनाने के लिए 1,82,492 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट साइन कर लिए हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में और जोर आया, जब भारत की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने 79,000 करोड़ रुपये की बड़ी खरीद को मंजूरी दी। इससे सेना, नौसेना और वायुसेना की ताकत और बढ़ेगी।

इसके पहले भारत ने डिफेंस में मेक इन इंडिया को बढ़ावा दिया है। साल 2021 में तेजस Mk-1A फाइटर जेट्स की डील की। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ करीब 48,000 करोड़ रुपये की डील साइन की गई। इसमें भारतीय वायुसेना के लिए 83 तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) Mk-1A सप्लाई होंगे। यह भारत की स्वदेशी फाइटर जेट क्षमता को बड़ा बूस्ट देती है।

साल 2025 में HAL के साथ 156 प्रचंड हेलिकॉप्टर्स की खरीद के लिए करीब 62,700 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड डील हुई। यह ऊंचाई वाले इलाकों (जैसे लद्दाख) के लिए खास बनाया गया स्वदेशी हेलिकॉप्टर है, जो सेना और वायुसेना दोनों के लिए है।