
Property
नई दिल्ली। नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर प्रॉपर्टी मार्केट पर देखने को मिला है। प्रॉप इक्विटी की रिपोर्ट के बाद नोटबंदी के बाद जनवरी से मई तक प्रॉपर्टी की कीमतों में 40 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है। इस अवधि में केवल 1.10 लाख मकान ही बिके हैं। जबकि पिछले साल इस अवधि में 1.87 लाख मकान बेचे गए थे। सरकार के कई प्रयासों के बावजूद रियल एस्टेट मार्केट में तेजी आने की संभावना नहीं है। जीएसटी लागू होने के बाद भी अभी 8-9 माह तक रियल एस्टेट मार्केट में स्लो-डाउन रहेगा। केपीएमजी और मैजिक ब्रिक द्वारा जारी एक स्टडी रिपोर्ट में यह बात कही गई है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है पिछले तीन साल से चल रहे स्लो-डाउन के बावजूद भारत के रियल एस्टेट में काफी संभावनाएं हैं और दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले भारत में प्रॉपर्टी की कीमतें कम है।
क्यों गिरे दाम
प्रॉप इक्विटी की रिपोर्ट के मुताबिक गिरावट की सबसे बड़ी वजह नोटबंदी रही। नोटबंदी के कारण नये प्रॉपर्टी की लांचिंग में भी 62 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जनवरी से मई तक केवल 70,450 नए प्रोडक्ट लांच किए गए जबकि पिछले साल इस अवधि के दौरान 1,85,820 नए प्रोडक्ट लांच किए गए थे। जानकारों के मुताबिक जीएसटी और रियल एस्टेट रेग्युलेशन एक्ट रेरा का शॉर्ट टर्म इम्पैक्ट अच्छा नहीं रहेगा। कम से कम आठ से नौ महीने का समय लगेगा, इसके बाद रियल एस्टेट मार्केट में सुधार होगा। जीएसटी को लेकर अभी मार्केट में असमंजस है। डेवलपर्स और बायर्स को लग रहा है कि कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर टैक्स ज्यादा लग रहा है। वहीं, अब तक इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर असमंजस की स्थिति है। इसे दूर करने में समय लगेगा। वहीं, रेरा की वजह से भी मार्केट में काफी असमजंस है।
स्थिति सुधरने में लगेंगे 8-9 महीने
केपीएमजी के मुताबिक आठ-नौ महीने बाद रियल एस्टेट मार्केट में सुधार होने लगेगा और कुछ समय बाद रियल एस्टेट मार्केट का नए शेप में उभरेगा। मार्केट में ऑर्गनाइज्ड प्लेयर्स का रोल बढ़ जाएगा। रेरा और जीएसटी की वजह से मार्केट में ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी और मार्केट पर बायर्स का विश्वास बढ़ेगा। एंड यूजर्स के लिए मार्केट में अभी भी काफी पोटेंशियल है।
कैसे सुधरेगी स्थिति
केपीएमजी की रिपोर्ट के मुताबिक अगले कुछमहीनों में प्रॉपर्टी मार्केट में सुधार होने के कारण रेरा और जीएसटी के अलावा ब्याज दरों में कटौती, होम बायर्स के लिए ब्याज में छूट और रियल एस्टेट व कंस्ट्रक्शन सेक्टर में एफडीआई नियमों के आसान बनाना है।
Published on:
02 Jul 2017 07:29 pm
बड़ी खबरें
View Allउद्योग जगत
कारोबार
ट्रेंडिंग
