
सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की नजर किंगफिशर एयरलाइंस के मालिक विजय माल्या के बाद अब देश के दूसरे सबसे बड़े विल्फुल डिफाल्टर विनसम ग्रुप पर है। जिसके चलते ग्रुप ने लोकल लैंडर्स का पैसा चुकाया। हालांकि यह पैसा कंपनी के ऊपर बिलियन डॉलर लोन के मुकाबले बहुत थोड़ा है। जानकारी के मुताबिक विनसम ग्रुप ने करीब 1,50,000 डॉलर रि-पे किए हैं। इसे विजय माल्या के ऊपर हो रही कार्रवाई का डर माना जा रहा है। हालांकि कंपनी ने इस बात को खारिज किया है।
जतिन मेहता का क्या कहना है?
कुछ सालों से देश से बाहर रह रहे विनसम ग्रुप के प्रोमोटर जतिन मेहता का दावा है कि विदेशों में रहने वाले उनके हीरा खरीदारों द्वारा पैसे न देने से विनसम ग्रुप का कारोबार चौपट हो गया। बता दें कि विनसम ग्रुप का 14 बैंकों से करीब 6,800 करोड़ रुपए का लोन है।
बैंकों ने जारी किया था क्रेडिट लेटर
लोकल लैंडर्स ने केंद्रीय एजेंसियों से उस समय विल्सन ग्रुप की विल्फुल डिफाल्ट की शिकायत की, जब उन्हें लगा कि आसानी से पैसे रिकवर नहीं किए जा सकते हैं। इसके बाद लोकल बैंक्स ने इंटरनेशनल बुलियन बैंक जैसे स्टैंडर्ड बैंक ऑफ साउथ अफ्रीका, स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक लंदन और स्कॉटिया बैंक को क्रेडिट लेटर इश्यू किया, जो विनसम ग्रुप को गोल्ड सप्लाई करते थे।
2013 में विल्फुल डिफॉल्टर हुई थी कंपनी
समझौते के तहत अगर विनसम बुलियन बैंकों का भुगतान करने में असमर्थ रहता है, तो भारतीय बैंक गोल्ड कंसाइमेंट का भुगतान करेंगी। 2013 में कंपनी के डिफॉल्टर घोषित होने के बाद इंडियन बैंक्स ने ग्लोबल बुलियन बैंक्स को भुगतान किया। इसी दौरान कंपनी ने बैंकों के साथ बातचीत कर ऋण का पुनर्गठन करने के लिए, 2.3 मिलियम डॉलर के करीब चुकाया था। हालांकि बैंकों ने कंपनी के ऋण पुनर्गठन के प्रस्ताव को मानने से इंकार कर दिया। अब दो साल के अंतराल के बाद कंपनी ने 1,50,000 डॉलर चुकाया है। हालांकि विनसम के अधिकारियों ने इसे माल्या के ऊपर हो रही कार्रवाई का नतीज कहने से इंकार किया है।
विनसम ग्रुप पर करीब 6000 करोड़ का कर्ज
सीबीआई ने विनसम ग्रुप के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। विनसम ग्रुप पर 6,000 करोड़ रुपए के कर्ज को जानबूझकर न चुकाने का आरोप है। इन्हीं आरोपों की जांच के लिए सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की है। पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत के आधार पर यह एफआईआर दर्ज की गई है। विनसम ग्रुप को दिए गए कर्ज में पीएनबी प्रमुख ऋणदाता है। पीएनबी का कंपनी पर करीब 1800 करोड़ का लोन है।
देश के दूसरे सबसे बड़े विलफुल डिफॉल्टर
हीरों के कारोबार से जुड़ा विंसम ग्रुप देश का सबसे बड़ा विलफुल डिफॉल्टर में से एक है। इस कंपनी का पूरा नाम विंसम फॉरेवर प्रिशियस ग्रुप है। सिबिल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ग्रुप ने देश के बैंकों का करीब 3969 करोड़ रुपए का कर्ज नहीं चुकाया है। बैंकों ने इस ग्रुप के खिलाफ कई मुकदमें दायर किए हैं। विंसम ग्रुप के प्रमोटर जतिन मेहता माल्या की ही तरह 3 साल पहले विदेश भाग चुके हैं। सीबीआई और ईडी इसकी जांच कर रहे हैं।
क्या होता है विलफुल डिफॉल्टर?
कोई भी व्यक्ति या कंपनी जिसके पास लोन चुकाने लायक रकम हो, लेकिन वह बैंक की किश्त अदा नहीं करे और बैंक उसके खिलाफ अदालत में चला जाए। ऐसा व्यक्ति या कंपनी विलफुल डिफॉल्टर कहलाता है।
Published on:
27 Apr 2016 08:09 pm
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